February 22, 2026

• मृतक के बेटे ने प्रेसवार्ता करके लगाया आरोप।

संवाददाता
कानपुर।
अधिवक्ता राजाराम वर्मा हत्याकांड की जांच सीबीआई को स्थानांतरित होने की कवायद शुरु होते ही बेटे नरेंद्र देव ने सांसद–विधायक के दबाव में जांच प्रभावित होने का आरोप लगाया है। उनका दावा है कि मामले की सही जांच कराने वाले संयुक्त पुलिस आयुक्त विनोद सिंह का तबादला इसी दबाव के चलते कराया गया है। यह आरोप शनिवार को बेटे नरेंद्र वर्मा ने सिविल लाइंस स्थित रेस्टोरेंट में आयोजित प्रेसवार्ता में लगाए।
नरेंद्र वर्मा ने बताया कि बार एसोसिएशन के पूर्व महामंत्री राकेश तिवारी द्वारा उनके छोटे भाई शिवाजी की पत्नी रेखा वर्मा से जमीन खरीदी थी। उन्होंने 20 अप्रैल 2022 को 11 लाख रुपए आरटीजीएस और 26 अप्रैल को 10 लाख रुपए एनईएफटी के जरिए दिए थे। शुरुआती घटनाक्रम में राकेश तिवारी की भूमिका स्पष्ट नहीं थी, हालांकि बाद में जमीन खरीदे जाने की पुष्टि होने के बाद उनकी भूमिका साफ हो गई थी। इसको लेकर नरेंद्र ने 25 अप्रैल 2025 को तत्कालीन पुलिस आयुक्त अखिल कुमार को प्रार्थना पत्र देकर अग्रिम विवेचना की मांग की थी।
19 नवंबर 2025 को पुलिस आयुक्त ने पूरे प्रकरण की जांच संयुक्त पुलिस आयुक्त विनोद कुमार सिंह को सौंप दी थी। उन्होंने जांच कराई और बयान देने के लिए राकेश तिवारी को उठाया था, जिसके बाद पूरा मामला तेजी से चर्चा में आ गया था। इसके बाद मामले की विवेचना मूलगंज थाना प्रभारी से छीनकर कोतवाली प्रभारी जगदीश प्रसाद पांडेय को दे दी गई थी। जिसमें उन्होंने हत्यारोपियों से लेकर जमीन का एग्रीमेंट कराने वाले व्यापारियों और एनआरआई सिटी के निदेशकों से तक को बुलाकर पूछताछ की थी।
वहीं राकेश तिवारी की पत्नी ने जांच पर सवाल उठाते हुए मामले की जांच सीबीआई से कराने की मांग की थी। उनकी मांग के समर्थन में शहर के दोनों सांसदों ने शासन को पत्र भी लिखे थे। 

नरेंद्र देव ने ये भी आरोप लगाया कि जब उन्हें जानकारी हुई कि एनआरआइ सिटी के निदेशक और बार के पूर्व महामंत्री राकेश तिवारी पर्दे के पीछे रहकर काम कर हैं। जिसके बाद उनहोंने आवाज उठाई पुलिस की जांच में भी ये बात साफ हो गई 

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