March 5, 2026

संवाददाता

कानपुर। नगर के दस मार्गों पर निजी ई-बसें चलेंगी। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की अध्यक्षता में हुई मंत्रिपरिषद की बैठक में इस प्रस्ताव को मंजूरी दे दी गई।  शहर में पायलट प्रोजेक्ट के रूप में ई-बसों का संचालन नेट कास्ट कांट्रैक्ट  माडल पर होगा। कुल 12 साल के लिए ई-बस चलाने का लाइसेंस दिया जाएगा।
नेट कास्ट कांट्रैक्ट माडल में सरकार निजी संचालकों को ई-बस सेवा चलाने का लाइसेंस देगी। संचालन का मार्ग सरकार तय करेगी। कानपुर में चल रही सिटी बसों के लिए तय दर के अनुसार ही किराया होगा। चार्जिंग के लिए सभी व्यवस्था निजी संचालक को करनी होगी।
बसों की पार्किंग व चार्जिंग का स्थान सरकार देगी । चार्जिंग पाइंट पर बिजली कनेक्शन की व्यवस्था सरकार करेगी। इन बसों के ड्राइवर और कंडक्टर निजी संचालक को उपलब्ध कराना होगा। अभी प्रत्येक मार्ग पर 10-10 ई-बसे चलाने का प्रस्ताव है। इसकी शुरुआत एक-एक बस से होगी। इसके बाद बसों की संख्या बढ़ाई जाएगी। इन मार्गो पर कुल 200 बसें चलाने का प्रस्ताव हैं।
ई-बस संचालन में 10.30 करोड़ रुपये का अनुमानित खर्च आएगा। इसमें बसों की खरीद पर लगभग 9.50 करोड़ रुपये और चार्जर-उपकरण पर 80 लाख रुपये का खर्च संभावित है। संचालक को नौ मीटर की बस उपलब्ध करानी होगी। जिसमें 28 बैठने की सीटें व 13 यात्रियों को खड़ा करके ले जाने की क्षमता होगी।
एक मार्ग पर एक ही निजी संचालक बस चलाएगा। अनुबंध होने के 90 दिन के अंदर संचालक को ई-बस का प्रोटोटाइप देना होगा। सरकार इसकी समीक्षा करेगी। इसके बाद ई-बसों की आपूर्ति होगी। एक साल के अंदर बस का संचालन शुरू करना होगा। वर्तमान में नगरीय परिवहन निदेशालय प्रदेश के 15 नगर निगमों में 743 ई-बसों का संचालन करता है। इसमें 700 बसों का संचालन निदेशालय ग्रास कास्ट कांट्रैक्ट मोड में कर रही है। इसमें केंद्र सरकार ने निजी संचालकों को छूट की व्यवस्था की थी।