February 22, 2026

संवाददाता
कानपुर।
समाजवादी पार्टी द्वारा एसआईआर को लेकर लगाए गए आरोपों के बीच भाजपा ने तीखी प्रतिक्रिया दी है। कानपुर-बुंदेलखंड क्षेत्रीय अध्यक्ष प्रकाश पाल ने कहा है कि देशभर में विपक्ष ने एसआईआर का पहले से ही विरोध शुरू कर दिया था।
कानपुर समेत उत्तर प्रदेश के कई जिलों में भी विरोध प्रदर्शन किए गए, जबकि यह पहली बार नहीं है जब एसआईआर हो रहा है। उन्होंने दावा किया कि इससे पहले भी आठ बार एसआईआर की प्रक्रिया हो चुकी है, लेकिन तब इसकी जानकारी सार्वजनिक नहीं की गई। अब जब प्रक्रिया पारदर्शी तरीके से चल रही है तो विपक्ष अनावश्यक विरोध कर रहा है।
प्रकाश पाल ने आरोप लगाया कि विपक्ष की परेशानी इस बात से है कि उन्होंने बांग्लादेशी और रोहिंग्या जैसे घुसपैठियों को मतदाता सूची में शामिल कराया। अब जब ऐसे नाम हटाए जा रहे हैं तो वे बौखला गए हैं। उन्होंने कहा कि पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी, कांग्रेस नेता राहुल गांधी और उत्तर प्रदेश में अखिलेश यादव इस प्रक्रिया से असहज हैं।
पाल ने कहा कि एसआईआर के तहत वर्ष 2003 से अब तक की मैपिंग की जा रही है। पहली बार ऐसा देखा जा रहा है कि घुसपैठिए डरकर भाग रहे हैं। उन्होंने कहा कि जिन लोगों ने उन्हें वोटर बनाया था, वही अब इसका विरोध कर रहे हैं।
प्रकाश पाल ने कहा कि यह पूरी प्रक्रिया चुनाव आयोग के दिशा-निर्देशों के तहत संचालित हो रही है। हालांकि एसआईआर का आधिकारिक अर्थ चुनाव आयोग तय करता है, लेकिन उन्होंने अपने कार्यकर्ताओं से कहा है कि उनके लिए एस का मतलब ‘सिर्फ’, आई का मतलब ‘इंडियन’ और आर का मतलब ‘रहेंगे’ है—यानि सिर्फ भारतीय ही रहेंगे, बाकी कोई नहीं।
उन्होंने आरोप लगाया कि जिस तरह वर्ष 2019 में सीएए को लेकर मुस्लिम समुदाय को भ्रमित किया गया था, उसी तरह अब एसआईआर को लेकर भी गलतफहमियां फैलाई जा रही हैं। उन्होंने सवाल किया कि क्या अब तक किसी मुसलमान को भारत से बाहर किया गया है?
पाल ने कहा कि जब अखिलेश यादव इस प्रक्रिया का विरोध कर रहे हैं तो उनके विधायक भी उसी राह पर चल रहे हैं। कानपुर शहर से एसआईआर को लेकर कई आपत्तियां भेजी गई हैं। उन्होंने मांग की कि शहर के कब्रिस्तानों और ऐतिहासिक स्थलों पर अवैध रूप से रह रहे लोगों की जांच होनी चाहिए। जो वैध मतदाता नहीं हैं, उन्हें मतदान का अधिकार नहीं मिलना चाहिए और घुसपैठियों को देश में नहीं रहना चाहिए। उन्होंने यह भी कहा कि राहुल गांधी और अखिलेश यादव कभी यह बयान नहीं देंगे कि घुसपैठियों को बाहर किया जाए। 

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