
आ स. संवाददाता
कानपुर। साइबर ठगों ने इनकम टैक्स और सीबीआई अफसर बनकर कर्मचारी भविष्य निधि संगठन के रिटायर अधिकारी से 86 लाख की ठगी कर ली। उन्हें 44 दिनों तक डिजिटल अरेस्ट रखा। पहले 50 लाख कैश ट्रांसफर कराया। इसके बाद 30 लाख की एलआईसी पॉलिसी ब्रेक कराकर अपने खाते में रकम ट्रांसफर कराई। फिर घर में रखी ज्वैलरी पर गोल्ड लोन कराकर 6 लाख हड़प लिए।
साइबर ठगों ने मकान पर भी लोन कराने की तैयारी कर ली थी। लेकिन पीएफ ऑफिस में काम करने वाले भतीजे को ट्रांजैक्शन की जानकारी होने पर पूरा मामला पता चला। अब पीड़ित ने साइबर थाने में शिकायत दर्ज कराई है।
पीड़ित विनोद कुमार झा पनकी शताब्दी नगर के हिमालय भवन अपार्टमेंट में रहते हैं। वह कर्मचारी भविष्य निधि संगठन सर्वोदय नगर कानपुर में एसएसएसए के पद से रिटायर हुए हैं। वह ईपीएफओ में विजिलेंस ऑफिसर भी रहे थे।
विनोद झा ने बताया कि उनके पास एक कॉल आई थी। कॉल करने वाले ने खुद को दिल्ली से इनकम टैक्स ऑफिसर संजय त्रिपाठी बताया। उसने कहा कि आपने मेसर्स ग्लोबल ट्रेडिंग कंपनी वजीरपुर नई दिल्ली में खोली है। इसे आपने अभी तक रजिस्टर्ड नहीं कराया है। इसका 8.62 लाख रुपए कारपोरेट टैक्स बकाया है। कॉल करने वाले ने कहा कि आप 2 दिन के लिए दिल्ली आ जाइए। जब विनोद ने बताया कि मैं शुगर और बीपी पेशेंट हूं और आने में असमर्थ हूं। मैंने किसी तरह की कोई कंपनी नहीं खोली है। फिर कॉल करने वाले ने कहा कि आप ऑनलाइन मुकदमा दर्ज करा दीजिए नहीं तो आपको जेल जाना पड़ेगा।
आपको मैं संबंधित पुलिस अफसर का मोबाइल नंबर दे रहा हूं। उन्हें बताइए कि मेरा नाम अमित चौधरी मनी लॉड्रिंग केस में संदिग्ध के रूप में शामिल किया गया है। इसके बाद पुलिस अफसर से कॉल पर जोड़ दिया।
विनोद ने बताया कि कॉल करने वाले पुलिस अफसर ने कहा कि मामले की शिकायत भी दर्ज कर ली गई है। इसकी एक कॉपी इनकम टैक्स को भी भेजी जा रही है। बताया कि अब आपकी बात इस केस की जांच अधिकारी इंस्पेक्टर विक्रम सिंह से होगी। इसके बाद पुलिस अफसर विक्रम सिंह ने फोन किया और फिर अपनी अधिकारी पायल ठाकुर से बात कराई।
पायल ने बताया कि वह सीबीआई में अधिकारी हैं। उनके केस की जांच उन्होंने शुरू कर दी है। यह 730 करोड़ की टैक्स चोरी के मामले की जांच है। इस जांच की जानकारी किसी को नहीं होनी चाहिए। अगर किसी को इस मामले की जानकारी दी, तो 3 साल की जेल और 5 लाख रुपए जुर्माना लगेगा।
पीड़ित विनोद झा ने बताया कि मैं बहुत डर गया। मैंने किसी को कुछ नहीं बताया। ठगों ने आईटी डिपार्टमेंट और सीबीआई के जांच वाले लेटर भी भेजे। विनोद झा ने कहा कि मुझे लगा सच में कोई जांच चल रही और उन्हें यह बात अपने परिवार के लोगों से भी शेयर नहीं करनी है। इससे वह खुद और पूरा परिवार मुसीबत में पड़ जाएगा।
पीड़ित ने बताया कि ठगों ने जांच का हवाला देकर 25 फरवरी 2025 को 49 लाख 50 हजार रुपए का आरटीजीएस अपने खाते में कराया। जब बैंक अकाउंट खाली हो गया तो ठगों ने पूछा कि आपके पास पॉलिसी के नाम पर क्या है, तो इन्होंने अपनी और पत्नी की एलआईसी पॉलिसी की जानकारी दी। ठगों ने उसे भी तोड़ने के लिए कहा।
