
संवाददाता
कानपुर। भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद के महानिदेशक डॉ. एमएल जाट ने गुरुवार को चंद्रशेखर आजाद कृषि एवं प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय में आयोजित दीक्षांत समारोह में कहा कि भारत में 2025-26 में रवि की फसल में 361 मिलियन टन उत्पादन का टारगेट रखा गया है। हमें दलहन और तिलहन की खेती को आगे बढ़ाना है। इसको लेकर सारी रूपरेखा तैयार कर ली गई है। उस पर काम शुरू कर दिया गया है।
उन्होंने कहा कि अपने देश में चावल का ओवर प्रोडक्शन हो रहा है। वर्तमान समय में 149 मिलियन टन का प्रोडक्शन हो रहा है, जबकि हमारे देश में 100 मिलियन टन की जरूरत है।
उन्होंने बताया कि हम लोग पल्स पर काफी ज्यादा काम कर रहे हैं। पल्स मिशन लॉन्च होने वाला है। अब इसको आगे कैसे बढ़ाना है। इस पर हम लोगों ने अपना काम शुरू कर दिया है। जल्द से जल्द इस पूरे काम को गति देनी है।
डॉ. जाट ने कहा कि हमें अब सॉइल हेल्थ पर काम करने की जरूरत है। इस पर काफी ज्यादा लोगों का फोकस है और काम भी हो रहा है। इसके साथ-साथ न्यूट्रिशन पर भी आगे बढ़ने का काम हम लोग कर रहे हैं। क्लाइमेट के रिस्क को कैसे मैनेज करें। इस पर भी एक टीम काम कर रही है। उम्मीद है कि जल्दी हम लोग इस ओर एक अच्छी उपलब्धि हासिल करेंगे।
डॉ. जाट ने कहा कि जो छोटे किसान है उनकी आय कैसे बढ़े इस पर भी फोकस किया जा रहा है। इसको लेकर इंटीग्रेटेड फार्मिंग को सरकार और फोकस कर रही है। हम लोग लगातार इस पर भी काम कर रहे हैं, ताकि छोटे-छोटे जो जिले हैं वहां के किसानों की आय और उत्पादकता दोनों में बढ़ोतरी हो।
इसके साथ-साथ किसानों तक क्वालिटी वाली चीज पहुंचे ताकि उनकी मेहनत के हिसाब से उनको उत्पादकता मिल सके। इसको भी कई चरणों में फिल्टर किया जा रहा है ताकि किसान सक्षम बने।
उन्होंने कहा कि पीएम धन धान्य योजना किसानों के लिए बहुत ही महत्वपूर्ण और अच्छी साबित हो रही है। लो प्रोडक्टिविटी वाले क्षेत्रों को चिन्हित किया गया है। पूरे देश में 100 ऐसे क्षेत्र है जिन्हें चिन्हित कर लिया गया है और वहां पर इस योजना के तहत काम किया जा रहा है। उस पर काफी उपलब्धियां मिली है।
उन्होंने बताया कि अभी पल्स उत्पादन में हम लोग आत्मनिर्भर नहीं बन पाए हैं। अभी भी लगभग 5 मिलियन टन इंपोर्ट करना पड़ रहा है, क्योंकि वेजीटेरियन पापुलेशन काफी ज्यादा बढ़ रही है, लेकिन उम्मीद है कि 2030 तक हम लोग पल्स में आत्मनिर्भर बन जाएंगे। पल्स की खेती के लिए एक बहुत बड़ा एरिया है, जिसको हम लोगों ने चिन्हित किया है, और भी कई क्षेत्र है जिनको चिन्हित किया जा रहा है।
उन्होंने बताया कि मूंगफली की खेती को बढ़ाना है। इसके लिए अलग-अलग तकनीको का प्रयोग हो रहा है। वेस्टर्न यूपी की तरफ मूंगफली की खेती तेजी से बढ़ रही है।
गन्ने के साथ-साथ मूंगफली की खेती के लिए किसानों को जागरूक किया जा रहा है। इससे उनका समय भी बच रहा है और एक ही खेत में दो चीजे उपलब्ध हो रही हैं।
नेचुरल खेती के लिए नेशनल मिशन ऑन नेचुरल फार्मिंग के तहत एक मिशन शुरू हुआ है। इस मिशन के तहत हम लोगों ने एक मैपिंग एक्सरसाइज भी की है। यह किसानों के लिए बहुत ही लाभदायक साबित होगी। वर्तमान समय में किसानों के आगे आपदा सबसे बड़ी समस्या है।






