March 7, 2026

संवाददाता
कानपुर।
गंगा का जलस्तर चेतावनी बिंदु पार कर गया है। सोमवार को शुक्लागंज पर जलस्तर 113.120 मीटर दर्ज किया गया। वहीं गंगा बैराज पर जलस्तर 114.75 मीटर पहुंच गया। इसके बाद गंगा बैराज के किनारे 10 गांव के खेत गंगा के पानी में डूब गए। जिसकी वजह से फसल बर्बाद हो गई।
इसके साथ ही तीन गांव में पानी घुस गया, पानी घरों के भीतर घुस गया और पशु को चारा खिलाने वाली जगह पर पूरी तरह से डूब गई है। गांव के लोग घरों में कैद होने को मजबूर हो गए हैं। उनका कहना है कि यहां अभी कोई व्यवस्था नहीं है, उनका डर बढ़ता जा रहा है। रात में लोग छत पर रहकर गुजार रहे हैं।
सोमवार को कानपुर गंगा बैराज से 4 लाख 21 हजार 854 क्यूसेक पानी डिस्चार्ज किया गया। इसलिए गंगा किनारे रहने वाले गांव के लोग डरे हुए हैं। गंगा का जलस्तर खतरे के निशान के करीब पहुंच गया है । 
जिला मुख्यालय से तकरीबन 12 किलोमीटर दूर गंगा बैराज के किनारे से गांव बसे हुए हैं। गंगा का जल स्तर बढ़ने से तकरीबन 10 गांव प्रभावित हुए हैं। इन गांव में खेतों में लगाई गई फसल पूरी तरह बर्बाद हो गई। लोगों का किसानी के द्वारा किया जाने वाला रोजगार फिलहाल कुछ दिनों के लिए समाप्त हो गया।
इसके साथ ही तीन गांव ऐसे हैं ,जहां के लोग दहशत में है ।क्योंकि गांव में पानी घुस चुका है और कुछ घरों में भी पानी पहुंच चुका है पशुओं को सुरक्षित जगह पहुंचाने का काम इन तीन गांव के लोग कर रहे हैं। कुछ अपने रिश्तेदारों के यहां भेज रहे हैं ,तो कुछ पशुओं को अपने घर के भीतर बांध रहे हैं। क्योंकि पशु बांधने वाली जगह पूरी तरह से डूब गई है। पानी घर के भीतर खाना बनाने वाली जगह पर भी पहुंच गया है।
बनियापुरवा,चैनपुरवा और पहाड़ीपुर गांव यह तीन गांव ऐसे हैं ,जहां पर पानी गांव की गलियों रास्तों यहां तक घरों के भीतर पहुंच गया। पशु बांधने वाली जगह पर पानी इस कदर भर गया कि वह पूरी तरह से डूब गए हैं। 
प्रधान ने एक व्यवस्था कर रखी है कि ट्रैक्टर लगाया है, जिससे लोग गांव से जलभराव वाले रास्ते से बाहर जाना चाहे तो आ जा सकते हैं। लेकिन फसल बर्बाद होने से पूरा रोजगार खत्म हो गया है । यहां पर अभी नाव की व्यवस्था नहीं की गई है। घरवालों को शौचालय जाने में भी दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है। पशुओं की रहने की जगह डूब गई है । इसलिए पशुओं को घर में बांध लिया है।
चैनपुरवा वालों को बहुत ही दिक्कत हो रही है। साथ ही सारी बातें सुनकर डर भी लग रहा है ,क्योंकि पता चल रहा है की कटान बहुत तेजी से हो रही है। गांव में पानी भर जाने से बच्चे बीमार हो गए हैं। हालांकि प्रधान देखरेख करने के लिए आते हैं। आने जाने के लिए ट्रैक्टर लगा रखा है। लेकिन गांव के आसपास खेतों में 20-20 फुट पानी भर गया है।
पूरी फसल बर्बाद हो गई है। जिसमें तरोई लौकी , फूट ,बैगन लोबिया सब कुछ बर्बाद हो गया। डर इतना है कि रात में छत पर सो रहे हैं कि कहीं पानी इतना ना बढ़ जाए कि घर के भीतर घुसता ही चला जाए। गांव में कुछ घरों में पानी पहुंच भी गया है, उनके घर खाना तक नहीं बन पा रहा है।
पहाड़ीपुर के किसान ने बताया की फसल का बड़ा नुकसान हुआ है ।कम से कम 30 अमरूद के बाग में पानी भर गया है।पेड़ नीचे से सड़ रहे है । इसके अलावा लौकी, तरोई, गोभी, बैगन सब कुछ जमीन में छोटे पेड़ों में उगता है ।वह पूरी तरह से बर्बाद हो गया है। फसल बर्बाद होने वाले गांव में रामपुर भगवानदीनपुर, पहाड़ीपुर, बनियापुर, चैनपुरवा और कई अन्य गांव है। तकरीबन 10 गांव में पानी ने खेतों को बर्बाद कर दिया है।
कटरी के गांव में रहने वाले लोगों ने बताया कि अब तो घर पर ही बैठे हैं। क्योंकि फसल डूब गई है। रोजगार बचा नहीं है, इसलिए बस घर को देखने में लगे हैं की पालतू पशुओं को कैसे बचाना है। उनको सुरक्षित स्थान पर कैसे पहुंचना है।
चैनपुरवा के कई घरों में भी पानी घुस गया है। जिसकी वजह से खाना तक नहीं बन पा रहा है। खाना बनाने वाली जगह और चूल्हा डूब गया है ।यहां तक घर में बैठने की भी जगह नहीं बची है। इसलिए रात में छत पर सोते हैं। आसपास रिश्तेदार रहते हैं उनके घर में खाना बना लेते हैं या खाना वहीं बच्चे खा लेते हैं।
गांव में जिस तरफ से पानी घुस रहा है वहां गांव के लोगों ने नाव लगा दी हैं। क्योंकि किनारे पर ही घर भी बने हैं और पानी और बढ़ा तो उन्हें अपने घर आने जाने के लिए नाव का इस्तेमाल करना होगा। इसलिए पहले से ही नाव लगा दी गई है।
गंगा का जलस्तर बढ़ने से खेतों में पानी भरा इसके बाद तेजी से रोड क्रॉस कर पानी गांव की तरफ जाता हुआ दिखाई दे रहा है। ज्यादातर लोग अपने घर के बाहर बैठे हुए दिखाई दिए ,क्योंकि उन्हें डर सता रहा है । कई तस्वीरें और सामने आई , जिनमें नन्हे बच्चे खेतों में पानी भर जाने के बाद वहां खड़ी नाव के आसपास खेलते हुए नजर आए।
वहीं खेतों की फसल की बर्बादी की तस्वीर जिसमें बैगन ,तरोई और अन्य सब्जियां पूरी तरह से पानी भर जाने के कारण सड़ गई। गांव के किनारे लोगों ने जगह-जगह नाव लगा रखी है।