
संवाददाता
कानपुर। एडवोकेट राजाराम हत्याकांड मामले में पुलिस के बार एसोसिएशन के पूर्व महामंत्री राकेश तिवारी को उठाने के बाद यह मामला सुर्खियों में है। सोशल मीडिया पर 3 मिनट 12 सेकेंड की एक ऑडियो क्लिप जारी हुई। यह राजाराम को मारने वाले एक शूटर की बताई जा रही है।
ऑडियो क्लिप में शूटर समेत तीन युवकों की आवाज सुनाई दे रही है। जिसमें वह कह रहा है कि पुलिस कमिश्नर ने उसे बार एसोसिएशन के पूर्व महामंत्री राकेश तिवारी का नाम लेने को कहा है।
राजाराम हत्याकांड मामले में 31 जनवरी शाम करीब 5 बजे नवाबगंज पुलिस बार एसोसिएशन के पूर्व महामंत्री राकेश तिवारी को पकड़कर थाने ले गई थी। जिसकी जानकारी होने पर 100 से अधिक अधिवक्ताओं ने थाने में हंगामा किया था।
हंगामा बढ़ा तो पुलिस कमिश्नर रघुवीर लाल मौके पर पहुंचे थे। वकीलों का हंगामा देखते हुए पुलिस कमिश्नर ने कोहना, कल्याणपुर, रावतपुर, स्वरूप नगर, कर्नलगंज, ग्वालटोली समेत करीब 10 थानों का फोर्स बुला लिया था। पीएसी भी तैनात की गई थी।
बार महामंत्री अमित सिंह ने बताया कि पुलिस अधिवक्ताओं का उत्पीड़न कर रही है। पुलिस कमिश्नर राकेश तिवारी को हत्या के मुकदमे में फंसाना चाहते हैं। करीब 7 घंटे चली पूछताछ के बाद राकेश तिवारी समेत दोनों व्यापारियों को पुलिस ने रात 12.30 बजे छोड़ दिया था।
गंगा नगर हाउसिंग सोसाइटी थाना नवाबगंज थानाक्षेत्र निवासी अधिवक्ता राजाराम वर्मा की गोली मारकर हत्या कर दी गई थी। मामले में पुलिस ने एनआरआई सिटी के मालिक समेत चार लोगों के खिलाफ हत्या की एफआईआर दर्ज की थी।
हत्याकांड से पहले शूटरों ने अधिवक्ता राजाराम को कॉल की थी। गेट से बाहर निकलते ही पैर छूकर गोली मार दी थी। कॉल डिटेल से पुलिस ने चौबेपुर बूढ़नपुर निवासी रोहित और चौबेपुर हकीमनगर निवासी दिलनाज को गिरफ्तार करके जेल भेज दिया था।
जांच में पता चला कि दोनों को इलाके में रहने वाले अंकित यादव ने 4 लाख में सुपारी दी थी। इसके पीछे एनआरआई सिटी से जुड़ी 17 बीघे जमीन का विवाद था। पुलिस के मुताबिक, नवाबगंज में रहने वाले व प्रापर्टी डीलिंग का काम करने वाले रामखिलावन का अधिवक्ता राजाराम से एनआरआई सिटी के पास की जमीन को लेकर विवाद चल रहा था।
इसको लेकर राम खिलावन ने अंकित यादव को चार लाख की सुपारी दी थी। इस पर अंकित यादव ने चौबेपुर से शार्प शूटरों को हायर किया था।
पुलिस कमिश्नर रघुवीर लाल ने बताया कि जो खुद आरोपी है उसके बयानों के आधार पर किसी के खिलाफ कार्रवाई नहीं की जाएगी। जो ऑडियो वायरल हो रहा है, उससे स्पष्ट होता है, कि ऑडियो जिसने वायरल कराया है, उसको इससे लाभ मिलेगा। वायरल ऑडियो की जांच कराई जाएगी।






