
संवाददाता
कानपुर। पीसीएस अफसर अलंकार अग्निहोत्री अपने घर से इस्तीफा देने वाले इकलौते अफसर नहीं हैं। इससे पहले अलंकार का पालन-पोषण करने वाले एयरफोर्स के विंग कमांडर ताऊ और बैंक कर्मी पिता ने भी इस्तीफा दिया था।
अलंकार के ताऊ पूर्व विंग कमांडर एसके अग्निहोत्री ने कहा- जब अन्याय होता है तो लड़ाई लड़नी चाहिए, पढ़ाई-लिखाई इसके आगे गौड़ हो जाती हैं। हमारे परिवार का यही सिद्धांत रहा है।
कानपुर के डब्ल्यू ब्लॉक केशव नगर में रहने वाले अलंकार अग्निहोत्री ने अपनी राजनीतिक पार्टी बना ली है। अब वह पूरी तरह से राजनीति में सक्रिय हो गए हैं। अलंकार गुरुवार को अपने घर पहुंचे तो बहुत धूमधाम से उनका स्वागत हुआ।
ताऊ एसके अग्निहोत्री ने बताया कि अलंकार अपने परिवार के तीसरे व्यक्ति हैं, जिन्होंने नौकरी से इस्तीफा दिया है। उन्होंने कहा कि अगर अलंकार की जगह मैं होता तो मैं भी यही करता। अगर अन्याय होता है तो लड़ो…, पढ़ाई-लिखाई, नौकरी सब अन्याय के आगे गौड़ हो जाती हैं।
एसके अग्निहोत्री ने कहा- मैंने भी देश सेवा में 33 साल दिया है। मैं भी एयरफोर्स में अधिकारी रहा और 1971 का युद्ध भी लड़ा है। लेकिन, जब मुझे लगा कि एयरफोर्स मेरे साथ नहीं है तो मैंने भी इस्तीफा दे दिया। इतना ही नहीं अलंकार के पिता दिवंगत विजय अग्निहोत्री के साथ भी अत्याचार हुआ तो उन्होंने भी बैंक से इस्तीफा दे दिया था।
अलंकार के पिता बैंक में थे, उन्हें बैंक के मैनेजरों ने फंसाया तो उन्हें यह बर्दाश्त नहीं हुआ। उन्होंने भी ठीक इसी तरह सेवा से इस्तीफा दे दिया था। तब जाकर तस्वीर साफ हो सकी कि वह अपने परिवार के तीसरे व्यक्ति हैं, जिन्होंने अपनी नौकरी से इस्तीफा दिया है।
अलंकार के घर में पत्नी आस्था और एक साल का बेटा है। इसके साथ ही मां गीता अग्निहोत्री हैं। जबकि पिता विजय अग्निहोत्री का निधन हो चुका है। अलंकार पांच भाई-बहनों में बड़े हैं। उनसे छोटे भाई राहुल अग्निहोत्री, शशांक अग्निहोत्री, अंकित अग्निहोत्री और बहन दीपिका सभी पेशे से इंजीनियर हैं। उनके इस्तीफा देने के बाद से पूरा परिवार उनके साथ खड़ा है। अलंकार ने बताया कि इस्तीफा देने के फैसले पर पूरा परिवार उनसे सहमत है।
अलंकार अग्निहोत्री ने 23 फरवरी को वृंदावन में अपनी राजनीतिक पार्टी राष्ट्रीय अधिकार मोर्चा के गठन की घोषणा की थी। पार्टी का नाम राष्ट्रीय अधिकार मोर्चा यानी राम रखा।
पार्टी के झंडे में भगवान श्रीराम का तीर- धनुष है। अलंकार ने लोगों के सामने पार्टी का विजन और एजेंडा रखा था। कहा- भाजपा से जनरल और ओबीसी वर्ग का मोहभंग हो चुका है।
अलंकार अग्निहोत्री ने कहा- हमारे संपर्क में सभी पॉलिटिकल पार्टी, ब्राह्मण संगठन, किसान संगठन और सवर्ण समाज, ओबीसी संगठन हैं। एससी – एसटी के संगठन भी हमारे संपर्क में हैं। भाजपा और आरएसएस के लोग भी संपर्क कर रहे हैं।
बरेली के सिटी मजिस्ट्रेट अलंकार अग्निहोत्री ने गणतंत्र दिवस पर अपने पद से इस्तीफा दिया था। इसकी वजह यूजीसी के नए कानून और शंकराचार्य अविमुक्तेश्वरानंद के शिष्यों की पिटाई बताई थी। हालांकि, उनका इस्तीफा स्वीकार नहीं हुआ। शासन ने उन्हें सस्पेंड कर जांच बैठा दी है।
26 जनवरी की शाम करीब साढ़े 7 बजे सिटी मजिस्ट्रेट डीएम अविनाश सिंह से मिलने उनके आवास पहुंचे। बाहर आने पर सिटी मजिस्ट्रेट ने कहा – मुझे डीएम आवास में 45 मिनट बंधक बनाकर रखा गया। लखनऊ से डीएम के पास फोन आया। गाली देते हुए कहा गया पंडित पागल हो गया है। इसको रातभर बंधक बनाकर रखो। मीडिया को मैंने पहले ही बता दिया था। एसएसपी के कहने पर मुझे छोड़ा गया। मैं अपनी जान बचाकर भागा हूं।
सिटी मजिस्ट्रेट ने अपना सरकारी आवास खाली कर दिया। उन्होंने जाते-जाते कहा था- वे आज बरेली में ही अपने परिचितों के यहां रुके हैं। उनके साथ बैठकर आगे की रणनीति तय करेंगे।
अलंकार अग्निहोत्री ने इस्तीफे में 5 पेज का एक लेटर भी लिखा। जिसमें उन्होंने कहा- ‘प्रयागराज माघ मेले के दौरान शंकराचार्य के शिष्यों की चोटी पकड़ी गई।’ उन्होंने लिखा- ऐसी घटना किसी भी साधारण ब्राह्मण को अंदर से हिला देती है। ऐसा लगता है कि प्रशासन और मौजूदा सरकार ब्राह्मणों और साधु-संतों के खिलाफ काम कर रही है। उनकी इज्जत के साथ खिलवाड़ हो रहा है। ब्राह्मणों की बात करने वाला कोई नहीं है।
अलंकार अग्निहोत्री ने सवाल पूछा- क्या ब्राह्मणों के नरसंहार की तैयारी है। सिटी मजिस्ट्रेट को मनाने के लिए एडीएम के साथ तीन अन्य अफसर पहुंचे थे। चारों अफसर करीब एक घंटे सिटी मजिस्ट्रेट के आवास में रहे। फिर लौट गए।
सपा-कांग्रेस कार्यकर्ताओं के साथ कई ब्राह्मण संगठनों के नेता अलंकार अग्निहोत्री से मिलने पहुंचे। आवास के बाहर ब्राह्मण नेताओं ने प्रदर्शन भी किया।
ब्राह्मण वर्ग से आने वाले अलंकार अग्निहोत्री 2019 में पीसीएस अफसर बने थे। उनकी 15वीं रैंक आई थी। अलंकार अपने ऑफिस में भगवान बजरंगबली की तस्वीर लगाकर चर्चा में आए थे। उस समय भीम आर्मी ने कलेक्ट्रेट में हंगामा भी किया था। इस दौरान अफसर से नोकझोंक भी हुई थी।






