
संवाददाता
कानपुर। बृहमनगर चौराहा से ईदगाह चौराहा तक जाने वाली सड़क धंस गई है। सड़क धंसने के रोड के किनारे बने मकानों में रहने वाले लोग दहशत में हैं। उनका कहना है कि 2 महीने से जल का रिसाव हो रहा था। हम लोगों ने कई बार नगर निगम से शिकायत की। मगर कोई कार्रवाई नहीं हुई।
समस्या बढ़ी तो नगर निगम ने 7 लोगों को दुकान-मकान खाली करने का नोटिस दे दिया। हम लोगों को रहने के लिए कोई वैकल्पिक व्यवस्था नहीं की गई। ऐसे में हम कहां जाएं। अब जब सड़क पर बुलडोजर चलता है तो मकान हिलते हैं। ऐसा लग रहा है कि अफसरों को हमारी मौत का इंतजार है। इसके बाद ही उनकी नींद खुलेगी।
इसी सड़क पर रहने वाली सुनीता ने बताया कि मेरे पति का एक साल पहले निधन हो गया था। मैं अपने दो छोटे छोटे बच्चों के साथ 2 मंजिला मकान में रहती हूं। प्रशासन ने केवल हमारे घर में सुरक्षित रहने के लिए नोटिस लगाया है। जब बुलडोजर और क्रेन चलती है। तब पूरा मकान हिल जाता है।
पानी का रिसाव अभी तक बंद नहीं हुआ है। रात में पानी की आवाज एक नदी की तरह आती है। जिससे रात में बच्चों और हमको नींद तक नहीं आती है। घर के सामने गड्डा खुदा हुआ है। अब बच्चे स्कूल तक नहीं जा पा रहे हैं।
जब हमने अधिकारियों से सुरक्षित जगह जाने के लिए पूछा तो बोले कहीं भी चले जाओ। बताओ हम अपने छोटे छोटे बच्चों के साथ कहां जाएं। हम सिंगल मदर हैं। मेरी बस प्रशासन से छोटी सी मांग है- काम को जल्दी करवाया जाए, जिससे मेरे बच्चे स्कूल जा सके और रात को हम सो सकें।
क्षेत्र के सूरज कुमार ने बताया कि नगर निगम ने यहां के आसपास के लोगों को सरक्षित रखने के लिए केवल नोटिस लगाए हैं। घरों पर नोटिस लगाते वक्त किसी ने इन परिवारों के बारे में नहीं सोचा कि इन परिवारों का क्या होगा। प्रशासन और जलकल को दो महीने से सब पता था।
किसी ने कुछ नहीं किया इन्होंने केवल नोटिस चिपकाने की फ़ॉर्मेलिटी की है। प्रशासन को सब कुछ पता है, जब तक कोई मरता नहीं है, तब तक नेता और अधिकारियों को कुछ भी दिखाई नहीं देता है। ये ऐसा शहर है यहां किसी को कुछ दिखाई नहीं देता है। नेता और अधिकारी केवल फोटो खिंचवाने के लिए आते हैं। इस समय सभी लोग केवल खाना पूर्ति कर रहे हैं।
योगेंद्र राठी कहते हैं कि अब नगर निगम ने यहां काम तो स्टार्ट किया है, लेकिन काम धीरे धीरे चल रहा है। यहां तो हमारा व्यापार तो ठप पड़ा हुआ है। रहने के लिए हमको कोई स्थान नहीं दिया गया है। जब बुलडोजर चलता है तो इतना डर लगता है, कहीं ऐसा न हो मकान और दुकान बैठ जाए।
कहीं ऐसा न हो जैसे ही काम चालू हो और हमारा मकान न गिर जाए। अधिकारियों के द्वारा काम कब पूरा होगा ये नहीं बताया गया है। अधिकारी तो केवल घूम के चले जाते है। यहां के परिवार तो डरे हुए हैं।
यहीं के सुधीर शुक्ला बताते है प्रशासन की तरफ से काम स्टार्ट करवा दिया गया है, लेकिन बहुत काम बहुर धीरे चल रहा है। काम अगर जल्दी से हो जाएगा तो हम व्यापारियों को जल्दी से राहत मिल जाएगा। यहां रहने वाले परिवारों के बीच डर का माहौल बना हुआ है, हम लोगों का कारोबार ठप पड़ा हुआ है।
जब तक काम कंप्लीट नहीं हो पा रहा है दिक्कत तो है ही। सरकार ने किसी भी परिवार के लिए रहने की व्यवस्था नहीं की है। यहां सड़क धंसी है, यहां पर बहुत ही डर का माहौल बना हुआ है। कब क्या हो जाए कुछ भी पता नहीं है।
अब प्रशासन ने काम जारी किया है, अगर जल्द ही काम पूरा हो जाएगा तो हम लोगों को राहत मिलेगी। प्रशासनिक अधिकारी आते है सर्वे करके चले जाते है, जैसे तैसे टीम थोड़ा बहुत काम कर रही है। अगर काम थोड़ा स्पीड से हो जाए तो हम लोगों को राहत मिले।
नगर निगम की अधिकारी मीनाक्षी अग्रवाल ने बताया सबसे पहले हम लोगों ने वहां पर बने मकानों को सुरक्षित करने के लिए लोहे की सटरिंग को लगाया है। सड़क को सुचारु रूप से शुरू करने में 30 दिन का समय लगेगा।





