March 25, 2026

आ स. संवाददाता

कानपुर। चंद्रशेखर आजाद कृषि एवं प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय कानपुर के मृदा विज्ञान एवं कृषि रसायन विभाग के विभागाध्यक्ष डॉ. अनिल सचान ने ऊसर भूमियों में गेहूं उत्पादन की आधुनिक तकनीक विषय पर किसानों के लिए एक  एडवाइजरी जारी की है। इस एडवाइजरी में  डॉ.सचान ने बताया है कि उत्तर प्रदेश में दस लाख हेक्टेयर से ज्यादा भूमि लवण तथा क्षार से प्रभावित है जिसमें मुख्य रूप से कानपुर नगर, कानपुर देहात, कन्नौज, इटावा, औरैया, उन्नाव, फर्रुखाबाद, कन्नौज,मैनपुरी सहित कई जनपद लवण तथा क्षार से प्रभावित है। 

डा. सचान ने बताया कि इन भूमियों में लवण सहनशील गेहूं की प्रजातियां एवं नवीनतम तकनीकों के संयोजन से उत्पादन में वृद्धि कर खाद्य सुरक्षा को सतत रूप से स्थाई करने में बहुत अच्छा परिणाम प्राप्त होगा। उन्होंने बताया कि उसर भूमि में हमेशा उचित नमी पर ही जुताई करें तथा बड़े-बड़े ढेलों को भुरभुरा कर दें तथा मृदा परीक्षण की संस्तुति के आधार पर दो कुंतल जिप्सम प्रति हेक्टेयर अवश्य प्रयोग करें।

सीएसए के  मृदा वैज्ञानिक डॉ. खलील खान ने किसान भाइयों को सलाह दी है कि वह उसर भूमियों में गेहूं की बुवाई बीस नवंबर तक अवश्य कर दें। बुवाई के दिनों में औसत तापमान बीस डिग्री सेल्सियस उत्तम होता है । डॉ. खान ने बताया कि बीज पांच  सेंटीमीटर से अधिक गहराई पर न बोएं । ऊसर भूमियों हेतु गेहूं की प्रजातियां की आर एल 210 एवं के आर एल 213 सर्वोत्तम है। उन्होंने बताया कि इन प्रजातियों का चयन कर किसान भाई ऊसर भूमियों में बुवाई कर अच्छा लाभ प्राप्त कर सकते हैं।

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