February 17, 2026

लेकिन पुलिस का दावा है कि कारोबारी का बेटा ही असल आरोपी।

संवाददाता
कानपुर।
  लेम्बोर्गिनी मामले में कथित ड्राइवर ने बुधवार दोपहर कोर्ट में सरेंडर कर दिया। वकील के साथ वह कोर्ट पहुंचा। मीडिया से बातचीत में ड्राइवर मोहन ने कहा कि शिवम मिश्रा की गाड़ी मैं ही चला रहा था। शिवम को दौरा पड़ गया था। उस वक्त मैं घबरा गया था। कुछ समझ नहीं आया। इसी वक्त हादसा हो गया। जब शीशा तोड़ा और दरवाजा खोला गया तो मैं नीचे से निकल गया था। बाउंसर ने शिवम को निकाला था। हादसे के बाद मैं कोने में खड़ा हो गया था। शिवम को दूसरी गाड़ी में ले जाया गया था। 
लेम्बोर्गिनी कार ने रविवार को 6 लोगों को कुचल दिया था। इसका वीडियो सामने आया। पुलिस कमिश्नर ने जांच के हवाले से दावा किया कि लेम्बोर्गिनी तंबाकू कारोबारी केके मिश्रा का बेटा शिवम चला रहा था। शिवम मिश्रा का नाम भी मुकदमे में जोड़ा गया।
जिला शासकीय अधिवक्ता दिलीप अवस्थी ने कहा कि
आरोपी शिवम मिश्रा की ओर से उनके वकील ने जब्त लेम्बोर्गिनी कार को रिलीज कराने के लिए अर्जी दाखिल की है। सुनवाई के दौरान ड्राइवर मोहन ने कहा कि गाड़ी वह ड्राइव कर रहा था, जबकि कानपुर पुलिस ने अपनी जांच रिपोर्ट में शिवम मिश्रा को ही आरोपी ड्राइवर बताया है।
मंगलवार दोपहर मामले में नया ट्विस्ट आया। कारोबारी पिता केके मिश्रा ग्वालटोली थाने पहुंचे। उन्होंने दावा किया कि हादसे के वक्त बेटा शिवम नहीं, बल्कि ड्राइवर मोहन लेम्बोर्गिनी कार चला रहा था। शिवम उस वक्त सो रहा था।
केके मिश्रा ने कहा- हादसे के बाद कार लॉक हो गई थी, जिससे बेटे की तबीयत बिगड़ गई। ठीक होने पर बेटे को लेकर मैं खुद थाने आऊंगा। मीडिया ने पूछा कि पुलिस कमिश्नर ने कहा है कि गाड़ी शिवम चला रहा था। इस पर पिता ने जवाब दिया- पुलिस कमिश्नर झूठ बोल रहे हैं। वहीं, कारोबारी के वकील ने दावा किया कि शिवम बेहोश है और दिल्ली में भर्ती है।
उधर, कारोबारी केके मिश्रा का दावा पुलिस की जांच में पूरी तरह से झूठा निकला है। पुलिस की जांच में सीसीटीवी, प्रत्यक्षदर्शियों के बयान और कई ऐसे अहम सबूत सामने आए हैं। इससे साफ हो गया है कि कार को शिवम मिश्रा ही ड्राइव कर रहा था, हादसा उसी से हुआ था। कार में कोई दूसरा व्यक्ति या ड्राइवर मौजूद नहीं था।
डीसीपी सेंट्रल अतुल कुमार श्रीवास्तव ने बताया- शिवम मिश्रा के नाम पर लेम्बोर्गिनी कार है। शिवम के वकील की ओर से गाड़ी को रिलीज करने के लिए कोर्ट में याचिका दाखिल की गई है। इसके साथ ही ड्राइवर मोहन की ओर से सरेंडर याचिका दाखिल की गई है। आज ग्वालटोली थाने की पुलिस की ओर से कोर्ट में जांच रिपोर्ट पेश की जाएगी।
पुलिस की जांच रिपोर्ट में साफ है कि कार शिवम चला रहा था। पुलिस की जांच में इसके पर्याप्त सबूत मिले हैं। इसके साथ ही इलेक्ट्रॉनिक एविडेंस भी हैं। इसके बाद कोर्ट अपना फैसला लेगा। इस केस में भले ही ड्राइवर की ओर से सरेंडर याचिका दाखिल की गई है, लेकिन मुकदमा जमानतीय धाराओं में दर्ज है।
वीआईपी रोड पर 8 फरवरी की दोपहर तेज रफ्तार लेम्बोर्गिनी ने 6 लोगों को उड़ा दिया था। मामले में पुलिस ने घायल चमनगंज घुसियाना निवासी मो. तौफीक की तहरीर पर कार नंबर के आधार पर एफआईआर दर्ज की थी। जबकि हादसे का लाइव वीडियो समेत कई अहम सबूत थे, लेकिन अरबपति कारोबारी के रसूख के चलते पुलिस ने गाड़ी नंबर के आधार पर केस दर्ज किया था।
हाई प्रोफाइल मामले में आरोपी को राहत देने पर सपा प्रमुख अखिलेश यादव और लोगों ने पुलिस की कार्यशैली पर सवाल खड़ा किया तो पुलिस ने आनन-फानन में 9 फरवरी को हादसे के 24 घंटे बाद कार चालक शिवम मिश्रा का नाम मुकदमे में बढ़ा दिया।
10 फरवरी को आरोपी शिवम मिश्रा के पिता केके मिश्रा ग्वालटोली थाने अपना बयान दर्ज कराने पहुंचे, उन्होंने दावा किया कि गाड़ी उनका ड्राइवर मोहन चला रहा था, बेटा कार में बैठा हुआ था। यह भी बताया कि उसकी तबीयत बिगड़ने की वजह से बेटा शिवम बयान दर्ज कराने नहीं आ सका है, जल्द ही वह अपने बयान दर्ज कराएगा। लेकिन पुलिस की जांच में आरोपी शिवम के पिता केके मिश्रा और उनके वकील धर्मेंद्र सिंह का दावा पूरी तरह से झूठा निकला है, लेकिन अब देखना है कि कोर्ट में किसका दावा कितना टिकेगा। 

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