
संवाददाता
कानपुर। गंगा का जलस्तर खतरे के निशान से महज 11 सेंटीमीटर की दूरी पर पहुंच गया है । 24 घंटे में गंगा बैराज पर 4 सेंटीमीटर पानी की बढ़ोतरी हुई है। जलस्तर गंगा बैराज पर 114.79 मीटर पहुंच गया है। कानपुर से 4 लाख 26 हजार 507 क्यूसेक पानी डिस्चार्ज किया गया है।
तो वहीं हरिद्वार से 1 लाख 47 हजार 365 क्यूसेक पानी कानपुर गंगा में आया है। नरौरा से 1 लाख 28 हजार 716 क्यूसेक पानी कानपुर आया है ।आने वाले 48 घंटे बेहद निर्णायक होंगे। क्योंकि गंगा का जलस्तर जिस तरह से बीते 7 दिनों में बढ़ा है ।
पिछले 4 दिन में गांव में पानी घुस गया है यहां तक कई गांव में लोग घरों में कैद हो गए हैं। जिला प्रशासन लगातार गांव में अलर्ट जारी कर निरीक्षण कर रहा है और राहत पहुंचने के लिए उन तक सामग्री पहुंचाने का भी कार्य कर रहा।
भगवानदीन पुरवा में बीजेपी विधायक अभिजीत सिंह सांगा ने नाव से निरीक्षण किया । तकरीबन 1 घंटे तक अलग-अलग गांव के रास्ते में जाकर जल भराव और जलस्तर की स्थिति को जाना। इसके साथ ही गांव वालों तक राहत सामग्री भी पहुंचाई।
विधायक के साथ संबंधित विभाग के अधिकारी भी मौजूद रहे।गंगा का जल स्तर बढ़ने से तकरीबन 10 गांव प्रभावित हुए हैं। इन गांव में खेतों में लगाई गई फसल पूरी तरह बर्बाद हो गई।
लोगों का किसानी के द्वारा किया जाने वाला रोजगार फिलहाल कुछ दिनों के लिए समाप्त हो गया। इसके साथ ही तीन गांव ऐसे हैं ,जहां के लोग दहशत में है ।क्योंकि गांव में पानी घुस चुका है और कुछ घरों में भी पानी पहुंच चुका है पशुओं को सुरक्षित जगह पहुंचाने का काम इन तीन गांव के लोग कर रहे हैं।
कुछ अपने रिश्तेदारों के यहां भेज रहे हैं ,तो कुछ पशुओं को अपने घर के भीतर बांध रहे हैं। क्योंकि पशु बांधने वाली जगह पूरी तरह से डूब गई है। पानी घर के भीतर खाना बनाने वाली जगह पर भी पहुंच गया है। गांव में रहने वाले कुछ लोगों ने पलायन करना भी शुरू कर दिया है।
बनियापुरवा,भोपालपुर, चैनपुरवा, भगवानदीन पुरवा, और पहाड़ीपुर गांव यह गांव ऐसे हैं ,जहां पर पानी गांव की गलियों रास्तों यहां तक घरों के भीतर पहुंच गया। पशु बांधने वाली जगह पर पानी इस कदर भर गया कि वह पूरी तरह से डूब गए हैं।
प्रधान ने एक व्यवस्था कर रखी है कि ट्रैक्टर लगाया है, जिससे लोग गांव से जलभराव वाले रास्ते से बाहर जाना चाहे तो आ जा सकते हैं। लेकिन फसल बर्बाद होने से हमारा पूरा रोजगार खत्म हो गया है । यहां पर अभी नाव की व्यवस्था नहीं की गई है।
घरवालों को शौचालय जाने में भी दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है। पशुओं की रहने की जगह डूब गई है ।इसलिए पशुओं को घर में बांध लिया है।
गांव में पानी भर जाने से बच्चे बीमार हो गए हैं। हालांकि प्रधान देखरेख करने के लिए आते हैं।आने जाने के लिए ट्रैक्टर लगा रखा है। लेकिन गांव के आसपास खेतों में 20-20 फुट पानी भर गया है।
पूरी फसल बर्बाद हो गई है ।जिसमें तरोई लौकी , फूट ,बैगन लोबिया सब कुछ बर्बाद हो गया। डर इतना है कि रात में छत पर सो रहे हैं कि कहीं पानी इतना ना बढ़ जाए कि घर के भीतर घुसता ही चला जाए। गांव में कुछ घरों में पानी पहुंच भी गया है, उनके घर खाना तक नहीं बन पा रहा है।
फसल बर्बाद होने वाले गांव में रामपुर भगवानदीनपुर, पहाड़ीपुर, बनियापुर, चैनपुरवा और कई अन्य गांव है। तकरीबन 10 गांव में पानी ने खेतों को बर्बाद कर दिया है।
इसलिए रात में छत पर सोते हैं। आसपास रिश्तेदार रहते हैं उनके घर में खाना बना लेते हैं या खाना वहीं बच्चे खा लेते हैं।गांव में रहने वाले लोग जिन्होंने गांव किनारे नाव लगा रखी थी ।
वह लोग आने जाने के लिए नाव का इस्तेमाल कर रहे हैं। इसके साथ ही ग्राम प्रधान के द्वारा गांव से आने जाने वाले लोगों के लिए ट्रैक्टर लगाया गया है ।जिससे लोग आ जा रहे हैं जहां पानी कम है ,उस गांव के लोग ट्रैक्टर से अपने कामों के लिए निकल रहे हैं।