ठगों ने एफडी और एलआईसी के 26 लाख रुपए भी 15 मार्च को अपने खाते में ट्रांसफर करा लिया। फिर उन लोगों ने घर में रखे ज्वैलरी के बारे में जानकारी ली। उन्होंने ज्वैलरी के नाम पर भी बैंक से 6.80 लाख रुपए का गोल्ड लोन करा लिया। इसकी रकम भी 24 मार्च को अपने खाते में ट्रांसफर कराई।
विनोद झा ने बताया कि साइबर ठगों ने फ्लैट के पेपर दिखाने का कहा और पूछा फ्लैट किसके नाम पर है। इस पर भी 50 लाख का लोन कराने की बात कही।
एक दिन उन्होंने अपने पीएफ ऑफिस काम करने वाले भतीजे राजीव झा से पूछा कि 2 अप्रैल हो गए लेकिन मेरी पेंशन अभी तक नहीं आई।
भतीजे ने मुंबई में रहने वाले अपने बड़े भाई से बात की। जब उन्होंने अकाउंट चेक किया तो सामने आया कि 24 मार्च को चाचा विनोद झा ने 6.80 लाख का गोल्ड लोन लिया है। उन्होंने सोचा कि चाचा ने पूरे जीवन में आज तक कोई लोन ही नहीं लिया, अब ऐसी कौन सी जरूरत पड़ गई कि गोल्ड लोन लेना पड़ा। इसके बाद और अकाउंट की जांच की तो देखा कि करीब 80 लाख का ट्रांजैक्शन हुआ है।
उन्होंने फौरन अपने चचेरे भाई राजीव झा से फोन पर बात की और पूरा मामला बताया। तब जाकर सामने आया कि विनोद झा को साइबर ठगों ने 44 दिन से डिजिटल अरेस्ट कर रखा था। इसके बाद साइबर ठगों ने सीबीआई अफसर बनकर जीवन भर की पूरी कमाई को धोखा देकर हड़प लिया।
अगर दो से तीन दिन और जानकारी नहीं होती तो साइबर ठग फ्लैट को बैंक में बंधक बनवाकर 50 लाख रुपए लोन कराने की तैयारी में थे। इससे पहले बात खुलने पर फ्लैट बच गया। साइबर ठगों ने कुल 86.30 लाख रुपए की ठगी की है। जिसकी शिकायत उन्होंने साइबर थाना और पनकी थाने में की है।
विनोद झा ने बताया कि शातिर ठग वॉट्सऐप ऑडियो और वीडियो कॉल पर बात करते थे। वर्दी में रहते थे, उनकी कुर्सी के पीछे दीवार पर सीबीआई का लोगो लगा था। मेज पर फाइलों के गठ्ठर और पुलिस अफसरों की आवाजाही देखकर उन्हें लगा कि यह सच में दिल्ली सीबीआई का दफ्तर है।
इंट्रोगेशन करने का तरीका और उन्हें विभागों से जुड़ी तमाम सारी जानकारी और आईटी व सीबीआई की जांच वाले लेटर भेजकर इस तरह से ब्रेनवॉश कर दिया कि उन्हें कुछ समझ ही नहीं आया। 44 दिनों तक साइबर ठगों ने उन्हें डिजिटल अरेस्ट रखा। उन्होंने अपनी पत्नी, बेटों व देखरेख करने वाले भतीजे किसी को भी इस मामले की जानकारी नहीं दी।
पनकी हिमालय भवन अपार्टमेंट शताब्दी नगर में रहने वाले विनोद कुमार झा कर्मचारी भविष्य निधि संगठन सर्वोदय नगर में एसएसएसए के पद पर कार्यरत थे। पीएफ ऑफिस की विजिलेंस टीम में भी लंबे समय तक काम किया है। घर में पत्नी रेनू झा साथ में रहती हैं।
उनका बड़ा बेटा हेमंत झा बैंक कर्मचारी हैं। वह आजाद नगर में पत्नी बच्चों के साथ रहते हैं। दूसरा बेटा अवनीश झा सूरत में परिवार के साथ रहकर प्राइवेट जॉब करता है। दंपती अकेले ही फ्लैट में रहते थे। गीता नगर क्रॉसिंग के पास रामलीला मैदान के सामने रहने वाले भतीजे राजीव झा दंपति की देखरेख करते हैं। ठगी की जानकारी मिलने के बाद से दंपति भतीजे के ही घर पर हैं।