
संवाददाता
कानपुर। रक्षा बन्धन और जन्माष्टमी के बाद एक और बेहद महत्वपूर्ण पर्व गणेश महोत्सव की शुरुआत 27 अगस्त से होने जा रही है। इस 10 दिवसीय पर्व के लिए नगर में भी तैयारियां का दौर जोरों शोरों से चल रहा है। महाराष्ट्र से जन्मा ये पर्व अब उत्तर भारत के लोगों की पसन्द बन चुका है। लोगों की पसन्द बन चुका ये पर्व पूरे प्रदेश में बड़े धूमधाम के साथ प्रचलन में आ चुका है।
भक्त अपने-अपने घरों में गणपति को लाते हैं और यह मान्यता है कि गणपति भगवान आकर उनके घरों में सारे विघ्नों को हर लेते हैं। साथ ही उनके जीवन में खुशियां भर देते हैं।
उत्तर प्रदेश के कानपुर में भी बड़ी संख्या में लोग गणेश महोत्सव पर अपने घरों में भगवान गणपति को स्थापित करते हैं। नगर में अब बड़ी संख्या में मूर्तियों को स्थापित किया जाता है। यही नही यहां के कारीगरों द्वारा निर्मित मूर्तियां अन्य प्रदेशों तक जाती हैं। विदेशों से भी गणेश मूर्ति के आर्डर मूर्तिकारों के पास आते हैं।
इस बार गणेश महोत्सव पर भगवान गणेश अपने परिवार संग घरों में विराजेंगे। इस बार परिवार के साथ गणेश जी की मूर्ति की डिमांड सबसे अधिक है। इतना ही नहीं, इस बार महाराष्ट्र की तर्ज पर कानपुर में भी बड़े-बड़े पंडाल सजाए जा रहे हैं जिसमें 3 से लेकर 15 फीट तक के गणेश जी स्थापित किए जाएंगें। इसके साथ ही घरों में पूजन के लिए छोटे-छोटे गणपति भी लोगों की पसंद बने हुए हैं। नगर में गणेश महोत्सव की तैयारियां जोरों पर हैं, जिसमें कारीगर मूर्तियों को अंतिम रूप दे रहे हैं और महाराष्ट्र की तर्ज पर विशेष मंडपों को सजाने का काम किया जा रहा है।
शहर भर में गणेशजी की मूर्तियां स्थापित करने की तैयारियां की जा रही हैं जहां पर सांस्कृतिक व धार्मिक कार्यक्रम आयोजित किए जाएंगे। नगर के सबसे पुराने गणेश महोत्सव महाराष्ट्र मंडल में भी मराठी रीति-रिवाजों के अनुसार गणेश महोत्सव का आयोजन की तैयारियों को अंजाम दिया जा रहा है। बंगाल और राजस्थान के कारीगरों के साथ-साथ कानपुर के स्थानीय मूर्तिकार भी गणेश मूर्तियों को अंतिम रूप देने में व्यस्त हैं। शहर के विभिन्न हिस्सों में सार्वजनिक पंडाल लगाए जा रहे हैं, जहाँ भक्त भगवान गणेश की प्रतिमाओं के दर्शन कर सकेंगे।