February 27, 2026

संवाददाता 
कानपुर।
रंगों का त्योहार होली खुशियां और उमंग लेकर आता है, लेकिन इस उत्साह के बीच एक छोटी सी लापरवाही आपकी आंखों की अनमोल रोशनी के लिए बड़ा खतरा बन सकती है। अक्सर लोग त्योहार की मस्ती में यह भूल जाते हैं कि बाजार में बिकने वाले सस्ते और चमकीले रंगों में शीशा, पारा और एसिड जैसे खतरनाक रसायनों का मिश्रण होता है।
अगर ये रसायन सीधे आंखों के संपर्क में आ जाएं, तो मामला केवल जलन तक सीमित नहीं रहता, बल्कि यह कॉर्नियल अल्सर जैसी गंभीर स्थिति पैदा कर सकता है। डॉक्टरों के मुताबिक, होली के दौरान आंखों की सुरक्षा को लेकर जरा सी भी कोताही आपको हमेशा के लिए अंधेरे की ओर धकेल सकती है।
एलएलआर अस्पताल के नेत्र रोग विभाग की वरिष्ठ नेत्र रोग विशेषज्ञ डॉ. शालिनी मोहन ने बताया कि,आजकल बाजार में मिलने वाले सिंथेटिक रंगों में ऐसे पार्टिकल्स होते हैं जो आंखों की पुतली को बुरी तरह खरोंच सकते हैं।
विशेषज्ञों का कहना है कि होली खेलने के लिए केवल ऑर्गेनिक या हर्बल रंगों का ही चुनाव करना चाहिए। ये रंग फूलों, हल्दी और अन्य प्राकृतिक चीजों से बने होते हैं, जो आंखों और त्वचा के लिए सुरक्षित माने जाते हैं।
यदि आप घर पर बने टेसू के फूलों या चंदन के रंगों का उपयोग करते हैं, तो यह न केवल आपकी आंखों को सुरक्षित रखेगा बल्कि त्योहार के आनंद को भी दोगुना कर देगा। रसायनों से युक्त वार्निश, ग्रीस या पेंट का इस्तेमाल करना आंखों के लिए ‘केमिकल इंजरी’ का सबसे बड़ा कारण बनता है, जिससे परमानेंट डैमेज का खतरा रहता है।
वरिष्ठ नेत्र रोग विशेषज्ञ डॉ. शालिनी मोहन ने बताया कि, होली खेलते समय अगर अनजाने में रंग आंखों के भीतर चला जाए, तो घबराने की बजाय तुरंत प्राथमिक उपचार करना जरूरी है। सबसे पहले अपनी आंखों को ठंडे और साफ पानी से बार-बार धोएं। पानी के छींटे तब तक मारें जब तक कि रंग के बारीक कण पूरी तरह बाहर न निकल जाएं। 

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