April 13, 2026

संवाददाता 

कानपुर। नगर की कमिश्नरेट पुलिस में तैनात कांस्टेबल आशीष शुक्ला यूपीपीएससी कामर्शियल टैक्स ऑफीसर कैटेगरी में 41वीं रैंक हासिल करने के साथ जीएसटी ऑफीसर बने है । उन्होंने अपनी सफलता का श्रेय डीसीपी  वेस्ट एसएम आसिम काबिदी, आईपीएस सुमित सुधाकर रामटेके, आईपीएस शिवा सिंह को दिया है ।

आशीष का कहना है कि मैं यूपीएससी  में तीन बार और पीसीएस में कई बार असफल रहा। काम के तनाव से पढ़ाई नहीं हो पा रही थी और मैं निराश हो गया था, तभी मैं आईपीएस सुमित सुधाकर रामटेके से मिला। उन्होंने समझाया कि रोज सिर्फ 3-4 घंटे पढ़ाई भी काफी है और मुझे पढ़ाई के लिए छुट्टियां दीं। उनकी सलाह से आज मैं इस मुकाम तक पहुंच पाया।
आशीष शुक्ला ने बताया- 2018 बैच में मैंने यूपी पुलिस में ज्वाइन किया था। मैंने 12वीं तक की शिक्षा नवोदय स्कूल से की। फिर इग्नू से पॉलीटिकल साइंस में मास्टर्स किया। अपनी तैयारी के बारे बताते हुए कहा- मैं पिछले सात सालों से कांस्टेबल के पद पर गोविंद नगर, क्विक रिस्पॉन्स टीम में कार्यरत रह चुका हूं।

मैंने अधिकतर ड्यूटियां नाइट में की हैं, इससे मुझे पढ़ने में फायदा मिल जाता था। मैं सुबह 4-5 बजे के बाद जब कमरे में आता था तो कविता कहानियां लिखने बैठ जाता था, उस वक्त सोचने–समझने का बहुत ही फायदा मिलता है।
आशीष शुक्ला ने बताया- जब मैंने प्री पास किया तो मैं सुमित सुधाकर रामटेके से मिलने गया। उस वक्त मैं काफी तनाव में था, क्योंकि कई बार मेरा प्री ही नहीं निकलता था। वह मुझे आदेश कक्ष में लेकर गए और मुझे मोटिवेट किया। मैंने अपनी 7 साल की नौकरी के दौरान अवकाश नहीं लिया था, जिस पर पढ़ने के लिए उन्होंने मेरी छुटि्टयां मंजूर की।
एक दौर ऐसा आया जब मेरे पिता जी एडमिट थे, उस समय मेरा ट्रांसफर भी होने वाला था। तब मैं डीसीपी वेस्ट कासिम आबिदी सर से अपनी समस्याएं बताने गया। उन्होंने मेरी समस्याएं समझीं और मेरा ट्रांसफर रोक दिया। जब अच्छे अधिकारी सुन लेते हैं, तो हम जैसे लोगों की किस्मत भी बदलती है। जिस तरह मेरे अधिकारियों ने मेरा सहयोग किया, उसी तरह मैं भी अपने अधीनस्थों का ख्याल रखूंगा।
पीसीएस अफसर बनने की प्रेरणा पर आशीष बताया- मैंने नवोदय विद्यालय से 12वीं तक पढ़ाई की, जहां कई पूर्व छात्र अधिकारी, डॉक्टर और इंजीनियर बने। ऐसे माहौल से मुझे प्रेरणा मिली।
पुलिस विभाग में भर्ती होने के बाद जब अपने वरिष्ठ अधिकारियों को देखा, तो मेरे मन में भी अफसर बनने की इच्छा जगी। यूपीएससी का पैटर्न और किताबें देखने के बाद मुझे विश्वास हुआ कि मैं भी यह कर सकते हूं। इसी लगन और मेहनत ने उन्हें आज इस मुकाम तक पहुंचाया।
आशीष बताया- मेरे पिता लखनऊ यूनिवर्सिटी से पढ़े हुए थे। वो 1970–80 दशक के बहुत अच्छे स्कॉलर थे। 1987 में उनका मानसिक स्वास्थ्य खराब हो गया था, जिसके बाद वह गांव आ गए। मैं मेंस देकर आया तो देखा कि पिता जी केजीएमयू में एडमिट थे, इसके बाद 6 माह पहले उनकी मौत हो गई।
मैं खुश हूं कि मेरा सलेक्शन हो गया, लेकिन वह मुझे पीसीएस अफसर बनते नहीं देख पाए इस बात का गम भी है। मैंने कांस्टेबल बनकर काफी कुछ फील किया है। कई बार हम लोग खाने के लिए भी परेशान होते हैं, जिन लोगों ने मुझे खाना खिलाया है, सफलता के बाद उन लोगों को भी धन्यवाद देने जाऊंगा।
यूपी पुलिस जीरो टॉलरेंस की नीति पर काम कर रही है। यूपी पुलिस को बेस्ट विसेज की आप ऐसे ही काम करते रहे। यूपी पुलिस में काफी सुधार हुए हैं। मुझे गर्व है कि मैं यूपी पुलिस का हिस्सा रहा हूं। थैंक्यू यूपी पुलिस एंड गर्वमेंट ऑफ यूपी।
पुलिस में भर्ती होने से पहले हमे पता होता है कि यह 24 घंटे की ड्यूटी होती है, इसके लिए हमें तैयार रहना चाहिए। हमें इन सब चीजों से जूझते हुए अपने लिए टाइम निकालना है, जिससे आप जो चाहते हैं वो कर सकते हैं।
आशीष मूलरूप से अमेठी के शुक्ल बाजार के रहने वाले हैं। आशीष शुक्ला के परिवार में मां शीला शुक्ला, बड़े भाई अरूण शुक्ला, विकास शुक्ला, सब इंस्पेक्टर विवेक शुक्ला और सचिवालय में हाल ही में समीक्षा अधिकारी के पद पर नियुक्त हुए अंकित शुक्ला हैं। आशीष सभी भाइयों में सबसे छोटे हैं। 

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