
संवाददाता
कानपुर। चिकित्सा और तकनीक के क्षेत्र में एक अनोखी पहल के तहत आईआईटी कानपुर ने नेशनल एकेडमी ऑफ मेडिकल साइंसेज और जीएसवीएम मेडिकल कॉलेज, कानपुर के सहयोग से मिड-टर्म कॉन्फ्रेंस मिडनामस्कोन 2025 और सीएमई वर्कशॉप का सफल आयोजन किया। यह आयोजन चिकित्सा और इंजीनियरिंग के क्षेत्र में हो रहे बदलावों और आपसी सहयोग की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम साबित हुआ।
इस सम्मेलन की शुरुआत देश के चिकित्सा और तकनीकी क्षेत्रों की जानी-मानी हस्तियों की उपस्थिति में हुई। उद्घाटन समारोह में प्रमुख रूप से डा. शिवकुमार कल्याणरमन, सीईओ – एएनआरएफ मुख्य अतिथि, प्रो. दिगंबर बेहरा, अध्यक्ष एनएएमएस, पद्मश्री, प्रो. मणींद्र अग्रवाल, निदेशक आईआईटी कानपुर, पद्मश्री, प्रो. अशुतोष शर्मा, अध्यक्ष आईएनएसए, पद्मश्री, प्रो. अशोक कुमार, मिडनामस्कोन 2025 के संयोजक और आईआईटी कानपुर-ला ट्रोब यूनिवर्सिटी रिसर्च अकैडमी के निदेशक तथा प्रो. सरोज चूरामणि गोपाल, आयोजन सचिव, पद्मश्री उपस्थित रहे।
इस सम्मेलन में देशभर के 70 से अधिक विशेषज्ञों और प्रोफेसरों ने वक्ता और पैनलिस्ट के रूप में भाग लिया, जिससे यह आयोजन स्वास्थ्य और तकनीक के क्षेत्र के विचारकों के सबसे विविध सम्मेलनों में से एक बन गया। कार्यक्रम में लगातार सत्र, चर्चाएं और छात्रों द्वारा आयोजित गतिविधियाँ शामिल थीं, जिससे पूरे आयोजन में उत्साह और ज्ञान का आदान-प्रदान बना रहा।
कार्यक्रम की शुरुआत में प्रो. अशोक कुमार ने कहा कि इंजीनियरिंग और चिकित्सा का संगम भारत की स्वास्थ्य व्यवस्था को आने वाले वर्षों में अंतरराष्ट्रीय स्तर पर नई दिशा देने में मदद कर सकता है। उन्होंने यह भी बताया कि कैसे IIT कानपुर और प्रमुख मेडिकल संस्थान मिलकर हेल्थटेक क्षेत्र में बड़ी प्रगति कर सकते हैं।
मुख्य अतिथि डॉ. शिवकुमार कल्याणरमन ने सरकार द्वारा चलाए जा रहे वैज्ञानिक और शैक्षणिक शोध को बढ़ावा देने वाली योजनाओं के बारे में जानकारी दी और शोधकर्ताओं एवं डॉक्टरों से इनका लाभ उठाने की अपील की।
अपने मुख्य भाषण में प्रो. दिगंबर बेहरा ने तकनीक के चिकित्सा क्षेत्र में योगदान को रेखांकित करते हुए कहा कि यह बात अक्सर अनदेखी रह जाती है कि तकनीक ने चिकित्सा क्षेत्र में कितना बड़ा योगदान दिया है। एक साधारण स्टेथोस्कोप भी तकनीक की देन है। आज डॉक्टरों और इंजीनियरों को साथ आकर स्वास्थ्य सेवाओं के समाधान खोजने होंगे, ताकि रोजमर्रा की स्वास्थ्य समस्याओं को सरलता से हल किया जा सके।
