April 7, 2025

आ स. संवाददाता 
कानपुर।
  शस्त्र लाइसेंस में फर्जीवाड़े के 6 साल बाद डीएम जितेंद्र प्रताप सिंह ने आवेदकों को राहत दी है और  वरासत के शस्त्र लाइसेंस जारी करने शुरू कर दिए हैं। मार्च में अब तक डीएम ने 4 वरासत के शस्त्र लाइसेंस जारी किए हैं। हालांकि, सामान्य आवेदकों के लाइसेंस पर रोक जारी रहेगी।
डीएम की ओर से जारी चार लाइसेंसों में दो विधवा महिलाओं के हैं। उन्हें रंजिश में जान-माल का खतरा है। बाकी दो भी ऐसे ही जरूरतमंद लोग हैं। सामान्य लोगों के नए लाइसेंस शासन की अनुमति के बाद ही जारी होंगे।
वर्ष 2019 में शस्त्र लाइसेंस में फर्जीवाड़ा सामने आने के बाद शासन ने नए लाइसेंस बनाने पर रोक लगा दी थी। तब से अभी तक जरूरतमंद तीन-चार लोगों को छोड़कर किसी के लाइसेंस नहीं बनाए गए थे।
वर्तमान समय में करीब 400 से अधिक वरासत वाले आवेदन लंबित हैं। साक्षात्कार के बाद जिलाधिकारी लाइसेंस जारी करेंगे। इस दौरान जरूरत समझ में आने पर ही लाइसेंस बनेगा। शहर में शस्त्र लाइसेंस में  फर्जीवाड़ा का खुलासा अगस्त 2019 को हुआ था।
6 वर्षों में रोक के दौरान करीब 500 से अधिक शस्त्र लाइसेंस धारकों की मौत हो चुकी है और करीब 400 लोगों के लाइसेंस ट्रांसफर के आवेदन पड़े थे। इनके आज तक नए लाइसेंस ही नहीं बनाए गए। जो भी आवेदन आए संबंधित थाने की रिपोर्ट भी लगाई गई, लेकिन नए लाइसेंस नहीं बने और छह माह बाद आवेदन स्वतः रद्द हो गए।
शस्त्र लाइसेंस बनने की प्रक्रिया में डीएम लाइसेंस स्वीकृत करते हैं। लाइसेंस बुकलेट संबंधित अधिकारी जारी करते हैं। डीएम की स्वीकृति से पहले थाना प्रभारी, चौकी प्रभारी, एसीपी, डीसीपी क्राइम की संस्तुति होती है। इसके बाद उसका एसडीएम सिटी सत्यापन संबंधित तहसील से कराते हैं। दोनों की रिपोर्ट डीएम के समक्ष प्रस्तुत की जाती है, जिसके बाद लाइसेंस जारी किया जाता है।