• इंग्लैंड से स्वर्ण पदक लाने की तैयारी।

संवाददाता
कानपुर। दामोदर नगर के रहने वाले जुड़वा भाइयों रोहित और राहुल गुप्ता ने इस बात को सच कर दिखाया है कि हौसले अगर फौलादी हों, तो शारीरिक कमियां कभी रुकावट नहीं बनतीं। कद में भले ही ये दोनों भाई छोटे हों, लेकिन इनके इरादे और उपलब्धियां आसमान छू रही हैं।
पैरा-क्रिकेट में अपना लोहा मनवाने के बाद, अब यह जोड़ी इंग्लैंड के मैनचेस्टर में होने वाली विश्व डार्ट्स चैंपियनशिप में भारत का प्रतिनिधित्व करने के लिए तैयार है।
रोहित और राहुल की कहानी सिर्फ खेल के मैदान तक सीमित नहीं है। इन दोनों भाइयों ने साबित किया है कि वे दिमाग और खेल, दोनों में अव्वल हैं।
रोहित गुप्ता वर्तमान में सेंट्रल बैंक ऑफ इंडिया में सीनियर मैनेजर के पद पर तैनात हैं, जबकि राहुल गुप्ता कर्मचारी भविष्य निधि संगठन में प्रवर्तन अधिकारी के रूप में देश की सेवा कर रहे हैं। दिन भर ऑफिस की फाइलों और जिम्मेदारी के बीच समय निकालकर ये दोनों भाई रोजाना 2 से 3 घंटे कड़ा अभ्यास करते हैं। उनकी यह मेहनत बताती है कि कामयाबी के लिए वक्त की कमी का बहाना कभी आड़े नहीं आता।
इन भाइयों का खेल सफर पैरा-क्रिकेट से शुरू हुआ था। राहुल और रोहित की जोड़ी ने भारतीय पैरा-क्रिकेट टीम की ओर से खेलते हुए श्रीलंका दौरे पर टीम को उपविजेता बनाने में बड़ी भूमिका निभाई थी।
क्रिकेट के मैदान पर चौके-छक्के जड़ने के बाद, अब इनका रुझान डार्ट्स की तरफ बढ़ा है। हाल ही में मलेशिया ओपन डार्ट्स में 12 देशों के 243 दिग्गजों के बीच इन्होंने कांस्य पदक जीतकर दुनिया को अपनी काबिलियत का अहसास कराया। डार्ट्स बोर्ड पर लगा उनका हर निशाना उनकी कड़ी मेहनत और अटूट एकाग्रता की कहानी कहता है।
अगस्त में होने वाली वर्ल्ड डार्ट्स चैंपियनशिप के लिए रोहित और राहुल अपने कोच शैलेश की देखरेख में पसीना बहा रहे हैं।
कोच शैलेश का कहना है कि इन दोनों का जज्बा ही उनकी असली पहचान है। ऑफिस के काम के दबाव के बावजूद, अभ्यास के प्रति इनका अनुशासन गजब का है। डार्ट्स जैसे खेल में एकाग्रता और सटीक निशाने की जरूरत होती है, जिसमें ये दोनों भाई माहिर हो चुके हैं। कोच को पूरा भरोसा है कि जिस तरह इन्होंने मलेशिया में कमाल किया है, उसी तरह विश्व चैंपियनशिप में भी वे देश की झोली में पदक जरूर डालेंगे।
कानपुर के ये ‘वंडर ट्विन्स’ आज उन लाखों युवाओं के लिए प्रेरणा बन चुके हैं जो छोटी-छोटी मुश्किलों से हार मान लेते हैं। रोहित और राहुल का मानना है कि अगर लक्ष्य साफ हो और उसे पाने का जुनून हो, तो दुनिया का कोई भी मुकाबला जीता जा सकता है। अब पूरे शहर को उम्मीद है कि मैनचेस्टर की धरती पर भी कानपुर के ये लाडले अपने सटीक निशाने से तिरंगा जरूर लहराएंगे।






