April 22, 2026

• कोविड में मां-बाप का साया छिना, लेकिन हौसला नहीं टूटा।

संवाददाता 

कानपुर नगर। समय का उतार चढ़ाव और विपरीत परिस्थितियां कई बार हमारे सपनों को बिखेरने की कोशिश करती हैं, लेकिन हौसला मजबूत हो तो मुश्किलें भी राह नहीं रोक पातीं। बिठूर के रमेल नगर की गरिमा सिंह ने इसे सच साबित कर दिया है।

मुख्यमंत्री बाल सेवा योजना के सहयोग से छात्रा गरिमा सिंह ने हाईस्कूल परीक्षा में 92 प्रतिशत अंक प्राप्त करके  एक प्रेरक उदाहरण पेश किया है। स्कॉलर मिशन स्कूल की छात्रा गरिमा ने यह सफलता ऐसे समय में हासिल की है, जब वह बहुत कम उम्र में माता-पिता दोनों को खो चुकी हैं।

गरिमा के पिता अरविंद सिंह का निधन कोविड के दौरान हो गया था, जबकि उनकी माता संगीता सिंह का देहांत इससे पहले ही ब्लड कैंसर के कारण हो चुका था। जीवन में इतनी बड़ी त्रासदी झेलने के बाद भी गरिमा ने पढ़ाई नहीं छोड़ी। मुख्यमंत्री बाल सेवा योजना और पीएम केयर्स से मिली सहायता ने उसे सहारा दिया और इसी के सहयोग के साथ उसने अपनी पढ़ाई लगातार जारी रखी।

मुख्यमंत्री बाल सेवा योजना के अंतर्गत पात्र बच्चों को चार हजार रुपये प्रतिमाह की आर्थिक सहायता का प्रावधान है। यह राशि वर्ष में दो किस्तों में दी जाती है, जिसके तहत प्रत्येक छह माह बाद 24 हजार रुपये एकमुश्त प्रदान किए जाते हैं, जिससे बच्चों की शिक्षा और दैनिक आवश्यकताओं में सहयोग मिलता है। वहीं पीएम केयर्स फॉर चिल्ड्रेन योजना के अंतर्गत ऐसे बच्चों को 18 वर्ष की आयु पूर्ण होने पर 10 लाख रुपये की राशि देने का प्रावधान है।

गरिमा की इस सफलता के पीछे प्रशासनिक मार्गदर्शन का भी महत्वपूर्ण योगदान रहा। गत वर्ष दीपावली के अवसर पर जिलाधिकारी जितेंद्र प्रताप सिंह ने स्वयं उससे मुलाकात करके पढ़ाई से जुड़े विभिन्न पहलुओं पर उसको  मार्गदर्शन दिया था और उसे निरंतर मेहनत करने के लिए प्रेरित किया था, जिसका सकारात्मक परिणाम अब सामने आया है।

हाईस्कूल में 92 प्रतिशत अंक प्राप्त करने के बाद गरिमा सिंह ने आज कलेक्ट्रेट पहुंचकर जिलाधिकारी जितेंद्र प्रताप सिंह से मुलाकात की। जिलाधिकारी ने उसे इस उपलब्धि पर बधाई दी और उत्साहवर्धन के लिए उसे उपहार भी दिए। जिलाधिकारी ने उसकी मेहनत, लगन और आत्मविश्वास की सराहना करते हुए उसके उज्ज्वल भविष्य की कामना की।

मुख्यमंत्री बाल सेवा योजना के तहत ऐसे बच्चों को, जिनके माता-पिता दोनों नहीं हैं, उनके लिए जिलाधिकारी अभिभावक के रूप में नामित किए जाते हैं। गरिमा की सफलता यह दिखाती है कि समय पर मिला सहारा और निरंतर सहयोग किसी भी इंसान को कठिन परिस्थिति को पार करने की ताकत दे सकता है।

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