
संवाददाता
कानपुर। एनटीए के चेयरमैन प्रो. प्रदीप कुमार जोशी का कहना है कि आने वाले समय में यूजीसी, एआईसीटीई और एनसीटीई जैसे संस्थानों को समाप्त किया जा रहा है। इन सभी के स्थान पर एक संस्थान बनेगा।
नेशनल टेस्टिंग एजेंसी के चेयरमैन प्रो. प्रदीप कुमार जोशी ने बताया कि विकसित भारत शिक्षा अधिष्ठान बिल 2025 आने वाला है। यह इस समय पार्लियामेंट्री की हाईपावर कमेटी के पास विचाराधीन है।
इसके आने के बाद यूजीसी, एआईसीटीई व एनसीटीई जैसे संस्थानों को समाप्त करके एक संस्थान बनेगा। एक संस्थान बनने के बाद शिक्षा के क्षेत्र में आने वाली समस्याएं अनुमोदन और अप्रूवल आदि एक ही संस्थान से मिल जाएगा। समस्याओं का समाधान एक ही संस्थान से होगा।
इस बिल में बाहर के देशो के विद्यार्थियों को आकर्षित करने पर भी ध्यान रखा जा रहा है। प्रो. जोशी सोमवार को सीएसजेएमयू में आयोजित 61वें फाउंडेशन डे के मौके पर बतौर मुख्य अतिथि आए थे।
छात्रों द्वारा परीक्षा का समय नजदीक आने पर होने वाले तनाव पर प्रो. प्रदीप कुमार जोशी ने कहा कि जिस व्यक्ति ने प्रयास ही नहीं किया, उसकी तुलना में प्रयास करके असफल होने वाला अधिक श्रेष्ठ है। असफल होने का मतलब है कि प्रयास जरुर किया गया। असफल होने वाले में साहस है। जिसने प्रयास ही नहीं किया वह तो बेकार ही है। युवाओं को एक असफलता को जीवन की असफलता नहीं मानना चाहिए। क्योंकि दौड़ में सब दौड़ रहे हैं तो कोई प्रथम तो कोई द्वितीय भी आएगा। कोई ऐसा भी होगा कि जो गिर गया हो और किसी स्थान को न पाए।
प्रो. जोशी ने एनईपी के बारे में कहा कि विद्यार्थी को पढ़ाई में निरंतरता बढ़ानी पड़ेगी। एनईपी में भारतीय ज्ञान परंपरा में भारतीयता का समावेश किया गया। इस पद्धति के अंतर्गत नौकरी न ढूंढकर बल्कि नौकरी देने वाले बनें इस पर ध्यान रखा गया है। उन्होंने छात्रों द्वारा आत्महत्या के मामले पर कहा कि विद्यार्थी को मन से मजबूत रहना चाहिए। साइकोलाजिकली मजबूत रहना चाहिए। विद्यार्थी अपना जीवन नियमित रखे। फास्ट फूड से परहेज करें। स्वस्थ मन से रहे। जीवन बहुमूल्य है। विद्यार्थी का जीवन राष्ट्र की संपत्ति है।






