March 17, 2026

संवाददाता
कानपुर।
  मैनावती मार्ग स्थित जीडी गोयनका स्कूल में अंतरराष्ट्रीय पहलवान और ‘दंगल गर्ल’ गीता फोगाट पहुंचीं। यहां उन्होंने छात्रों से संवाद करते हुए सफलता का मूल मंत्र साझा किया। अपने सादे लेकिन ऊर्जावान अंदाज में गीता ने बच्चों को बताया कि जब पूरी दुनिया रात तीन बजे सो रही होती थी, तब उनकी कुश्ती की ट्रेनिंग शुरू हो जाती थी।
गीता फोगाट ने कहा कि उनकी सफलता के पीछे उनके पिता और द्रोणाचार्य अवॉर्ड से सम्मानित महावीर सिंह फोगाट की कठोर तपस्या और अनुशासन की बड़ी भूमिका रही। समाज की रूढ़िवादी सोच और लड़कियों के कुश्ती खेलने पर उठने वाले सवालों के बावजूद पिता के अटूट विश्वास ने उन्हें आगे बढ़ने की ताकत दी।
अपनी उपलब्धियों को याद करते हुए गीता ने बताया कि 2010 के राष्ट्रमंडल खेलों में स्वर्ण पदक जीतना केवल एक पदक हासिल करना नहीं था, बल्कि उन तमाम बाधाओं पर जीत थी, जो एक लड़की के सपनों के रास्ते में खड़ी की जाती हैं। उन्होंने कहा कि वह स्वर्ण पदक जीतने और ओलंपिक के लिए क्वालीफाई करने वाली पहली भारतीय महिला पहलवान बनीं।
चर्चित फिल्म ‘दंगल’ का जिक्र करते हुए गीता ने छात्रों को प्रेरित किया कि जीवन में कुछ भी असंभव नहीं है। उन्होंने कहा कि अनुशासन और निरंतर अभ्यास ही सफलता की असली चाबी है, जिससे हर बंद दरवाजा खोला जा सकता है।
कार्यक्रम के दौरान स्कूल की प्रधानाचार्य मोनिका दत्त ने गीता फोगाट का स्वागत किया। चेयरमैन चंदन अग्रवाल और निदेशक ज्योति अग्रवाल सहित शिक्षकों ने इस संवाद को छात्रों के भविष्य के लिए प्रेरणादायी और मील का पत्थर बताया।
गीता फोगाट का जीवन आज के युवाओं के लिए यह संदेश देता है कि अगर लक्ष्य के प्रति समर्पण और मेहनत हो, तो छोटे से गांव का अखाड़ा भी ओलंपिक के मंच तक पहुंचने का रास्ता बन सकता है। 

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