January 25, 2026

आ स. संवाददाता 
कानपर।
आईआईटी हॉस्टल में सुसाइड करने वाले रिसर्च स्कॉलर अंकित यादव के ताऊ रामतीरथ यादव ने भतीजे की मौत के पीछे आईआईटी कानपुर प्रबंधन को जिम्मेदार ठहराया है। बेटे के सुसाइड की सूचना मिलते ही पूरा परिवार कानपुर पहुंच गया। पोस्टमॉर्टम के बाद शव परिजनों को सौंप दिया गया।  

आईआईटी कैंपस में वह परेशान रहता था। मेस वाले उसको तंग कर रहे थे। खाने-पीने के टाइम टेबल में बदलाव कर दिया था। जब तक वह अपनी क्लास से फुरसत पाता था, तब तक मेस बंद हो जाता था। वह अपने खाने को लेकर काफी परेशान हो रहा था। मेस वाले कहते थे कि बाहर जाकर खा लो। वह बाहर का कुछ नहीं खाता था। फोन पर यह सारी बातें वह अपनी मां से कहता था। हम लोग मजबूर थे, आईआईटी प्रबंधन कुछ नहीं सुन रहा था।
नोएडा के जागृति अपार्टमेंट सेक्टर-71 में रहने वाले  रामसूरत यादव का बेटा अंकित यादव कानपुर आईआईटी में केमिस्ट्री से पीएचडी कर रहा था। यह उसका पहला साल था। अंकित यादव ने सोमवार शाम 5 बजे सुसाइड कर लिया।
आईआईटी के सुरक्षा अधिकारी को सूचना मिली कि कैंपस के हॉस्टल एच-103 में छात्र का शव लटका हुआ है। पुलिस को कमरे से 3 लाइन का सुसाइड नोट मिला। जिसमें लिखा था कि मैं क्विट कर रहा हूं…इसमें कोई इन्वॉल्व नहीं है। यह मेरा अपना निर्णय है।
मृतक के चाचा प्रदीप यादव ने कहा कि अभी आईआईटी  प्रशासन से हमारी कोई बात नहीं हुई है। अंकित के पिता और मां की हालत इतनी खराब है कि वह पोस्टमॉर्टम हाउस भी नहीं आए हैं। अभी हम लोग बात करने की स्थिति में नहीं हैं, लेकिन दो दिन बाद लौटकर आएंगे और अंकित के सुसाइड के पीछे जो भी वजह होगी, उसके खिलाफ शिकायत करेंगे।
कानपुर आईआईटी प्रशासन को विचार करने की जरूरत है। ये कभी भी इंसाफ नहीं दे सकते हैं। अंकित ने अपनी मम्मी से बात की थी, गाइड की इसके पीछे अहम भूमिका है। क्योंकि छात्रों के साथ उनका नेगेटिव एप्रोच है, उनकी वजह से 12 छात्रों ने पीएचडी छोड़ दी। यह अपने आप में बता रहा है कि वह क्यों छोड़कर चले गए।
चाचा प्रदीप यादव ने बताया कि हमारा तो कुछ बचा नहीं है। हमारे देश की प्रतिभाओं का और नुकसान न हो, इसलिए एक्शन लेंगे। हमारा बच्चा इतने सरल स्वभाव का था। समझ हीं नहीं आ रहा कि सुसाइड क्यों किया? मैं इतना जान रहा हूं कि मेरा बच्चा किसी भी तरह से गलत नहीं था।
जब अंकित अपने पापा की कोई बात नहीं समझ पाता था, तब मैं उससे बात करता था। लास्ट टाइम पर अंकित ने अपनी मां से बात की थी। वह अपनी मां से ज्यादा घुला-मिला था।
अंकित के पिता रामसूरत यादव नोएडा में एक निजी फार्मा कंपनी में चीफ साइंटिस्ट हैं। हम लोग आजमगढ़ के फूलपुर तहसील के उखरी गांव के रहने वाले हैं। अंकित का भाई संचित, मां सुनीता और परिवार के सभी लोग रात में ही कानपुर आ गए थे। पूरा परिवार होटल में रुका हुआ है। सुसाइड की जानकारी मिलते के बाद से माता-पिता और भाई सब बेहाल हैं।
चाचा प्रदीप यादव ने कहा कि कानपुर आईआईटी में यह छठवां-सातवां सुसाइड केस है। इसके अलावा चार रेप केस हो चुके हैं। ये कानपुर का बड़ा ब्लैक स्पॉट है। मेरा भतीजा चला गया मेरे परिवार का सबकुछ नष्ट हो गया।
अंकित ने 2 बार गेट क्वालीफाई किया था। उसने आईआईटी से केमिस्ट्री में रिसर्च करने के लिए दाखिला लिया था। अंकित कह रहा था कि अब मुझे नौकरी करनी है, लेकिन हम लोगों ने कहा कि पहले अपना एकेडमिक वर्क करो। यहां पैसे की कोई परेशानी तो है नहीं। इसके बाद उसने आईआईटी में दाखिला लिया था।
इस पूरे मामले में कानपुर आईआईटी के डायरेक्टर प्रो. मणिंद्र अग्रवाल ने कहा कि रिसर्च स्कॉलर के सुसाइड के बाद एक जांच कमेटी गठित की गई है। छात्र के सुसाइड के बाद जिन लोगों पर और जो-जो भी आरोप हैं या संदेह है सभी तथ्यों की जांच की जाएगी। जांच रिपोर्ट में अगर कोई दोषी पाया जाएगा तो उसके खिलाफ कार्रवाई की जाएगी।
कानपुर पुलिस कमिश्नर हरीश चंदर ने कहा कि छात्र ने अपने सुसाइड नोट में किसी को भी जिम्मेदार नहीं ठहराया है। इसके साथ ही छात्र के परिवार ने अभी तक किसी के खिलाफ कोई तहरीर नहीं दी है। फिर भी मामले में पुलिस अपने स्तर पर जांच कर रही है। अगर कोई क्राइम एंगल सामने आएगा तो पुलिस मामले में कार्रवाई करेगी। पुलिस ने मृतक का मोबाइल और लैपटॉप भी जांच के लिए कब्जे में लिया है।
सुसाइड की सूचना पर पुलिस और फोरेंसिक टीम मौके पर पहुंची थी। पुलिस ने सुसाइड नोट के साथ ही रिसर्च स्कॉलर अंकित यादव के मोबाइल और लैपटॉप को अपने कब्जे में लिया था।
डीसीपी वेस्ट राजेश कुमार सिंह ने बताया कि छात्र के कॉल डिटेल, वॉट्सऐप चैट से जानने का प्रयास किया जा रहा है कि मौत से पहले किससे क्या बात हुई। छात्र अचानक इतने तनाव में क्यों आ गया। इससे सुसाइड कांड के पीछे की वजह साफ हो सकेगी। 

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