इस अवसर पर आईआईटी कानपुर के निदेशक प्रो. मणींद्र अग्रवाल ने कहा कि आईआईटी कानपुर में हम यह दृढ़ता से मानते हैं कि इंजीनियरिंग और चिकित्सा का संगम हमारे समय की कुछ सबसे जटिल स्वास्थ्य चुनौतियों का समाधान निकालने की कुंजी है। मिडनामस्कोन 2025 जैसे कार्यक्रम विभिन्न क्षेत्रों के विशेषज्ञों के बीच सहयोग को प्रोत्साहित करते हैं, जहां चिकित्सक, अकादमिक विद्वान और तकनीकी विशेषज्ञ एक साथ मिलकर ऐसे समाधान विकसित करते हैं जो लैब से सीधे मरीजों तक पहुँच सकें — ये समाधान नवाचारी, बड़े पैमाने पर लागू करने योग्य और प्रभावशाली होते हैं। मैं प्रो. अशोक कुमार, डॉ. चूरामणि और पूरी आयोजन समिति को इस सफल आयोजन के लिए हार्दिक बधाई देता हूँ।
प्रो. अशुतोष शर्मा ने कहा कि AI और बायोइंजीनियरिंग भारत के हेल्थटेक सेक्टर के लिए परिवर्तनकारी तकनीकें हैं, जो देश की स्वास्थ्य व्यवस्था को आगे बढ़ाने में इंजन की तरह काम कर रही हैं।
प्रो. संजय कला, प्राचार्य, जीएसवीएम मेडिकल कॉलेज ने कहा कि एआई एक उपकरण है, न कि मानव बुद्धि का विकल्प। उन्होंने कहा कि इंजीनियरों, नवप्रवर्तकों और डॉक्टरों को साथ आकर रचनात्मक विचारों पर मिलकर काम करना चाहिए।
प्रो. संदीप वर्मा, प्रमुख, गंगवाल स्कूल ऑफ मेडिकल साइंसेज़ एंड टेक्नोलॉजी, आईआईटी कानपुर ने भविष्य की इंजीनियरिंग और नीतियों की भूमिका पर ज़ोर दिया, जो कि मरीजों की देखभाल को और बेहतर बना सकती हैं।
कार्यक्रम के समापन पर प्रो. सरोज चूरामणि गोपाल, आयोजन सचिव, मिडनामस्कोन 2025 ने आयोजन की सफलता पर खुशी जताते हुए छात्रों की सक्रिय भागीदारी और आयोजन समिति की मेहनत की सराहना की।
इस आयोजन की शोभा भारत के कई प्रतिष्ठित और सम्मानित विशेषज्ञों ने बढ़ाई, जिनमें डॉ. जी.पी. तलवार पद्म भूषण, डॉ. एन.के. गांगुली पद्म भूषण, पूर्व महानिदेशक, आईसीएमआर, डॉ. विश्व मोहन कटोच पद्मश्री, पूर्व डीजी, आईसीएमआर, प्रो. अशोक के. गुप्ता पद्मश्री, बीएचआईएमएस मुंबई, प्रो. वाई.के. गुप्ता ऐम्स जम्मू, प्रो. वाई.के. चावला किम्स भुवनेश्वर, प्रो. नरेश भटनागर आईआईटी दिल्ली, प्रो. एस.एन. संखवार आईएमएस बीएचयू, प्रो. राकेश अग्रवाल एसजीपीजीआई लखनऊ, प्रो. महेश वर्मा उपकुलपति, जीजीएसआईपीयू, प्रो. तरुणा मदान आईसीएमआर, दिल्ली, प्रो. संजीव मिश्रा उपकुलपति, एबीवीएमयू, डॉ. राजेन्द्र प्रसाद ईएमसी लखनऊ और प्रो. अमिता जैन केजीएमयू लखनऊ विशेष रूप से उपस्थित थे।
इस आयोजन में 200 से अधिक प्रतिभागियों ने भाग लिया। इसमें चिकित्सा, इंजीनियरिंग और छात्रों की ऊर्जा का ऐसा संगम देखने को मिला, जिसने भारतीय स्वास्थ्य क्षेत्र के भविष्य के लिए एक साझा मार्ग तैयार किया।






