
संवाददाता
कानपुर। आईआईटी कानपुर में शनिवार को युवती का शव फंदे पर लटकता मिला।
झारखंड के जादूगोड़ा की रहने वाली अंजू कुमारी आईआईटी कानपुर में जूनियर टेक्नीशियन थी। वह यहां तीन साल से कार्यरत थी। सूचना पर पहुंचे एडीसीपी कपिलदेव सिंह ने बताया कि अंजू की शादी उड़ीसा के पावर हाउस में तैनात पंकज से तय हुई थी। दोनों की कुछ दिनों बाद सगाई भी होनी थी।
धीरे-धीरे दोनों के बीच कॉल पर बात होने लगी थी। रोज की तरह वैलेंटाइन डे की सुबह भी अंजू अपने मंगेतर पंकज से बात कर रही थी। इस दौरान किसी बात को लेकर दोनों के बीच कहासुनी हो गई। मंगेतर ने चिल्लाकर डांट दिया। इसके बाद अंजू ने कहा- अब मैं फांसी लगाने जा रही। फिर कॉल कट कर दी।
इसके बाद पंकज ने आईआईटी कैंपस में रहने वाले अपने दोस्त सूरज को कॉल की। सूरज कहीं बिजी था तो उसने अपने भाई सुरेश को अंजू के रूम पर भेजा। सुरेश दौड़ते हुए पहुंचा तो रूम का दरवाजा बंद मिला। लगातार दरवाजा खटखटाने के बाद भी कोई रिस्पॉन्स नहीं मिला तो वॉर्डन को जानकारी दी।
सुरेश और वॉर्डन ने पुलिस को सूचना दी। इसी बीच रूम का दरवाजा भी तोड़ दिया। अंदर देखा तो अंजू का शव पंखे के सहारे फंदे से लटक रहा था। उसे उतार कर आईआईटी कैंपस के अस्पताल ले जाया गया, जहां डॉक्टरों ने उसे मृत घोषित कर दिया। घटना की सूचना पर कल्याणपुर पुलिस मौके पर पहुंची।
कमरे में पुलिस को डायरी और कुछ पन्नों के टुकड़े मिले हैं, जिनसे सुसाइड की वजह का पता चल सकता है।
कमरे में पुलिस को डायरी और कुछ पन्नों के टुकड़े मिले हैं, जिनसे सुसाइड की वजह का पता चल सकता है।
युवती की कुछ दिन बाद सगाई होनी थी
एडीसीपी वेस्ट कपिल देव सिंह भी फोर्स के साथ मौके पर पहुंचे। उन्होंने बताया कि जांच के दौरान रूम से एक डायरी मिली है। युवती ने इसमें अपनी निजी जिंदगी को लेकर काफी कुछ लिखा है। डायरी पढ़ने के बाद पता चला कि युवती की कुछ दिन बाद सगाई होनी थी। सुसाइड के पीछे की वजह जानने के लिए पुलिस जांच में जुटी है।
एडीसीपी के मुताबिक, जांच में सामने आया कि युवती के भाई ने भी करीब एक साल पहले फंदा लगाकर सुसाइड किया था। इसके बाद से युवती डिप्रेशन में थी। लेकिन इधर शादी तय होने के बाद काफी हद तक सामान्य हो गई थी।
परिजनों की मानें तो बेटी ने कभी बातचीत के दौरान उनसे कुछ नहीं बताया। सुसाइड क्यों किया, उन्हें भी कुछ समझ नहीं आ रहा है। बेटी के सुसाइड की सूचना मिलते ही परिवार वालों का रो-रोकर बुरा हाल है। परिवार के लोग झारखंड से कानपुर के लिए निकल चुके हैं। उनके आने के बाद रविवार को शव का पोस्टमॉर्टम होगा।
आपको जानकर हैरत होगी, लेकिन ये बात सच है। देश भर की आईआईटी में पिछले दो सालों में कुल 30 आईआईटी छात्रों ने आत्महत्या की है, जिनमें से 10, यानी एक तिहाई मौतें अकेले आईआईटी कानपुर परिसर में हुई हैं। यह देश के 23 में से किसी भी आईआईटी में हुई मौतों की सबसे अधिक संख्या है।
आईआईटी कानपुर के बाद, खड़गपुर में इस अवधि के दौरान 7 आत्महत्याओं के साथ दूसरा सबसे अधिक आंकड़ा दर्ज किया गया, जबकि आईआईटी खड़गपुर में आईआईटी कानपुर की तुलना में डेढ़ गुना अधिक छात्र हैं।
आईआईटी की काउंसिलिंग सेल में शिक्षकों, छात्रों, कर्मचारियों, सुरक्षाकर्मियों, एसआईएस गार्ड, डॉक्टर, पैरामेडिकल स्टाफ, लाइब्रेरी कर्मचारियों, हॉस्टल प्रबंधकों, मेस और सफाई कर्मचारियों के लिए मानसिक स्वास्थ्य पर जागरूकता और संवेदनशीलता कार्यशालाएं आयोजित की जाती हैं।
किसी भी आपात स्थिति में छात्रों को दिन-रात सहायता देने के लिए सीएमएचडब्ल्यू और स्वास्थ्य केंद्र के बीच समन्वय के साथ 24 घंटे की व्यवस्था की गई है। छात्रों के मानसिक स्वास्थ्य को लेकर नियमित रूप से जागरूकता कार्यक्रम और कार्यशालाएं आयोजित की जाती हैं।
यूजी और पीजी छात्रों के लिए पीयर मेंटरिंग की व्यवस्था है, जिसमें सीनियर छात्र नए छात्रों को सहयोग और मार्गदर्शन देते हैं।
लेकिन एक के बाद एक सुसाइड होने से आईआईटी की इस व्यवस्था पर सवाल खड़े हो रहे हैं। इससे एक बात तो साफ है कि आईआईटी कानपुर की काउंसिलिंग सेल पूरी तरह से विफल है।





