
संवाददाता
कानपुर। कानपुर क्रिकेट एसोसिएशन में प्रशासनिक अधिकारियों द्वारा पहले तो क्रिकेटरों को बैन करने के लिए कटघरे में घसीटा जाता रहा है, लेकिन अब दो तीन महीनों से अम्पायर्स,स्कोरर्स को मैच से बैन करने की प्रक्रिया को अंजाम दिया जाने लगा है।
जूनियर से लेकर सीनियर क्रिकेटरों पर अनुशासनात्मक कार्रवाई के बाद अब अम्पायर्स और स्कोरर्स को भी “नायाब तरीके” से बैन किए जाने का मामला सामने आया है। केसीए के एक अधिकारी की ओर से लिए गए इन कठोर फैसलों ने क्रिकेट के संचालन तंत्र को हिलाकर रख दिया है। सूत्रों के मुताबिक, करीब दो माह पूर्व केसीए से जुड़े कुछ प्रतिष्ठित अम्पायर्स और स्कोरर्स ने किसी खेल मैदान पर व्यक्तिगत स्तर पर प्रतियोगिता संपन्न कराने पर सहमति जताई थी। यही बात महाप्रबंधक को नागवार गुज़री और परिणामस्वरूप 10 से अधिक अंपायर्स व स्कोरर्स को क्रिकेट गतिविधियों से बाहर कर दिया गया। इतना ही नहीं, महाप्रबंधक ने उत्तर प्रदेश क्रिकेट एसोसिएशन और उत्तर प्रदेश वेटरन क्रिकेट एसोसिएशन को पत्र भेजकर उनसे भी संबंधित अम्पायर्स व स्कोरर्स की सेवाएं न लेने का अनुरोध कर दिया।
आरोप है कि इस निर्णय में किसी भी तरह की पारदर्शी समीक्षा प्रक्रिया नहीं अपनाई गई। न तो स्पष्ट आरोप बताए गए, न ही प्रभावित अम्पायर्स और स्कोरर्स को अपना पक्ष रखने का मौका मिला। आंतरिक नोटशीट, मौखिक निर्देश और अचानक जारी पत्रों के ज़रिए उन्हें प्रतियोगिताओं से बाहर कर दिया गया।
हैरानी की बात यह भी है कि जिस संस्था यूपीवीसीए का केसीए से कोई प्रत्यक्ष संबंध नहीं, वहां के पदाधिकारियों पर भी दबाव बनाकर वेटरन क्रिकेट के मैचों में अंपायरिंग और स्कोरिंग से प्रतिबंधित कराने का आरोप लगाया जा रहा है। केसीए से प्रतिबंधित और महाप्रबंधक के हठधर्मी रवैये से आक्रोशित अम्पायर्स व स्कोरर्स में से एक सदस्य ने बताया कि बीते अक्टूबर में आईआईटी जैसी प्रतिष्ठित संस्था ने क्रिकेट मैच आयोजित कराए थे। आयोजकों ने केसीए के माध्यम से मैच ऑफिशियल्स की मांग की, लेकिन सीधे तौर पर संस्थान से मेल न आने के कारण केसीए ने ऑफिशियल्स भेजने से इनकार कर दिया। मजबूरी में टीम के सदस्यों ने निजी स्तर पर अंपायरिंग और स्कोरिंग कर मैच संपन्न कराए।यही घटना महाप्रबंधक को नागवार गुज़री और उस टीम से जुड़े सभी अम्पायर्स व स्कोरर्स को केसीए से संबद्ध सभी मैचों के लिए प्रतिबंधित कर दिया गया।
पीड़ितों ने एसोसिएशन के अध्यक्ष और चेयरमैन से भी गुहार लगाई, लेकिन वहां से भी किसी तरह के हस्तक्षेप से इनकार कर दिया गया। तीन महीने बीत जाने के बावजूद प्रतिबंधित अम्पायर्स और स्कोरर्स अब तक मैदानों में वापसी नहीं कर पाए हैं। उनका कहना है कि यदि जल्द ही समस्याओं का समाधान नहीं हुआ तो वे आंदोलन करने को मजबूर होंगे। क्रिकेट के निष्पक्ष संचालन की रीढ़ माने जाने वाले अम्पायर्स और स्कोरर्स को इस तरह एक झटके में दरकिनार किया जाना न सिर्फ उनके करियर के साथ खिलवाड़ है, बल्कि क्रिकेट प्रशासन के मूल सिद्धांतों पर भी सीधा प्रहार माना जा रहा है। अब देखना यह है कि केसीए नेतृत्व अम्पायर्स, स्कोरर्स और खिलाडियों पर लगाए जाने वाले ‘बैन-राज’ पर कब और कैसे संज्ञान लेता है।





