February 23, 2026

संवाददाता
कानपुर।
टी 20 वर्ल्ड कप में आज भारत-पाकिस्तान के बीच श्रीलंका के कोलंबो में हुए महामुकाबले से पहले कुलदीप यादव से कोच ने फोन पर बात की।
चाइनामैन कहे जाने वाले स्पिनर कुलदीप से कोच कपिल देव पांडेय ने कहा- गेंदबाजी में लाइन और लेंथ का ध्यान रखें। मैच का दबाव न लें और रिलैक्स मोड में गेंदबाजी करें।
कपिल देव पांडेय ने बताया कि कुलदीप से मैच को लेकर फोन पर बात हुई थी। कोच ने कुलदीप को समझाया कि पाकिस्तान के बल्लेबाज दबाव बनाने के लिए आक्रामक रुख अपना सकते हैं, लेकिन इस बात का ध्यान रखना है कि ज्यादा से ज्यादा गुगली का इस्तेमाल करें। चाइनामैन स्पिन कम फेंकें।
खास तौर पर दाएं हाथ के बल्लेबाजों को ज्यादा गुगली दें और बाएं हाथ के बल्लेबाजों को जरूरत के हिसाब से चाइनामैन स्पिन फेंकी जा सकती है। इससे बल्लेबाज आगे निकलकर खेलने की कोशिश करेंगे और विकेट मिलने की संभावना बढ़ेगी।
भारत 2007 और 2024 में टी-20 वर्ल्ड कप जीत चुका है, टीम ने अपना पहला टाइटल पाकिस्तान को फाइनल हराकर ही जीता था। दूसरी ओर पाकिस्तान 2009 का चैंपियन है, पाकिस्तान टीम 2007 और 2022 में रनर-अप रह चुकी है।
भारतीय टीम के स्पिनर गेंदबाज कुलदीप भले ही दुनिया के बेहतरीन चाइनामैन गेंदबाजों में गिने जाते हों, लेकिन उनका सफर आसान नहीं रहा। उनके बचपन के कोच कपिल देव पांडे बताते हैं कि तेज गेंदबाज बनने के लिये कुलदीप मेरे पास 12 साल की उम्र में सीखने आ गया था। शुरुआत में कुलदीप वसीम अकरम की तरह गेंदबाजी करना चाहते थे।
कुलदीप के पिता चाहते थे कि उनका बेटा जिला स्तर का अच्छा क्रिकेटर बने। युवा कुलदीप में स्विंग की समझ तो अच्छी थी, लेकिन तेज गेंदबाज बनने के लिए जरूरी रफ्तार की कमी थी। पांडे ने साफ कह दिया कि सिर्फ स्विंग से काम नहीं चलेगा। यह सुनकर कुलदीप भावुक हो गए थे।
कोच ने उन्हें साफ विकल्प दिया था या तो स्पिन गेंदबाजी अपनाओ या फिर क्रिकेट छोड़ दो। पहले तो कुलदीप ने मानो अनमने मन से स्पिन शुरू की, लेकिन धीरे-धीरे यही उनकी ताकत बन गई। पांडे ने उनकी कलाई की मजबूती और गेंद पर पकड़ देखकर उन्हें चाइनामैन गेंदबाजी पर काम करने की सलाह दी।
कम उम्र में ही कुलदीप को गुगली और अलग-अलग वैरिएशन सिखा दिए गए। एक स्थानीय प्रतियोगिता में जब कुलदीप ने गुगली डाली तो लोग हैरान रह गए। पांडे कहते हैं कि आज के दौर में खिलाड़ियों को शुरुआत से ही विशेषज्ञता की ओर ले जाना जरूरी है।
चोटों और कठिन दौर के बावजूद कुलदीप ने हार नहीं मानी। 2021 में चोट के बाद पांच महीने के ब्रेक के दौरान उन्होंने अपनी तकनीक पर दोबारा काम किया और और भी मजबूत होकर लौटे। आज उनका वही संघर्ष उन्हें भारतीय स्पिन आक्रमण का अहम हिस्सा बनाता है।