• समस्याओं से जूझता ग्रीनपार्क स्टेडियम फिर से अन्तर्राष्ट्रीय मैच का बनेगा गवाह।
संवाददाता
कानपुर। समस्याओं से जूझता ग्रीनपार्क एक बार फिर से वही पुरानी कहानी दोहराने को तैयार है। स्टेडियम में जहाँ इस महीने के अंत में भारत ए और ऑस्ट्रेलिया ए के बीच तीन मैचों की एकदिवसीय श्रृंखला खेली जानी है उसमें लाल मिट्टी की पिच तक नहीं बन पायी है। ग्रीनपार्क स्टेडियम में सुविधाएँ पूरी तरह से खराब हैं, सी बालकनी में दर्शकों के बैठने की जगह नहीं है और अगर बारिश होती है तो जल निकासी की भी कोई उचित व्यवस्था नहीं है।
एक साल पहले यहां आयोजित टेस्ट मैच के दौरान ही सुविधाओं को बेहतर करने की योजना बनायी गयी थी, जिसमें जल निकासी से लेकर दर्शक क्षमता में वृद्धि करना मुख्य रूप से शामिल था। एक साल के बाद भी ग्रीनपार्क स्टेडियम की हालत जस की तस बनी हुयी है। इन्ही खराब सुविधाओं के बीच इस मैदान पर दोनों देशों की ए टीमों के बीच पहली पूर्ण श्रृंखला का पहला मैच 30 सितंबर को होगा, जबकि बाकी दो मैच 3 और 5 अक्टूबर को खेले जाएँगे।
क्रिकेट के लिए यह पहला अंतरराष्ट्रीय स्थल और भारतीय क्रिकेट कंट्रोल बोर्ड की सूची में सर्वश्रेष्ठ टेस्ट केंद्रों में से एक, लंबे समय से अपने नवीनीकरण के लिए संघर्ष करता दिखायी दे रहा है, जबकि उत्तर प्रदेश क्रिकेट संघ एक समझौता ज्ञापन के अनुसार सालाना 1.25 करोड़ रुपये का भुगतान करने के अलावा इस स्थल का प्रबंधन भी कर रहा है।
पिछले सितंबर में भारत और बांग्लादेश के बीच टेस्ट मैच के पहले तीन दिनों में एक भी गेंद नहीं फेंके जाने के बाद, अंतर्राष्ट्रीय क्रिकेट परिषद ने इस स्टेडियम को एक डिमेरिट अंक दिया था, जिसके बाद स्टेडियम के नवीनीकरण की काफी उम्मीद थी। हालाँकि उस दौरान लगातार बारिश नहीं हुई थी, फिर भी इस पर काफी हंगामा हुआ था। इसका वास्तविक कारण रात भर हुई बारिश के कारण गीला आउटफील्ड था। अन्य समस्याओं के अलावा, जल निकासी व्यवस्था भी ठप हो गई थी।
इस बार भी स्टेडियम प्रशासन द्वारा किए गए अथक प्रयासों के बावजूद, स्थिति दयनीय बनी हुई है।जैसा कि अपेक्षित था, उत्तर प्रदेश क्रिकेट संघ ने स्टेडियम के नवीनीकरण के लिए एक बड़ी योजना बनाई और यहाँ तक कि बीसीसीआई के उपाध्यक्ष और यूपीसीए के पूर्व सचिव राजीव शुक्ला ने मैच के आखिरी दिन इस मुद्दे को युद्धस्तर पर उठाने का वादा किया।लेकिन वास्तव में, सितंबर में टेस्ट मैच के दौरान हुई अव्यवस्था के एक साल बाद भी, नवीनीकरण के बारे में अभी तक कोई गंभीर कदम नहीं उठाया गया है। इसके तुरंत बाद, कानपुर में यूपीसीए और ज़िला प्रशासन की एक बैठक हुई जिसमें स्टेडियम के मालिक उत्तर प्रदेश खेल निदेशालय के अधिकारियों की मौजूदगी में इस मुद्दे पर चर्चा हुई। और इस तरह मामला आगे बढ़ा।
यूपीसीए सचिव अरविंद कुमार श्रीवास्तव ने कुछ महीने पहले कहा था अगर स्टेडियम का नवीनीकरण आज भी शुरू हो जाए, तो इसे तैयार होने में कम से कम दो साल तो लगेंगे ही। उन्होंने आगे कहा हमने पिछले हफ़्ते ही इस पर चर्चा की है और यह तय हुआ है कि यूपीसीए स्टेडियम के नवीनीकरण की एक योजना बनाकर आगे की कार्रवाई के लिए सरकार को सौंपेगा।
ग्रीन पार्क स्टेडियम में यूपीसीए के रोज़मर्रा के कामकाज का प्रबंधन कर रहे यूपीसीए अधिकारियों ने बताया कि स्टेडियम के नवीनीकरण की 250 करोड़ रुपये की एक प्रारंभिक परियोजना कुछ महीने पहले सीधे प्रमुख सचिव खेल के कार्यालय को सौंपी गई थी, लेकिन तब कोई जवाब नहीं आया। दरअसल, यह मुद्दा तब प्रकाश में आया जब कानपुर के सांसद रमेश अवस्थी ने ग्रीन पार्क स्टेडियम को बचाने के लिए एक विशेष अभियान शुरू किया। उन्होंने कहा था कि ग्रीन पार्क स्टेडियम कानपुर का गौरव है और हम सभी को इसके अस्तित्व के लिए संघर्ष करना चाहिए।पिछले हफ़्ते संबंधित अधिकारियों की एक बैठक के दौरान अवस्थी ने कहा कि ग्रीन पार्क स्टेडियम का नवीनीकरण मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की प्राथमिकताओं में शामिल है। यह न केवल कानपुर, बल्कि पूरे देश की खेल धरोहर है।उन्होंने स्टेडियम की दर्शक क्षमता बढ़ाने, जल निकासी व्यवस्था को बेहतर बनाने, मीडिया सेंटर के नवीनीकरण, बहु-स्तरीय पार्किंग और बुज़ुर्गों व दिव्यांगजन दर्शकों के लिए विशेष सुविधाओं के प्रावधान पर भी ज़ोर दिया।
ग्रीन पार्क में यूपीसीए के नोडल अधिकारी सुजीत श्रीवास्तव ने कहा कि भारत ए और ऑस्ट्रेलिया ए के बीच होने वाले तीन एक दिवसीय मैचों के लिए सी बालकनी के इस्तेमाल पर अभी कोई फ़ैसला नहीं लिया गया है। लोक निर्माण विभाग के अधिकारी गैलरी का निरीक्षण कर चुके हैं और मैच के दौरान दर्शकों की संख्या पर काफ़ी कुछ निर्भर करेगा।






