
संवाददाता
कानपुर। भारतीय ज्ञान परंपरा – भूत, वर्तमान एवं भविष्य भौतिक विज्ञान के परिप्रेक्ष्य में दो दिवसीय राष्ट्रीय सेमिनार आयोजित किया गया। डीएवी कॉलेज के भौतिक विज्ञान विभाग की ओर से आयोजित सेमिनार का समापन बुधवार को किया गया। समापन दिवस पर विद्वानों ने वैदिक ज्ञान और आधुनिक विज्ञान के बीच गहरे संबंधों को नए दृष्टिकोण के साथ प्रस्तुत किया।
सेमिनार में वक्ताओं ने माना कि इस तरह के आयोजन न केवल भारतीय ज्ञान परंपरा की वैश्विक प्रासंगिकता को रेखांकित करता है, बल्कि यह भी संकेत देता है कि विज्ञान और दर्शन के समन्वय से भविष्य की दिशा तय हो सकती है।
मुख्य वक्ता के रूप में बीएनडी कॉलेज के प्रो. अनोखे लाल पाठक ने अपने संबोधन में कहा कि वैदिक दर्शन केवल भारत की सीमाओं तक सीमित नहीं रहा, बल्कि इसने विश्व के महान वैज्ञानिकों की सोच को भी गहराई से प्रभावित किया है। उन्होंने उदाहरण देते हुए बताया कि परमाणु बम के जनक ओपेनहाइमर ने संस्कृत सीखकर श्रीमद्भगवद्गीता का अध्ययन किया और उससे प्रेरणा ग्रहण की। वहीं, विद्युत अभियांत्रिकी के क्षेत्र में क्रांतिकारी योगदान देने वाले निकोला टेस्ला भी स्वामी विवेकानंद के संपर्क में आकर वेदांत दर्शन की ओर आकर्षित हुए।
प्रो. पाठक ने आगे बताया कि परमाणु संरचना के जनक नील्स बोहर तथा नोबेल पुरस्कार विजेता वर्नर हाइजेनबर्ग भी गुरुदेव रविंद्रनाथ टैगोर के विचारों से प्रभावित होकर भारतीय दर्शन की गहराइयों को समझने का प्रयास करते रहे। यह तथ्य इस बात का प्रमाण है कि भारतीय ज्ञान परंपरा ने वैश्विक वैज्ञानिक चिंतन को नई दिशा देने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है।
डीबीएस कॉलेज के प्रो. अभिषेक जौहरी ने अपने वक्तव्य में कहा कि वैदिक ज्ञान आज भी प्रासंगिक है और इसका उपयोग आधुनिक वैज्ञानिक क्षेत्रों—जैसे कृषि, भूगर्भ विज्ञान, चिकित्सा, आयुर्वेद और ज्योतिष—में व्यापक रूप से किया जा रहा है। उन्होंने जोर देते हुए कहा कि यदि प्राचीन ज्ञान और आधुनिक विज्ञान का समन्वय किया जाए, तो भविष्य में नवाचार और अनुसंधान के नए द्वार खुल सकते हैं।
समापन सत्र के मुख्य अतिथि सीडीसी निदेशक प्रो. आर. के. द्विवेदी का महाविद्यालय के प्राचार्य अरुण दीक्षित एवं भौतिक विज्ञान विभागाध्यक्ष डॉ. राजीव श्रीवास्तव ने पुष्पगुच्छ भेंट कर स्वागत किया।
कार्यक्रम में विशिष्ट अतिथि के रूप में डॉ. प्रज्ञा अग्रवाल उपस्थिति रही।
देशभर के विभिन्न महाविद्यालयों और विश्वविद्यालयों से आए प्रोफेसरों एवं छात्र-छात्राओं ने सेमिनार में सक्रिय भागीदारी निभाई, जिससे विचारों का व्यापक आदान-प्रदान संभव हुआ। कार्यक्रम के अंत में आयोजन सचिव डॉ. अभय सक्सेना ने सभी अतिथियों और प्रतिभागियों के प्रति आभार व्यक्त करते हुए सेमिनार को सफल बनाने में उनके योगदान की सराहना की।






