March 4, 2026

संवाददाता
कानपुर।
फास्ट ट्रैक कोर्ट ने दहेज हत्या के एक सनसनीखेज मामले में बड़ा फैसला सुनाया है। कोर्ट ने पत्नी को जिंदा जलाने के दोषी पति को आजीवन कारावास की सजा दी है। साथ ही 30 हजार रुपए का जुर्माना भी लगाया है।
यह मामला करीब ढाई दशक पुराना है, जिसमें पति ने दहेज में एक लाख रुपए नकद और एक कलर टीवी की मांग पूरी न होने पर अपनी पत्नी को मौत के घाट उतार दिया था।
मामले के अनुसार वादी सुरेश कुमार तिवारी ने अपनी बेटी आशा की शादी 23 जून 1999 को आवास विकास हंसपुरम निवासी अतुल किशोर अवस्थी के साथ की थी। लेकिन शादी के बाद से ही ससुराल पक्ष दहेज में नकद और टीवी की मांग को लेकर आशा पर लगातार दबाव बना रहा था। आशा ने कई बार अपने मायके वालों को यह पीड़ा सुनाई। आखिरकार मायके वाले उसे अपने घर ले आए।
वादी सुरेश ने बताया कि 26 अगस्त को दामाद अतुल भी पत्नी के मायके आया और घर में ही ठहर गया। देर रात तक उन्होंने दामाद को समझाने की कोशिश की कि वह अपनी मांगों को लेकर बेटी को प्रताड़ित न करे। अगले दिन 27 अगस्त को सुरेश और उनकी पत्नी काम पर चले गए। इसी दौरान अतुल ने कमरे में अकेली बेटी आशा को जिंदा जला दिया।
आशा 100 प्रतिशत जल गई और उसकी दर्दनाक मौत हो गई। यह मामला एफटीसी जज पीयूष सिद्धार्थ की अदालत में सुनवाई पर था।
एडीजीसी जितेन्द्र कुमार पांडेय ने बताया कि घटना वाले दिन कमरे में सिर्फ अतुल और आशा मौजूद थे। ऐसे में यह मानना मुश्किल था कि पत्नी पूरी तरह से जल जाए और पति को इसकी जानकारी न हो।
अतुल ने बचाव में दावा किया कि वह आग बुझाने की कोशिश कर रहा था, लेकिन इसे साबित करने में नाकाम रहा। अभियोजन की ओर से कुल 9 गवाह कोर्ट में पेश किए गए। सभी बयानों और साक्ष्यों के आधार पर कोर्ट ने आरोपी पति को दोषी करार दिया।
फास्ट ट्रैक कोर्ट ने सख्त टिप्पणी करते हुए कहा कि दहेज के नाम पर बेटियों की जिंदगी बर्बाद नहीं की जा सकती। अदालत ने अतुल किशोर अवस्थी को दोषी मानते हुए आजीवन कारावास और 30 हजार रुपए जुर्माने की सजा सुनाई।