February 22, 2026

संवाददाता

कानपुर। छत्रपति शाहू जी महाराज विश्वविद्यालय के पत्रकारिता एवं जनसंचार विभाग में विश्व रेडियो दिवस पर एक परिचर्चा का आयोजन किया गया। इसमें छात्रों को रेडियो के उद्भव और उसकी विकास यात्रा के बारे में जानकारी दी गई। 

विभागाध्यक्ष डॉ. दिवाकर अवस्थी ने कहा कि रेडियो मनुष्य का सच्चा साथी ही नहीं बल्कि हितैषी भी है। रेडियो समाज के सभी वर्गों को जोड़ने का सबसे सस्ता और सुलभ माध्यम है। 

कार्यक्रम के संयोजक डॉ. ओमशंकर ने छात्रों से संवाद स्थापित करते हुए रेडियो की विशेषताओं का जिक्र करते हुए कहा कि रेडियो ने भारत ही नहीं विश्व के असंख्य लोगों को जोड़ा है। गीत संगीत का अनमोल खजाना रेडियो की धरोहर है। उन्होने कहा कि क्षेत्र और भाषा को लेकर रेडियो ने खाइयों को सफलतापूर्वक पाटा है। उन्होने छात्रों को यह भी बताया कि 13 फरवरी को संयूक्त राष्ट्र रेडियो दिवस की स्थापना हुई थी।  युनेस्को ने इसी को यादगार बनाने के लिए, रेडियो की शक्ति और उसके काम के साथ उसकी विश्वव्यापी पहुंच को सेलिब्रेट करने के लिए विश्व रेडियो दिवस मानाने का विचार रखा था। 

रेडियो भारत के तकरीबन 99 फीसदी हिस्से तक आसानी से सुलभ है। 90 फीसदी जनसंख्या की रेडियो तक पहुंच है। भारत में आकाशवाणी ने सच्चे अर्थो में आमजन को आवाज देने का क्रार्य किया है। वहीं विविध भारती ने सुगम संगीत, शास्त्रीय संगीत, क्षेत्रीय संगीत, नाटक, और लोक संगीत के संरक्षण में अपनी महती भूमिका निभाई है। रेडियो वास्तव में स्वर और संवाद का लोकतंत्र है। कार्यक्रम में बोलते हुए डॉ. हरिओम ने  कहा कि 2011 में युनेस्को ने जो कदम रेडियो के लिए उठाया उसकी सराहना होनी चाहिए। उन्होने  कहा कि आज का दिन सही अर्थों में रेडियो सेवा में काम करने वाले सभी लोगों को याद करने का दिन है। 

कार्यक्रम में विभाग के शिक्षक डॉ. योगेंद्र कुमार पाण्डेय सहित बड़ी संख्या में छात्र उपस्थित रहे।

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