March 12, 2026

संवाददाता

कानपुर।  हैलट में नर्स और वार्ड बॉय मरीज को विगो नहीं लगा पाए। परिजनों ने जब देखा, तो उनको टोका। इस पर दोनों भड़क गए और परिजनों से बहस करने लगे। कहने लगे कि तुम खुद ही लगा लो। इतना ही नहीं, उन्होंने मरीज का इलाज बंद कर दिया। काफी देर तक इलाज न मिलने पर मरीज की तड़प-तड़प कर मौत हो गई।
परमट में रहने वाले नीरज शुक्ला ने बताया कि मेरा बेटा कुलदीप शुक्ला एक कंपनी में अकाउंटेंट था। परिवार में उसकी पत्नी अंकिता और 10 साल का बेटा शिवांश है। कुलदीप को 7 अगस्त की रात पेट में दर्द होने लगा।
उसे हैलट अस्पताल की इमरजेंसी में भर्ती करा दिया गया। यहां से डॉक्टरों ने रात में ही वार्ड-13 के बेड नंबर-8 पर शिफ्ट कर दिया था। जब बेटे को लेकर हम लोग वार्ड में पहुंचे, तो वहां पर नर्स आई और विगो लगाती रही। काफी देर तक की कोशिश के बाद भी वह विगो नहीं लगा सकी।
इसके बाद एक वार्ड बॉय आया। वो भी काफी देर तक विगो लगाने की कोशिश करता रहा। लेकिन, वह भी नहीं लगा सका। इस पर हमने उसे टोका तो वह लड़ने-झगड़ने लगा और तेज आवाज में बात करने लगा। हमसे कहने लगा कि हम इलाज करते हैं या तुम। अगर सब तुमको ही पता है, तो यहां क्यों आए हो?
नीरज शुक्ला ने बताया कि मैंने वार्ड बॉय की हरकत को मोबाइल में कैद करना शुरू किया। इस पर वह मेरा मोबाइल छीनने की कोशिश करने लगा। धमकी देने लगा कि यहां से बाहर नहीं जा पाओगे। इस पर मैंने कहा, अब बोलो क्या कह रहे थे कि तुम इलाज नहीं करोगे? मैं इस वीडियो को सबको दिखा दूंगा। तुम्हारी शिकायत करूंगा।
इसके बाद नर्स और वार्ड बॉय दोनों भाग गए। मैंने कई बार उनको आवाज दी, डॉक्टरों के पास गया। लेकिन, पूरी रात कोई इलाज करने नहीं आया। बेटे का दर्द बढ़ता चला गया। शुगर लेवल एकदम गिरता चला गया। काफी देर तक जब इलाज नहीं मिला, तो सुबह करीब 6 बजे बेटे ने दम तोड़ दिया। हम लोगों ने जब ये बात कही, तो डॉक्टरों ने शव हमारे हवाले कर दिया।
मेडिकल कॉलेज की उपप्रधानाचार्य डॉ. रिचा गिरी ने बताया कि मेरे संज्ञान में अभी तक ऐसा कोई मामला नहीं आया हैं। न ही किसी ने कोई शिकायत की है। फिर भी मैं एक बार इस मामले को दिखवाती हूं। अगर ऐसा कुछ है, तो मैं सख्त कार्रवाई करूंगी।