March 12, 2026

संवाददाता
कानपुर।
पटकापुर स्थित मदरसा जामे उल उलूम जामा मस्जिद में मुस्लिम पर्सनल ला बोर्ड के वरिष्ठ सदस्य और देश के बड़े मुस्लिम दानिशमंद मौलाना सज्जाद नोमानी पहुंचे। उन्होंने मीडिया से भी बात करते हुए कहा कि मुसलमान ही नहीं बल्कि हर शरीफ और बाखबर इंसान के दिल की आवाज है, आई लव मोहम्मद। मगर इसका इजहार इस तरीके से होना चाहिए कि उसका नतीजा अच्छा निकले। इस्लाम यह अक्लमंदी सीखाता है कि कोई काम करने से पहले यह जरूर सोचो कि उसका रिजल्ट क्या होगा। नतीजा अच्छा हो तो तो फिर कदम आगे बढ़ाओ।

नतीजा अगर बुरा निकले तो अपने आप को रोको। हमें किसी को चिढ़ाने और उकसाने के लिए आई लव मोहम्मद कहने की कोई जरूरत नहीं है। यह तो हमारे कैरेक्टर सहाबा ने कभी नहीं कहा कि आई लव मोहम्मद, लेकिन जो उनका कैरेक्टर था। वह दुनिया में भेज दिया।
जो लोग यह नारे लगाते हैं। उनके जज्बात की कदर करते हुए मैं यह जरूर चाहता हूं कि अपने अमल से हम लोग इश्क ए रसूल का सबूत दें।
सज्जाद नोमानी ने अपील करी कि मुल्क का एजेंडा बदलने की गलती न हो। मुल्क का एजेंडा हिंदू-मुस्लिम नफरत से हटकर महंगाई, बेरोजगारी, औरतों की सुरक्षा की तरफ, शिक्षा की तरफ मुड़ रहा था। लेकिन कुछ ताकतें यह चाहती हैं यह एजेंडा वापस जाए और हिंदू-मुस्लिम एजेंडा टॉप पर आ जाए। हमें इस चाल को समझकर खुद अपना रास्ता अमल करना चाहिए।