January 25, 2026

संवाददाता

कानपुर। नगर के वार्ड-37 के संतलाल के हाता में रहने वाले लोगों का दर्द है कि हमें हर दिन टॉयलेट की लाइन में लगना पड़ता है। बच्चे स्कूल जाने में लेट हो जाते हैं। कोई रिश्तेदार हमारे घर नहीं आता। हमारे बेटे कुंवारे बैठे हैं। बेटियों की शादी की, लेकिन दामाद को यहां आना पसंद नहीं। क्योंकि हमारे घर पर निजी टॉयलेट नहीं है।

शुक्रवार को नगर निगम के सदन में हुए हंगामे के बाद मेयर प्रमिला पांडेय ने यहां के वार्ड के पार्षद पवन गुप्ता को आगामी 4 बैठकों के लिए सस्पेंड कर दिया। सदन में वह अपने वार्ड की इसी समस्या को उठा रहे थे, लेकिन हंगामा शुरू हो गया था। 
वार्ड 37 का ‘संतलाल का हाता’ शहर के बीचोंबीच पॉश कालोनियों के बीच स्थित है। इसकी नगर निगम कार्यालय से दूरी लगभग एक से डेढ़ किलोमीटर और जलकल विभाग से महज 500 मीटर है। फिर भी यह इलाका सबसे बड़ी मूलभूत सुविधा शौचालय के लिए तरस रहा है।
इस इलाके में सीवर लाइन नहीं है। इसी कारण से यहां किसी भी घर में निजी शौचालय नहीं है। 3000 की आबादी वाला यह पूरा इलाका सिर्फ एक सामुदायिक शौचालय पर निर्भर है। यहां 10 शौचालय बने हैं, जिसमें से 6 पुरुषों के लिए हैं और 4 महिलाओं के शौचालय हैं।
हाते में लोग 50-50 सालों से रह रहे हैं। लगभग 25 साल पहले यहां एक सामुदायिक शौचालय बनवाया गया था, जिसके बाद लोगों को खुले में शौच जाने से मुक्ति मिली। लेकिन, जैसे-जैसे आबादी बढ़ी, लोगों की परेशानी कम होने के बजाय और ज्यादा बढ़ती चली गई। हर दिन लोगों को शौच जाने के लिए संघर्ष करना पड़ता है।
संतलाल के हाते में रहने वाले 3000 लोग सिर्फ एक सामुदायिक शौचालय पर ही निर्भर हैं। सुबह जितनी जल्दी उठकर लोग शौचालय पहुंच जाते हैं, उन्हें उतनी जल्दी नित्य क्रियाओं से मुक्ति मिल जाती है। ऐसे में सुबह 5 बजे से ही बच्चे, महिलाएं, बुजुर्ग और पुरुष शौचालय की लाइन में लग जाते हैं।
वार्ड की सपना ने कहा कि हमारे क्षेत्र में सीवर लाइन नहीं है। इसलिए किसी भी घर में शौचालय नहीं है। यही कारण है कि बेटों की शादियां नहीं हो रही हैं। दामाद और रिश्तेदार घर नहीं आते, आते हैं तो कभी रात में नहीं रुकते।
बुजुर्ग नन्ही देवी ने कहा कि मेरी उम्र 80 साल की है। चलने में भी परेशानी होती है। लेकिन सुबह उठकर शौच की लाइन में लगना पड़ता है। किसी अधिकारी को हमारी समस्या की चिंता नहीं है।
वार्ड के अरुण गौतम ने कहा कि हमारे दोस्त या रिश्तेदारी के लोग हमारे घर नहीं आते हैं। हमारी बहन की शादी हो चुकी है, लेकिन हमारे बहनोई शौचालय न होने के कारण हमारे घर नहीं आते हैं।
वहीं संतराम ने कहा कि हमारे यहां रिश्तेदार नहीं आते हैं। सुबह शाम हम लोगों को शौचालय की लाइन में लगाना पड़ता है। चल नहीं पाते हैं, लेकिन शौचालय के लिए लाइन में खड़े होते हैं।
इलाके की महिलाओं का कहना है कि सालों से शौचालय के लिए सरकार से गुहार लगा रहे हैं। लेकिन सरकार यहां सीवर लाइन नहीं डाल नहीं है। अब हम अपने अधिकार और मूलभूत सुविधा के लिए भूख हड़ताल पर बैठेंगे। जब तक हमारा अधिकार हमें नहीं मिलेगा, हमारा आंदोलन जारी रहेगा। 

Related News