
संवाददाता
कानपुर। धान की फसल में बाली निकलने के साथ कई कीट और बीमारियों का प्रकोप देखा जा रहा है। फसल में भूरा फुदका, पत्ती लपेटक, हिस्पा, तना छेदक और सैनिक कीट की समस्या है। बाली निकलने के बाद गन्धिबग और धान का कठुआ रोग भी सामने आया है। कृषि डॉक्टर अरविंद कुमार द्विवेदी ने भी किसानों का मार्गदर्शन किया है।कृषि डॉक्टर ने मेलाथियान पाउडर या कीटनाशक के प्रयोग की सलाह दी। इससे धान की फसल को कीट-पतंगों से बचाया जा सकता है।
राजकीय बीज भंडार के प्रभारी राजेश कुमार ने किसानों को कई सुरक्षा उपाय बताए हैं। खैरा डिजीज से बचाव के लिए जिंक सल्फेट का छिड़काव करना होगा। हिस्पा और तना छेदक को रोकने के लिए टेलडान व टाटा फाइटो क्लोराइड का प्रयोग किया जा सकता है।
किसान नीम तेल जैसे जैविक और थियामेथोक्सम व एसिटामिप्रिड जैसे रासायनिक कीटनाशकों का इस्तेमाल कर सकते हैं। फसल की नियमित निगरानी आवश्यक है। किसी भी तरह के असामान्य बदलाव पर तुरंत ध्यान देना जरूरी है।
इस समय दीमक से भी फसल को नुकसान हो रहा है। किसानों को स्थानीय कृषि विशेषज्ञों से सलाह लेकर समय पर सुरक्षा उपाय अपनाने चाहिए।
डोंडवा, जमौली, मकरंद निवादा, माखन निवादा और उत्तरी घिमऊ के किसानों को उन्होंने फसल सुरक्षा के उपाय बताए।






