
संवाददाता
कानपुर। जिला न्यायालय की 6वीं मंजिल से कूद कर जान देने वाली स्टेनो की आत्महत्या का रहस्य 3 महीने के बाद भी नहीं खुल सका है। पुलिस की जांच में पेशकार और चपरासी पर हैरेसमेंट की बात गलत साबित हो चुकी है। दोनों के खिलाफ पुलिस को ऐसे कोई भी साक्ष्य नहीं मिल सके है, जिससे यह साबित किया जा सके कि उन्होंने स्टेनो का हैरेसमेंट किया था।
कॉल डिटेल रिकॉर्ड में चपरासी और पेशकार के स्टेनों से बातचीत के कोई सबूत नहीं मिले है और न ही मृतका की वॉट्सऐप चैट और ईमेल में ऐसा कुछ मिला है, जिसपर संदेह जताया जा सके। अब पुलिस जल्द ही मामले में फाइनल रिपोर्ट कोर्ट में दाखिल करेगी।
पुलिस ने मृतका नेहा, पेशकार और चपरासी के मोबाइल की कॉल डिटेल रिकॉर्ड निकलवाई। जांच में सामने आया कि न तो कॉल रिकॉर्ड में और न ही व्हाट्सऐप चैट या ईमेल में कोई ऐसा तथ्य मिला, जिससे हैरेसमेंट की पुष्टि हो सके। पुलिस के मुताबिक, मृतका की किसी भी बाबू या पेशकार से बातचीत के प्रमाण नहीं मिले हैं।
कोतवाली इंस्पेक्टर जगदीश प्रसाद पांडेय के अनुसार, सीडीआर में यह साफ हुआ कि नेहा की सबसे ज्यादा बातचीत अपनी मां और पिता से होती थी। घटना वाले दिन उसने करीब 6 बार अपनी मां से फोन पर बात की थी। कार्यालय के किसी कर्मचारी से संपर्क के रिकॉर्ड सामने नहीं आए हैं।
घाटमपुर के कोटरा मकरंदपुर निवासी गोविंद प्रसाद फतेहपुर में कानूनगो हैं, जबकि उनका बेटा भानु प्रताप दरोगा है। उनकी बेटी नेहा संखवार कानपुर के सिविल जज सीनियर डिवीजन कोर्ट में स्टेनो थी और बर्रा बाईपास के पास किराए पर रहती थी।18 अक्टूबर को रोज की तरह कोर्ट पहुंची नेहा ने दोपहर करीब 2:30 बजे कोर्ट की छठी मंजिल से कूदकर जान दे दी थी। घटना के बाद कोर्ट परिसर में अफरा-तफरी मच गई थी और उसे उर्सला अस्पताल ले जाया गया, जहां डॉक्टरों ने मृत घोषित कर दिया था।
मृतका के माता-पिता ने कोर्ट के पेशकार और बाबू पर बेटी को मानसिक रूप से प्रताड़ित करने का आरोप लगाया था। कहा गया था कि फाइलों से दस्तावेज और पेन ड्राइव गायब किए जाते थे, ताने मारे जाते थे, कंप्यूटर बंद कर दिया जाता था और यहां तक कि पानी में केमिकल मिलाने तक का आरोप लगाया गया था।
पुलिस ने कोर्ट के करीब 20 महिला और पुरुष कर्मचारियों के बयान दर्ज किए। सभी ने किसी भी तरह की प्रताड़ना से इनकार किया। कर्मचारियों के मुताबिक, नेहा बेहद रिजर्व स्वभाव की थी, कम बोलती थी और लंच के बाद सीधे अपने काम में जुट जाती थी।
जांच में यह भी सामने आया कि परिजनों ने न्यायिक अधिकारियों को हैरेसमेंट की कोई लिखित शिकायत नहीं दी थी। मृतका की मां ने भी अपने बयान में सीधे तौर पर किसी पर आरोप नहीं लगाए हैं।
पुलिस का कहना है कि अब तक की जांच में किसी के खिलाफ कोई ठोस साक्ष्य नहीं मिले हैं और यह भी स्पष्ट नहीं हो सका है कि नेहा ने आत्महत्या क्यों की। अब इस मामले में जल्द ही फाइनल रिपोर्ट कोर्ट में दाखिल की जाएगी।






