
संवाददाता
कानपुर। चौबेपुर विकासखंड के बनी गांव में ग्राम समाज की 12 बीघा सरकारी भूमि को अवैध कब्जे से मुक्त कराया गया। शहर सीमा से सटी रिंग रोड के पास स्थित इस करोड़ों रुपये की जमीन पर गुरुवार देर शाम नायब तहसीलदार चौबेपुर ने बुलडोजर चलवाकर कार्रवाई की।
यह मामला तब सामने आया जब ग्राम पंचायत बनी के पूर्व जिला पंचायत सदस्य शिवमोहन सिंह और प्रधान प्रियंका सिंह ने शिकायत की। उन्होंने बताया कि राजस्व गांव गंभीरपुर की घाटा संख्या 896 राजस्व अभिलेखों में ऊसर भूमि के रूप में दर्ज थी। लगभग 20 दिन पहले कुछ बाहरी लोग स्थानीय लेखपाल के साथ जेसीबी मशीन से ऊंची मेड़बंदी करने में लगे थे।
ग्रामीणों द्वारा रोके जाने पर कब्जा करने वालों ने जमीन को अपनी बताया और झगड़े पर उतारू हो गए। इसके बाद ग्रामीणों ने जिलाधिकारी कानपुर नगर और उप जिलाधिकारी बिल्हौर से शिकायत की। अभिलेखों की जांच में मामला संदिग्ध पाया गया, जिस पर जिलाधिकारी जितेंद्र प्रताप सिंह ने उप जिलाधिकारी संजीव दीक्षित को जांच के निर्देश दिए।
उप जिलाधिकारी के निर्देश पर नायब तहसीलदार दिव्या वर्मा ने बनी गंभीरपुर गांव पहुंचकर जांच की। गत 17 मार्च को उप जिलाधिकारी बिल्हौर ने उक्त सरकारी भूमि पर दर्ज चारों कब्जेदारो के नाम के आदेश को निरस्त कर दिया। उप जिलाधिकारी के आदेश पर राजस्व टीम और ग्राम प्रधान ने जेसीबी मशीन की मदद से अवैध कब्जे और मेड़बंदी को ध्वस्त कर दिया। इसके साथ ही, राजस्व टीम ने भूमि पर एक बोर्ड भी लगाया।
गांव के निवासी अजय सिंह, चंद्रप्रकाश पांडे, योगेंद्र यादव और राजकुमार ने फर्जी दस्तावेज तैयार कर वर्ष 1985 की चकबंदी के आदेश का हवाला दिया था। उन्होंने 12 जनवरी 2026 को ग्राम समाज की बंजर भूमि में दर्ज गाटा संख्या 896 की लगभग 12 बीघा जमीन अपने नाम दर्ज कराकर कब्जा कर लिया था।
बिल्हौर के उप जिलाधिकारी संजीव दीक्षित के अनुसार, नायब तहसीलदार दिव्या वर्मा से मामले की जांच कराई गई थी। जांच में मामला सही पाए जाने पर 17 मार्च को जमीन कब्जा मुक्त करने का आदेश दिया गया, जिसके बाद जेसीबी मशीन की मदद से भूमि को मुक्त कराया गया।






