March 10, 2026

संवाददाता
कानपुर।
आई लव मोहम्मद लिखने पर 5 सितंबर को 25 लोगों के खिलाफ एफआईआर हुई थी। इसके 10 दिन बाद एआईएमआईएम चीफ असदुद्दीन ओवैसी ने एक्स पर लिखा कि आई लव मोहम्मद लिखना जुर्म नहीं है। अगर है, तो इसकी हर सजा मंजूर है।
ओवैसी की पोस्ट के बाद यूपी के अलग-अलग शहरों में मुस्लिम धर्म के लोगों ने प्रदर्शन शुरू किए। बरेली में आई लव मोहम्मद के पोस्टर लगे। लखनऊ में विधानसभा के सामने सपा महिला नेता ने गिरफ्तारी दी। आगरा, भदोही समेत 30 शहरों में लोग सड़क पर उतरे। सब यही चाहते है कि कानपुर में जिन लोगों के खिलाफ एफआईआर हुई, उसको वापस लिया जाए।
रावतपुर के सैय्यदनगर में 4 सितंबर को बारावफात पर चल रहे रोशनी के कार्यक्रम में आई लव मोहम्मद का साइन बोर्ड लगाया गया। 5 सितंबर को इलाके में रहने वाले हिंदू संगठन के लोगों ने इसका विरोध किया। उनका कहना था कि आई लव मोहम्मद का साइन बोर्ड पहले कभी भी नहीं लगाया गया। यह नई परंपरा है। इसे बंद होना चाहिए।
इसको लेकर हिंदू-मुस्लिम समुदाय के सैकड़ों लोग आमने-सामने आ गए। इसके बाद धार्मिक पोस्टर और बैनर भी फाड़े गए। दोनों पक्षों के बीच नारेबाजी हुई। पुलिस ने 2 घंटे तक मशक्कत करके हालात को संभाला।
10 सितंबर को रावतपुर थाने में तैनात दरोगा पंकज शर्मा की तहरीर पर 12 नामजद समेत 25 लोगों के खिलाफ रिपोर्ट दर्ज हुई। एफआईआर दर्ज होने की खबर तेजी से फैल गई। लोगों में इस मामले को लेकर गुस्सा उबलने लगा।

शारदानगर में 19 सितंबर की दोपहर मुस्लिम समुदाय के गुस्साए लोगों ने दर्ज एफआईआर को वापस लेने की मांग करते हुए जुलूस निकाला। लोगों ने इस दौरान शासन के खिलाफ नारेबाजी की। लोगों का कहना था कि क्या अब अपने पैगंबर का नाम लिखना भी गलत हो गया है? ये एफआईआर गलत है। पुलिस को इसे वापस लेना चाहिए। कोई बेगुनाह अगर जेल भेजा गया, तो आंदोलन किया जाएगा।
लखनऊ में मुस्लिम महिलाओं ने हंगामा किया। शायर मुनव्वर राणा की बेटी और सपा नेता सुमैया राणा की अगुआई में हाथों में आई लव मोहम्मद की तख्ती लेकर पहुंची महिलाओं ने विधान भवन के गेट पर प्रदर्शन किया। उनकी पुलिस से झड़प हो गई। पुलिस ने महिलाओं को हिरासत में लेकर इको गॉर्डन लेकर गईं, जहां 3 घंटे रखने के बाद उन्हें छोड़ दिया गया।
बरेली में जमात-ए-रजा-ए-मुस्तफा के निर्देश पर मुस्लिम इलाकों में जगह-जगह आई लव मोहम्मद के पोस्टर लगाए गए। मोइन खान ने कहा कि यह कदम किसी भी मजहब या समाज के खिलाफ नहीं है। यह सिर्फ मोहब्बत और अकीदा का पैगाम है। हमारा मकसद सिर्फ इतना है कि हम अपने नबी-ए-करीम से मोहब्बत का इजहार करें और उनकी सीरत-ए-पाक पर चलने की कोशिश करें। नबी की सीरत हमें अमन, इंसाफ, मोहब्बत, भाईचारे और इंसानियत का सबक देती है।
आगरा के फतेहपुर सीकरी की शाही जामा मस्जिद के बाहर मुस्लिम समुदाय ने विरोध-प्रदर्शन किया। नमाज के बाद बड़ी संख्या में जुटे लोगों ने इस कार्रवाई को धार्मिक स्वतंत्रता का हनन बताया। उन्होंने कहा कि पैगंबर मोहम्मद के प्रति प्रेम व्यक्त करना गलत नहीं है। इसे विवाद का रूप देना अनुचित है। बेगुनाह युवकों पर दर्ज एफआईआर पुलिस वापस ले।
उन्नाव के शहर काजी मौलाना निसार अहमद मिस्बाही ने बयान जारी कर प्रशासन से मुकदमा तत्काल वापस लेने की मांग की है। उन्होंने कहा कि पैगंबर हजरत मोहम्मद के प्रति प्रेम और सम्मान व्यक्त करना हर मुसलमान के ईमान का हिस्सा है। इसे अपराध की श्रेणी में रखना धार्मिक भावनाओं को ठेस पहुंचाने जैसा है।
कन्नौज के सफदरगंज मस्जिद में नमाज के बाद मुस्लिम युवकों ने जुलूस निकाला। सिर तन से जुदा जैसे नारे लगाए गए। युवकों की टोली हाथ में बैनर लेकर निकली।
भदोही नगर के माधव सिंह मोहल्ला और औराई थाना क्षेत्र में मुस्लिम समुदाय के लोगों ने जुलूस निकाला। नमाज के बाद लोगों ने आई लव मोहम्मद के बैनर और तख्तियां लेकर एफआईआर वापस लेने की मांग की।
कानपुर में मौलाना मुश्ताक अहमद मुशाहिद और मुफ्ती हबीब अख्तर शहीदी समेत अन्य लोग जॉइंट पुलिस कमिश्नर से मिले और कहा कि 4 सितंबर को मोहित वाजपेई ने विवाद खड़ा किया था, लेकिन पुलिस ने उन्हें क्लीन चिट देकर आरोप मुस्लिम समाज पर मढ़ दिए। जॉइंट पुलिस कमिश्नर ने मामले को जांच के लिए भेजा है। 

कानपुर के मरकजी काजी-ए-शरीअत डॉ. मुफ्ती मोहम्मद यूनुस रजा ने कहा कि हम सभी 20 से 22 सितंबर तक आई लव मोहम्मद दिवस मनाएंगे।