• न्यायालय ने 14 दिन की न्यायिक रिमांड की अर्जी करी खारिज।

संवाददाता
कानपुर। नगर के बहुचर्चित लैंबॉर्गिनी कार हादसे प्रकरण में गुरुवार को बड़ा घटनाक्रम सामने आया। गुरुवार की सुबह दिल्ली से गिरफ्तार आराेपी शिवम मिश्रा को पुलिस ने सीधे कोर्ट में पेश किया, जिसके बाद पुलिस ने शिवम की 14 दिनों की न्यायिक रिमांड मांगी।
यह मामला हाई प्रोफाइल होने के चलते अदालत में सुबह इसकी सुनवाई शुरू हुई, जिसके बाद फैसले को भोजनावकाश तक सुरक्षित रखा गया। लंच के बाद एसीएमएम 7 की कोर्ट ने आरोपी की जमानत याचिका की मंजूरी पर फैसला सुना दिया। एसीएमएम कोर्ट ने आरोपी शिवम मिश्रा को राहत देते हुए पुलिस द्वारा मांगी गई 14 दिन की न्यायिक रिमांड की अर्जी खारिज करके शिवम मिश्रा को 20 हजार रुपये के निजी मुचलके पर जमानत दे दी। अदालत के इस फैसले के बाद हाई-प्रोफाइल माने जा रहे इस मामले ने एक बार फिर शहरभर में चर्चा पकड़ ली है।
मामले की सुनवाई के दौरान पुलिस की ओर से यह तर्क रखा गया कि हादसे के समय लैंबॉर्गिनी कार की ड्राइविंग सीट पर शिवम मिश्रा ही मौजूद था। जांच के दौरान पुलिस ने इससे जुड़े साक्ष्य जुटाने का दावा भी किया। हालांकि, अदालत में सुनवाई के दौरान पुलिस की नोटिस प्रक्रिया को लेकर गंभीर सवाल खड़े हो गए।अदालत को बताया गया कि विवेचक द्वारा आरोपी को दो बार नोटिस दिए जाने की प्रक्रिया पूरी की गई थी, लेकिन इसका पर्याप्त और ठोस प्रमाण अदालत के सामने पेश नहीं किया जा सका।
इसी आधार पर न्यायालय ने टिप्पणी करते हुए कहा कि नोटिस प्रक्रिया स्पष्ट न होने की स्थिति में आरोपी को न्यायिक रिमांड पर भेजना उचित नहीं है। परिणामस्वरूप पुलिस की 14 दिन की रिमांड अर्जी को खारिज कर दिया गया।
अदालत से जमानत मिलने के बाद शिवम मिश्रा को एम्बुलेंस के जरिए ले जाया गया, जिसे लेकर भी चर्चाओं का दौर जारी रहा। फिलहाल इस फैसले के बाद पुलिस की आगे की कार्रवाई और जांच की दिशा पर सभी की नजरें टिकी हुई हैं।






