March 12, 2026

संवाददाता
कानपुर।
आरएसएस और बीजेपी चाहती है कि हम सड़क पर पत्थर लेकर निकलें जिससे पुलिस गोली-लाठी चलाएं। हिंदू-मुसलमान का ढोल पीटा जाए। हिन्दुओं और मुस्लिमों को अलग किया जाए। जो लोग एक मुकदमे को खत्म करने के लिए पूरे देश में हंगामा और प्रदर्शन कर रहे हैं। मैं इसका विरोधी हूं।
हंगामा करने के बजाए अपने-अपने जिले में मोहित वाजपेई और दरोगा के खिलाफ एफआईआर करानी चाहिए थी। हमें कानून के दायरे में रहकर संविधान के तहत अपनी लड़ाई लड़नी होगी। यह बातें ऑल इंडिया सुन्नी उलमा काउंसिल के राष्ट्रीय महासचिव हाजी मोहम्मद सलीस ने कहीं। 

शारदा नगर की एक मस्जिद में कई शहर काजियों ने मिलकर बैठक की जिसमें हाजी मोहम्मद सलीस ने कहा कि हमारी कानपुर की जनता से नहीं पूरे हिन्दुस्तान के मुसलमानों से अपील है। वह आई लव मोहम्मद का परिचय अपने अमल या काम से दुनिया को दें। हम मोहम्मद से प्यार क्यों करते हैं, उनकी तालीम क्या है? ये बताएं।  मैं देश के मुसलमान भाइयों से कहना चाहता हूं सड़कों पर निकलकर उन ताकतों को मौका न दें जो बेगुनाह मुसलमानों पर बेवजह मुकदमे कायम करते हों। देश का माहौल नहीं बिगड़ना चाहिए। हमें कानून का सहारा लेकर लड़ाई लड़नी चाहिए।
शहर काजी मौलाना मुश्ताक अहमद मुसायदी ने कहा कि आई लव मोहम्मद तो हर एक का मिजाज है। हर एक का जेहन है। जो मोहम्मद से प्यार न करे वो मुसलमान ही नहीं होगा। वो चाहे प्यार दिल में रखे चाहे बोर्ड में लगा दे, ताकि लोग देखकर और प्यार करने लगें।
एडवोकेट इमरान ने बताया कि डॉ. कलाम सोशल एंड लीगल ऑर्गनाइजेशन इस मामले को देख रही है। मामला तो कुछ नहीं था। मगर कुछ अराजकतत्वों ने पूरे मामले को विवादित बता दिया। वहां के विवादित व दबंग व्यक्ति ने पुलिस से मिलकर झूठी एफआईआर दर्ज कराई है। ये एफआईआर उन लोगों के खिलाफ हुई है। जिन्होंने उस व्यक्ति के खिलाफ आईजीआरएस पर शिकायत की थी।
शिकायत करने वालों को आरोपी बनाकर उनके खिलाफ रावतपुर थाने में रिपोर्ट दर्ज कराई। उसमें दो मौलाना भी हमारे क्षेत्र के थे। जो इमाम थे, उनपर भी एफआईआर दर्ज कराकर छवि पर दाग लगा दिया है। पुलिस कह रही है कि ये एफआईआर आई लव मोहम्मद को लेकर नहीं है। दरोगा ने शिकायत करने वालों को ही एफआईआर में आरोपी बना दिया है। पोस्टर फाड़ने का आरोप लगाया है। ये अफवाह फैलाई जा रही है।
एफआईआर में नामजद आरोपी सिराज अहमद ने बताया कि इस बवाल के पीछे आरएसएस की सोच है। हम लोग कोई भी त्योहार मनाते हैं। मोहित वाजपेई आकर अड़ंगा लगाते हैं। उस दिन भी मोहित ने आते ही कहा था कि आई लव मोहम्मद का बोर्ड हटाइए। हम लोगों ने उन्हें समझाने का प्रयास किया।
दूसरे आरोपी बाबू अली अंसारी ने बताया कि मैं चाहता हूं कि कोई भी सड़क पर उतरकर किसी तरह का विरोध नहीं करे। जिसको भी विरोध करना है वो कानूनी तरीके से अपनी कार्रवाई करे। जब आई लव मोहम्मद का बोर्ड लगाया गया तो सूचना मिली कि किसी ने इसका विरोध कर दिया है। मैं मौके पर पहुंचा। मैंने मोहित से पूछा कि आपको किस बात से आपत्ति है।
कानपुर के रावतपुर में 4 सितंबर को बारावफात पर रोशनी का कार्यक्रम था। इसमें आई लव मोहम्मद का साइन बोर्ड लगाया गया था। 5 सितंबर को इलाके में रहने वाले हिंदू संगठन के लोगों ने इसका विरोध किया। उनका कहना था कि इस तरह का साइन बोर्ड पहले कभी नहीं लगाया गया। यह नई परंपरा है, इसे बंद होना चाहिए।
इसको लेकर हिंदू-मुस्लिम समुदाय के सैकड़ों लोग आमने-सामने आ गए। इसके बाद पोस्टर-बैनर फाड़े गए। दोनों पक्षों के बीच नारेबाजी हुई। पुलिस ने 2 घंटे की मशक्कत करके हालात संभाले थे। 

10 सितंबर को रावतपुर थाने में तैनात दरोगा पंकज शर्मा की शिकायत पर 12 नामजद समेत 25 लोगों के खिलाफ रिपोर्ट दर्ज हुई थी। 
इसके बाद शारदा नगर में 19 सितंबर की दोपहर मुस्लिम समुदाय के लोगों ने एफआईआर को वापस लेने की मांग करते हुए जुलूस निकाला। उनका कहना था कि क्या अब अपने पैगंबर का नाम लिखना भी गलत हो गया? एफआईआर गलत हुई है। पुलिस को इसे वापस लेना चाहिए। कोई बेगुनाह अगर जेल भेजा गया, तो आंदोलन किया जाएगा।
डीसीपी वेस्ट दिनेश त्रिपाठी ने कहा कि थाना रावतपुर के सैय्यद नगर में बारावफात का एक परंपरागत जुलूस निकल रहा था। मोहल्ले के लोगों ने परंपरागत जगह से हटकर एक गेट लगा दिया। सूचना पर रावतपुर थाने की पुलिस जब पहुंची तो टेंट लगाने वालों द्वारा विरोध किया गया। तब दोनों पक्षों की सहमति से टेंट और आई लव मोहम्मद का बैनर हटवाकर परंपरागत स्थान पर लगवा दिया गया था।
आई लव मोहम्मद लिखे जाने पर कोई एफआईआर दर्ज नहीं की गई। बल्कि, परंपरागत जगह से अलग हटकर नई जगह पर बैनर लगाने, जुलूस निकालने के दौरान दूसरे पक्ष के पोस्टर-बैनर फाड़ने पर एफआईआर दर्ज की गई है। 

डीसीपी वेस्ट ने इसके साथ ही अनुरोध किया है कि इस संबंध में कोई भ्रांति न फैलाई जाए।