
संवाददाता
कानपुर। मेट्रो अब सिर्फ आने-जाने का जरिया नहीं, बल्कि शहर के गौरवशाली इतिहास और संस्कृति का ‘ओपन एयर म्यूजियम’ बनती जा रही है।
आईआईटी से कानपुर सेंट्रल तक मेट्रो के सफर के दौरान मुसाफिरों को शहर के अतीत और वर्तमान की जो झलक मिल रही है, उसका विस्तार अब झकरकटी और ट्रांसपोर्ट नगर अंडरग्राउंड स्टेशनों तक होने जा रहा है। यहां दीवारों पर ब्रज की संस्कृति और प्रकृति के सुंदर रंगों को उकेरा जाएगा।
मेट्रो के तीसरे चरण कानपुर सेंट्रल से नौबस्ता के तहत झकरकटी और ट्रांसपोर्ट नगर स्टेशनों पर आर्टवर्क का काम शुरू हो गया है। इन स्टेशनों पर यात्रियों को भारतीय संस्कृति के जीवंत दर्शन होंगे। योजना के मुताबिक, यहां भगवान श्रीकृष्ण की ग्वाल-बालों के साथ लीलाएं, नाचते हुए मोर, ऊंचे पर्वत और फूलों के बागों जैसे सुंदर प्राकृतिक दृश्य तैयार किए जा रहे हैं। इसके साथ ही कानपुर की आधुनिक पहचान बनती मेट्रो ट्रेन को भी कलाकृतियों के जरिए दिखाया जाएगा।
मोतीझील से कानपुर सेंट्रल के बीच बने मेट्रो स्टेशन पहले ही शहरवासियों के पसंदीदा सेल्फी पॉइंट बन चुके हैं।
कानपुर सेंट्रल स्टेशन पर रानी लक्ष्मीबाई और 1857 के स्वतंत्रता संग्राम की शौर्य गाथा को चित्रों के जरिए संजोया गया है। स्टेशनों पर ‘कनपुरिया बोली’ के खास शब्दों का इस्तेमाल किया गया है, जो युवाओं को खूब लुभा रहा है।
शहर की ऐतिहासिक पहचान ‘लाल इमली’ मिल और गंगा घाटों की आरती के दृश्यों ने स्टेशनों को एक अलग पहचान दी है।






