January 31, 2026

• मरीज ले जा रही एंबुलेंस भी 10 से 15 मिनट तक फंसी, आमजन हुआ परेशान

संवाददाता 

कानपुर। बार काउंसिल के चुनाव को लेकर शहर की यातायात व्यवस्था पूरी तरह चरमरा गई। मतदान के दिन अधिवक्ताओं और उनके समर्थकों की भारी आवाजाही के कारण शहर के प्रमुख मार्गों और चौराहों पर वाहनों के पहिए थम से गए। हालात ऐसे रहे कि सुबह से लेकर दोपहर तक शहर के कई इलाकों में लंबा जाम लगा रहा, जिससे आम नागरिकों को भारी परेशानियों का सामना करना पड़ा।

कचहरी क्षेत्र, फूलबाग, परेड, बड़ा चौराहा ,नवीन मार्केट,लाल इमली चौराहा,चुन्नी गंज, स्वरूप नगर,मूलगंज, बादशाही नाका,घंटाघर और सभी मेट्रो स्टेशन के आसपास, सिविल लाइंस और बड़ा चौराहा जैसे व्यस्त इलाकों में वाहनों की लंबी कतारें देखने को मिलीं। बार काउंसिल चुनाव के चलते  कचहरी में मतदान प्रक्रिया चल रही थी। जिसके चलते वीआईपी रोड और कचहरी मार्ग वाहनों के लिए प्रतिबंधित था ।यातायात प्रतिबंधित होने के कारण एक ही रोड पर वाहनों की ओवरलोडिंग हो गई और जाम की स्थिति पैदा हो गई। यह जाम खुलवाने के लिए यातायात पुलिस के साथ शहर के सम्भ्रांत नागरिकों को भी उतरकर सड़कों में वाहन स्वामियों को समझाना पड़ा जिसे यातायात सुचारू रूप से चालू हो सके। यह जाम की स्थिति 3बजे शुरू हुई जो शाम 6 बजे तक जारी रही। माना जा रहा है कि ट्रैफिक नियंत्रण की पर्याप्त व्यवस्था न होने से स्थिति लगातार बिगड़ती चली गई।

सबसे चिंताजनक स्थिति तब सामने आई जब मरीज को लेकर जा रही एंबुलेंस भी जाम में फंस गई। प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार एक एंबुलेंस लगभग 10 से 15 मिनट तक जाम में खड़ी रही। सायरन बजने के बावजूद रास्ता नहीं मिल सका, जिससे मरीज और उसके परिजनों की चिंता बढ़ गई। मौके पर मौजूद लोगों ने किसी तरह वाहन हटवाकर एंबुलेंस को रास्ता दिलाया, लेकिन इस दौरान कीमती समय नष्ट हो गया।स्थानीय नागरिकों ने प्रशासन और यातायात विभाग पर सवाल खड़े करते हुए कहा कि चुनाव जैसे बड़े आयोजन से पहले ट्रैफिक प्लान तैयार किया जाना चाहिए था। वैकल्पिक मार्गों की व्यवस्था, अतिरिक्त पुलिस बल और ट्रैफिक कर्मियों की तैनाती से हालात को काफी हद तक संभाला जा सकता था, लेकिन ऐसा होता नजर नहीं आया।एक बार फिर यह सवाल खड़ा कर दिया है कि क्या बड़े आयोजनों के दौरान आम जनता की सुविधा और आपात सेवाओं की सुरक्षा को गंभीरता से लिया जा रहा है या नहीं। खासकर एंबुलेंस जैसी जरूरी सेवाओं का जाम में फंसना व्यवस्था पर सीधा प्रश्नचिह्न है।

शहरवासियों की मांग है कि भविष्य में इस तरह के आयोजनों के दौरान ठोस ट्रैफिक प्रबंधन सुनिश्चित किया जाए, ताकि लोकतांत्रिक प्रक्रिया के साथ-साथ जान और समय दोनों सुरक्षित रह सकें।