
संवाददाता
कानपुर। बिल्हौर के परिषदीय विद्यालयों में ‘बैगलेस डे’ मनाया गया। उच्च प्राथमिक विद्यालय नसिरापुर में जिलाधिकारी जितेंद्र प्रताप सिंह ने इसका शुभारंभ किया। इस दौरान बच्चों ने बिना बस्ते के विभिन्न रचनात्मक गतिविधियों में भाग लिया।
स्कूल पहुंचे बच्चों के कंधों पर न तो बस्ते थे और न ही हाथों में कॉपी-किताबें। इसके बजाय, उन्होंने मिट्टी, रंग और कागज का उपयोग करके अपनी कल्पनाओं को साकार रूप दिया। कक्षाओं में जिलाधिकारी के पहुंचने पर विद्यार्थियों ने अपनी कलाकृतियों से सबका ध्यान खींचा।
प्रियांशु और सृष्टि ने मिट्टी से गणेश प्रतिमा बनाई, जबकि वैष्णवी और अर्पिता ने शिवलिंग का रूप दिया। अंकुर और रौनक ने रंगीन पतंगें तैयार कीं। विद्यालय परिसर कौशल, कला और उत्साह का जीवंत केंद्र बन गया।
जिलाधिकारी ने बच्चों में सीखने के प्रति उत्साह देखकर कहा कि यही ‘बैगलेस डे’ की सफलता है। उन्होंने बच्चों द्वारा प्रदर्शित रचनात्मकता की सराहना की।
कक्षा 6 से 8 तक के बच्चों ने मीना मंच के तहत आकर्षक नाट्य प्रस्तुतियां दीं। कशिश, सिमरन, वैष्णवी, मानसी और लहर ने लैंगिक समानता का संदेश दिया, वहीं अर्पिता ने अपने साथियों को साइबर धोखाधड़ी से बचाव की जानकारी दी। छात्रों ने आत्मरक्षा का पाठ भी सीखा।
शासन के निर्देशानुसार, नवंबर का तीसरा-चौथा शनिवार, दिसंबर के सभी शनिवार, जनवरी का तीसरा-चौथा और फरवरी का पहला-दूसरा शनिवार ‘बैगलेस डे’ के रूप में मनाया जाएगा।
इन दिनों में ऑनलाइन लर्निंग, आत्मरक्षा प्रशिक्षण, कला और शिल्प, कहानी सुनाना और अन्य गतिविधियां विद्यालयों में आयोजित की जाएंगी।
जिलाधिकारी ने बताया कि ‘बैगलेस डे’ को ‘पोषित आनंदम’ के रूप में मनाया जा रहा है, जो राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 का एक महत्वपूर्ण हिस्सा है। उन्होंने कहा कि ऐसे आनंदमय वातावरण में मिली सीख बच्चों को न केवल आत्मविश्वासी बनाती है, बल्कि जीवन के प्रति उनकी समझ को भी गहरा करती है।
इस अवसर पर बीएसए सुरजीत कुमार सिंह और बिल्हौर के खंड शिक्षा अधिकारी भी उपस्थित रहे।






