
संवाददाता
कानपुर। ट्रेनों में लूट और चोरी का गैंग चलाने वाले हिस्ट्रीशीटर को कानपुर में कोर्ट ने सजा दी है। जीआरपी ने दोषी को एक मामले में गिरफ्तार करके जेल भेजा था, जिसके बाद कोर्ट में लगातार मामले का ट्रायल चल रहा था। पुलिस ने कोर्ट में बेहतर पैरवी करते हुए कोर्ट के सामने साक्ष्य पेश किए।
पुलिस की ओर से पेश किए गए साक्ष्य और गवाहों के बयान के आधार पर पुलिस ने आरोपी को दोषी मानते हुए सजा दी है। कोर्ट से सजा मिलने के बाद पुलिस ने दोषी को जेल भेज दिया है। दोषी हिस्ट्रीशीटर के खिलाफ कानपुर के अलावा अन्य कई राज्यों में भी ट्रेनों में चोरी और लूट के मुकदमे दर्ज हैं, जिसमें वह वांछित चल रहा है।
जीआरपी ने थाना कलक्टरगंज के मालगोदाम कच्ची बस्ती निवासी सिट्टू मामा उर्फ अली पुत्र छग्गन खान को 11 दिसंबर 2024 को एक मामले में गिरफ्तार करते हुए जेल भेजा था। जिसके बाद से लगातार मामले की सुनवाई चल रही थी। जीआरपी ने कोर्ट में डिजिटल और वैज्ञानिक साक्ष्य पेश किए।
दोषी टिकट खरीदकर ट्रेन में बैठता था और फिर लोगों से मेलजोल बढ़ाता था। जब अन्य यात्रियों से बातचीत शुरू हो जाती थी, इसके बाद वह चोरी और लूट करके फरार हो जाता था। उसके अन्य कई साथी भी इस काम में शामिल थे, जिसने वह यही काम कराता था। जीआरपी इंस्पेक्टर ओम नारायण सिंह ने बताया कि एडीजे कोर्ट 5 से दोषी को सजा मिली है।
दोषी सिट्टू मामा उर्फ अली पुत्र छग्गन खान के खिलाफ सिर्फ कानपुर सेंट्रल के जीआरपी स्टेशन में 30 नामजद मुकदमे दर्ज हैं। इसके अलावा अन्य कई राज्यों और जिलों में भी दोषी के खिलाफ मुकदमे दर्ज हैं, जिसमें दोषी नाजमद है। कानपुर में दर्ज तीन मुकदमों में दोषी को सजा सुनाई गई है।
कोर्ट ने 2024 में दर्ज एक मुकदमे और 2025 में दर्ज हुए दो मुकदमों में दोषी को सजा सुनाई है और आर्थिक दंड भी लगाया है। वहीं अब अन्य मामलों में भी सुनवाई होगी, जिससे संबंधित साक्ष्य और गवाहों को कोर्ट में पेश किया जाएगा। पुलिस ने बताया कि दोषी के गैंग के अन्य सदस्यों को भी सजा दिलाने के लिए प्रभावी पैरवी की जाएगी।






