—एमएचपीएल की घोटाले बाजी और यूपीसीए की उदासीनता की वजह से खेल जगत हो रहा दूषित और ध्वस्त।

भूपेन्द्र सिंह
कानपुर। भारत में खेलों के बढावे और उसके प्रचार-प्रसार को लेकर सरकार जागरूक है। लगभग 140 करोड़ की जनसंख्या वाले राष्ट्र में प्रतिभाओं की कोई कमी नहीं है। लेकिन संसाधनों और सहयोग के अभाव की वजह से गांव -गली -कूचों में कितनी प्रतिभाओं के हुनर ने घुट घुट कर अपना दम तोड़ दिया। लेकिन उनके जागरूकता अभियान में यूपीसीए जैसी खेल संस्था खिलाड़ियों के साथ ही उसके इंफ्रास्ट्रक्चर को क्षतिग्रस्त करने में महारथ हासिल करने में लगा है।सरकार के कितने प्रयासों के बाद भी खेल संबंधित निर्माण और इकाइयों में भ्रष्टाचार की जडे फैलने से रोकी नहीं जा पा रही है।
कानपुर के ग्रीनंपार्क अन्तर्राष्ट्रीय क्रिकेट स्टेडियम में भ्रष्टाचार की भेट चढ रहे नवनिर्मित प्लेयर्स पैवेलियन की खबर सामने आई हैं, जिससे स्टेडियम के निर्माण के दौरान की गयी धांधली पूरी तरह से दिखायी दे रही है। यही नही निर्माण संस्था एमएचपीएल और रखरखाव के लिए जिम्मेदार उत्तर प्रदेश क्रिकेट संघ मुख्य रूप से शामिल देखे जा सकते हैं। 34 करोड की लागत से निर्मित न्यू प्लेयर्स पैवेलियन की दूसरी मंजिल और डाईनिंग हॉल की दुर्दशा भ्रष्टाचार की पराकाष्ठा पार करते हुए दर्द बयान करती दिखायी दे रही है। साल 2016 के मध्य से निर्माणाधीन न्यू प्लेयर्स पैवेलियन 2021 में खेल विभाग ने यूपीसीए को हैण्डओवर किया था। तब ग्रीनपार्क के निवर्तमान आधिकारियों ने इसकी पूरी तरह से जांच पड़ताल तक नहीं की।एक साल तक के नियमों का हवाला देखते हुए भी विभाग ने लापरवाही बरती और अपने काम को लेकर ध्यान नहीं दिया।इसके बाद इन चार सालों में इस प्लेयर्स पैवेलियन की हालत बद से बदतर हो गयी है यूपीसीए इसे संभालने में पूरी तरह से नाकाम रहा है। न्यू प्लेयर्स पैवेलियन की दूसरी मंजिल जो आम तौर पर दर्शकों के लिए बनायी गयी है। यूपीसीए की उदासीनता के चलते पूरी तरह से ढह गई है। यूपीसीए की संवेदनहीनता इस कदर लापरवाही से भरी है कि छत के ढकने के लिए लगायी गयी फाल सीलिंग कई स्थानों पर टूट कर जमीन पर पडी है और उसे होश तक नही है। ये तो गनीमत रही कि ये फाल सीलिंग तब गिरी जब कोई घरेलू या फिर अन्तर्राष्ट्रीय मैच आयोजित नहीं हो रहे थे वर्ना कई दर्शक चोटिल हो सकते थे। इसे यूपीसीए की उदासीनता भरी लापरवाही ही कहेंगे कि नोडल अधिकारी स्तर के अधिकारी पूरे दिन ग्रीनपार्क में अपना डेरा जमाए रहते है फिर भी उन्हे ये सब क्यों नही दिखायी देता।यह मामला सार्वजनिक धन के दुरुपयोग और पारदर्शिता की कमी को उजागर करता है।
ग्रीनपार्क स्टेडियम, जो कभी क्रिकेट मैचों के लिए एक प्रतिष्ठित स्थान था, अब भ्रष्टाचार के आरोपों से घिरा हुआ दिखायी दे रहा है। ग्रीनपार्क से पुराना नाता रखने वाले खिलाडी राघवेन्द्र कुमार के मुताबिक फोटो से प्रतीत होता है कि स्टेडियम के निर्माण में कथित तौर पर भ्रष्टाचार हुआ है, जिसमें निर्माण कम्पनी को अनुचित लाभ पहुंचाया गया और निर्माण सामग्री में गुणवत्ता की कमी पाई गई है।सार्वजनिक धन का दुरुपयोग हुआ है, जिसमें स्टेडियम के रखरखाव और प्रबंधन में खर्चों में अनियमितताएं पाई गई हैं।भ्रष्टाचार के इन मामलों में पारदर्शिता की कमी पाई गई है, जिससे यह पता लगाना मुश्किल हो गया है कि धन का उपयोग कैसे किया गया। भ्रष्टाचार के इन आरोपों से सार्वजनिक विश्वास में कमी आई है, जिससे लोगों में सरकारी संस्थानों के प्रति अविश्वास पैदा हुआ है। इन घटनाओं से सार्वजनिक संस्थानों में भ्रष्टाचार को रोकने और पारदर्शिता बढ़ाने के लिए सुधार की आवश्यकता पर प्रकाश डाला गया है। यह मामला भ्रष्टाचार के खिलाफ लड़ाई में एक महत्वपूर्ण मोड़ है और यह सुनिश्चित करना आवश्यक है कि भविष्य में ऐसी घटनाएं न हों।इस मामले में बात करने के लिए यूपीसीए के सचिव अरविन्द श्रीवास्तव से बात करने को फ़ोन किया गया तो उन्होंने अपने पुराने अंदाज में कॉल फॉरवर्डिंग लगाकर टालने का काम किया। वहीं खेल विभाग के एक अधिकारी ने नाम न छापने की शर्त पर कहा कि पूर्व निर्धारित कमेटी ने अपनी ओर से रिपोर्ट पेश की होगी जिसके बाद विभाग ने यूपीसीए को हैंडओवर किया होगा लेकिन फिर भी ये नहीं होना चाहिए अब इस प्लेयर्स पैवेलियन के देख रेख की पूरी जिम्मेदारी यूपीसीए की है इसका विभाग से कोई लेना देना ही नहीं है। इस को लेकर ग्रीनपार्क में तैनात यूपीसीए के नोडल अधिकारी सुजीत श्रीवास्तव से बात करने की कोशिश भी सफल नहीं हो सकी और कोई अधिकारी बात करने को तैयार ही नहीं हुआ ।






