January 25, 2026

संवाददाता
कानपुर।
आईआईटी कानपुर में पीएचडी स्कालर रामस्वरुप ईश्रम की आत्महत्या के बाद संस्थान गंभीर सवालों के घेरे में है। बीते 2 साल में 9 छात्रों के सुसाइड के बाद आईआईटी कानपुर देश में सबसे ज्यादा सुसाइड वाली जगह बन गई है।
29 दिसंबर 2025 और 21 जनवरी 2026 को 24 दिनों में हुई छात्र आत्महत्याओं की 2 घटनाओं ने आईआईटी कानपुर की काउंसिलिंग सेल पर गंभीर सवाल खड़े किए हैं। सवाल उठ रहे हैं कि आखिर ऐसा क्या है जो आईआईटी कानपुर में उज्जवल भविष्य का सपना संजोकर आने वाले छात्र आत्महत्या का रास्ता चुन रहे हैं।
हालांकि इसी बीच आईआईटी कानपुर की ओर से दोनों आत्महत्याओं के बाद जो प्रेस रिलीज जारी की गई, उसमें कोई फेरबदल नहीं है। शब्द तक नहीं बदले गए। दोनों घटनाओं के बाद आईआईटी ने अपने मीडिया ग्रुप पर अपने सेंटर फॉर मेंटल हेल्थ वेलबीइंग का बखान किया गया है।
इसके अलावा 21 जनवरी को हुई घटना के बाद आईआईटी के डीन ऑफ स्टूडेंट्स अफेयर्स प्रो. प्रतीक सेन का एक बयान जारी हुआ, जिसमें छात्र की बीमारियों का जिक्र किया गया है। हालांकि 24 दिन में आत्महत्या की दो घटनाओं के बाद आईआईटी ने जांच के लिए एक इंटरनल कमेटी का गठन किया है।
इसके अलावा मामले का शिक्षा मंत्रालय ने संज्ञान लेते हुए तीन सदस्यीय एक कमेटी भी बनाई है जो कि आत्महत्या के मामलों की जांच करके 15 दिन में रिपोर्ट सौंपेगी।
देशभर के आईआईटी में पिछले दो वर्षों में कुल 30 आईआईटी छात्रों ने आत्महत्या की है, जिनमें से 9 आत्महत्याएं अकेले आईआईटी कानपुर परिसर में हुई हैं। यह देश के 23 आईआईटी में से किसी भी आईआईटी में हुई मौतों की सबसे अधिक संख्या है।
आईआईटी कानपुर के बाद, आईआईटी खड़गपुर में इस अवधि के दौरान 7 आत्महत्याओं के साथ दूसरा सबसे अधिक आंकड़ा दर्ज किया गया, जबकि आईआईटी खड़गपुर में आईआईटी कानपुर की तुलना में डेढ़ गुना अधिक छात्र हैं।
आईआईटी कानपुर के पूर्व छात्र और ग्लोबल आईआईटी एलुमनाई सपोर्ट ग्रुप के संस्थापक धीरज सिंह ने दो साल के भीतर 9वें सुसाइड को गंभीरता से लिया है। उन्होंने कहा कि सर्वोच्च न्यायालय ने इस बात की पुष्टि की है कि मानसिक स्वास्थ्य अनुच्छेद 21 के तहत जीवन के अधिकार का अभिन्न अंग है। इसके अलावा, साहा बनाम आंध्र प्रदेश राज्य मामले में न्यायालय ने आदेश दिया है कि छात्रों के मानसिक स्वास्थ्य को संवैधानिक और संस्थागत जिम्मेदारी माना जाए।
आईआईटी कानपुर कैंपस में शिक्षकों, छात्रों व कर्मचारियों के लिए मानसिक स्वास्थ्य पर जागरूकता और संवेदनशीलता कार्यशालाएं आयोजित की जाती हैं। किसी भी आपात स्थिति में छात्रों को दिन-रात सहायता देने के लिए सीएमएचडब्ल्यू और स्वास्थ्य केंद्र के बीच समन्वय के साथ 24 घंटे की व्यवस्था की गई है।
छात्रों के मानसिक स्वास्थ्य को लेकर नियमित रूप से जागरूकता कार्यक्रम और कार्यशालाएं आयोजित की जाती हैं। स्नातक और परास्नातक छात्रों के लिए पीयर मेंटरिंग की व्यवस्था है जिसमें सीनियर छात्र नए छात्रों को सहयोग और मार्गदर्शन देते हैं। लेकिन एक के बाद एक सुसाइड होने से आईआईटी की इस व्यवस्था पर कई सवाल खड़े हो रहे हैं।
मानसिक स्वास्थ्य एवं कल्याण केंद्र को मजबूत किया गया है। इसके तहत गंभीर मानसिक समस्याओं से निपटने के लिए 10 पूर्णकालिक प्रशिक्षित मनोवैज्ञानिक नियुक्त किए गए हैं। इसके अलावा एक क्लिनिकल हेड – मनोचिकित्सक की नियुक्ति की गई है तथा तीन मनोचिकित्सकों को पैनल में शामिल किया गया है।

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