
संवाददाता
कानपुर। सतुवाई अमावस्या के अवसर पर गंगा घाटो पर “हर-हर गंगे” और “हर हर महादेव” के जयकारों से पूरा वातावरण भक्तिमय हो गया।
गंगा के घाटों पर श्रद्धालुओं की भारी भीड़ उमड़ पड़ी। दूर-दराज गांवों से पहुंचे श्रद्धालुओं ने गंगा में डुबकी लगाकर पुण्य अर्जित किया।
तेज धूप और उमस के बावजूद श्रद्धालुओं का उत्साह कम नहीं हुआ। महिलाएं, पुरुष, बुजुर्ग और बच्चे सभी ने पूरे श्रद्धा भाव से गंगा स्नान किया।
स्नान के बाद श्रद्धालुओं ने विधि-विधान से मां गंगा की पूजा-अर्चना की और मंत्रोच्चारण के साथ आरती उतारी। इसके बाद घाट के मंदिरों में पहुंचकर देवी-देवताओं के दर्शन किए और परिवार की खुशहाली, सुख-समृद्धि व संतानों के उज्ज्वल भविष्य की कामना की।
इस अवसर पर सतुआ (भुने चने और जौ के आटे) दान करने की परंपरा भी निभाई गई। श्रद्धालुओं ने पुरोहितों और जरूरतमंदों को सतुआ वितरित किया। बैसाख अमावस्या पर सतुआ का भोग लगाकर प्रसाद ग्रहण करने की परंपरा का भी पालन किया गया।
सतुवाई अमावस्या का धार्मिक दृष्टि से विशेष महत्व माना जाता है। इस दिन गंगा स्नान, दान-पुण्य और पूजा-अर्चना करने से जीवन में सुख-शांति और समृद्धि आने की मान्यता है। श्रद्धालुओं की भीड़ और उत्साह ने एक बार फिर इस परंपरा की जीवंतता को दर्शाया।






