
संवाददाता
कानपुर। निजी स्कूलों की मनमानी फीस और किताब-यूनिफॉर्म को लेकर अभिभावकों पर बढ़ते आर्थिक बोझ के बीच जिला प्रशासन ने सख्त रुख अपनाया है। जिला शुल्क नियामक समिति ने शैक्षणिक सत्र 2026–27 के लिए फीस वसूली से जुड़े नियम तय कर दिए हैं। नियमों के उल्लंघन पर अतिरिक्त वसूली गई फीस वापस कराने के साथ भारी जुर्माना और बार-बार गलती पर मान्यता समाप्त कराने तक की कार्रवाई की जाएगी।
सरसैया घाट स्थित नवीन सभागार परिसर में जिलाधिकारी जितेंद्र प्रताप सिंह की अध्यक्षता में आयोजित बैठक में स्पष्ट किया गया कि उत्तर प्रदेश स्ववित्तपोषित स्वतंत्र अध्यादेश-2018 का कड़ाई से अनुपालन कराया जाएगा। डीएम ने कहा कि किसी भी कीमत पर अभिभावकों का आर्थिक शोषण स्वीकार नहीं किया जाएगा।
जिलाधिकारी ने निर्देश दिए कि सभी निजी विद्यालय शैक्षिक सत्र शुरू होने से पहले आगामी वर्ष में ली जाने वाली फीस का विवरण सक्षम अधिकारी को उपलब्ध कराएं। साथ ही प्रवेश प्रक्रिया शुरू होने से कम से कम 60 दिन पहले फीस की जानकारी विद्यालय की वेबसाइट और सूचना पट्ट पर सार्वजनिक करनी होगी। निर्धारित शुल्क से अधिक वसूली पूरी तरह प्रतिबंधित रहेगी।
बैठक में साफ किया गया कि कोई भी विद्यालय छात्र या अभिभावक को किताब, यूनिफॉर्म, जूते-मोजे किसी विशेष दुकान से खरीदने के लिए बाध्य नहीं कर सकेगा। इसे गंभीर उल्लंघन माना जाएगा। साथ ही एक बार तय की गई यूनिफॉर्म कम से कम पांच वर्षों तक नहीं बदली जाएगी।
निर्णय लिया गया कि प्रवेश शुल्क केवल पहली बार नए प्रवेश के समय ही लिया जाएगा। परीक्षा शुल्क सिर्फ परीक्षा के लिए ही वसूला जाएगा। विद्यालय द्वारा ली जाने वाली प्रत्येक फीस की रसीद देना अनिवार्य होगा और निर्धारित शुल्क के अलावा कोई अन्य शुल्क नहीं लिया जा सकेगा।
डीएम ने निर्देश दिए कि छात्र या अभिभावक की शिकायत का समाधान पहले विद्यालय स्तर पर किया जाए। 15 दिन में समाधान न होने पर मामला जिला शुल्क नियामक समिति के समक्ष रखा जाएगा और जिम्मेदारी तय की जाएगी।
पहली बार उल्लंघन पर अतिरिक्त वसूली गई फीस वापस कराने के साथ एक लाख रुपये तक जुर्माना
दूसरी बार उल्लंघन पर पांच लाख रुपये तक जुर्माना
तीसरी बार उल्लंघन पर संबंधित बोर्ड से मान्यता/संबद्धता समाप्त कराने की संस्तुति की जाएगी।
बैठक में मुख्य विकास अधिकारी दीक्षा जैन, जिला विद्यालय निरीक्षक संतोष कुमार राय, चार्टर्ड एकाउंटेंट सुधीर चौधरी, अधीक्षण अभियंता पीडब्ल्यूडी अनिल कुमार, वित्त एवं लेखाधिकारी बेसिक शिक्षा शिशिर जायसवाल, सीबीएसई व आईसीएसई बोर्ड के प्रतिनिधि तथा अभिभावक संगठनों के प्रतिनिधि मौजूद रहे।






