
संवाददाता
कानपुर। बिल्हौर क्षेत्र में एक के बाद एक मामलों में जांच के बाद मुकदमे दर्ज होने से साफ है कि शिकायतें सही साबित हो रही हैं। सरकार भले ही भ्रष्टाचार पर “न खाएंगे, न खाने देंगे” के दावे करती रहे, लेकिन जमीनी हकीकत इसके उलट ही नजर आती है।
इसी क्रम में कल्याणपुर विकासखंड के बिल्हौर क्षेत्र की कुदौरा ग्राम पंचायत में मनरेगा के तहत बड़ा फर्जीवाड़ा सामने आया है। हैरानी की बात यह है कि इस मामले की शिकायत खुद ग्राम प्रधान ने की और एपीओ की जांच में भी आरोपों की पुष्टि हो गई है।
कुदौरा ग्राम पंचायत की प्रधान चेतना देवी ने खंड विकास अधिकारी को दी गई शिकायत में कहा कि वर्ष 2024-25 और 2025-26 में उनकी पंचायत में मनरेगा के तहत कोई भी विकास कार्य नहीं हुआ। न ही उन्होंने किसी कार्य से संबंधित दस्तावेजों पर हस्ताक्षर किए। प्रधान के अनुसार पंचायत में मनरेगा के नाम पर जो भी कार्य दर्शाए गए हैं, वे सभी फर्जी हैं। उन्होंने मामले में कानूनी कार्रवाई की मांग की है।
शिकायत सामने आते ही बिल्हौर ब्लॉक में तैनात एपीओ प्रीति अग्निहोत्री स्वयं जांच के लिए गांव पहुंचीं। जांच के बाद तैयार रिपोर्ट में मनरेगा के तहत दिखाए गए कई कार्यों में अनियमितता और फर्जी भुगतान की बात सामने आई। रिपोर्ट के मुताबिक चंद्रकली के खेत से ककवन रोड तक चकमार्ग में खड़ंजे के ऊपर मिट्टी कार्य, शिवम, विजय व सुरजीत के खेत का समतलीकरण जैसे कार्य मौके पर नहीं मिले। खेत मालिकों ने भी कार्य न होने की पुष्टि की। इन मामलों में दर्शाया गया खर्च वसूली योग्य बताया गया है। वहीं राकेश के खेत से बृजभूषण के खेत तक चकमार्ग में गुणवत्ता खराब मिलने की बात कही गई।
एपीओ ने अपनी रिपोर्ट में ग्राम प्रधान, सचिव और तकनीकी सहायक को दोषी मानते हुए कार्रवाई की संस्तुति की है। रिपोर्ट में यह भी आरोप लगाया गया कि जांच के दौरान कल्याणपुर विकासखंड में तैनात एक शिक्षक ने सचिवों के पक्ष में रिपोर्ट लगाने का दबाव बनाया और घूस का लालच भी दिया। विरोध करने पर मंत्री से रिश्तेदारी का हवाला देकर धमकी देने का आरोप है।
खंड विकास अधिकारी नेम चंद ने बताया कि शिकायत प्राप्त हुई थी। एपीओ की रिपोर्ट के बाद संतुष्टि के लिए तीन सदस्यीय टीम गठित कर दोबारा जांच कराई जाएगी और दोषियों पर कार्रवाई होगी। अब बड़ा सवाल यह है कि जब काम हुआ ही नहीं, तो लाखों रुपये किसके खाते में गए और जिम्मेदार कौन हैं।






