March 5, 2026

संवाददाता
कानपुर। 
मुझे एक एजेंट ने मोटी कमाई की बात कहकर सऊदी भेजा था। लेकिन वहां पहुंचने पर मुझे तपती रेत में छोड़ दिया गया। 19 दिन तक बिना खाना-पानी के बंधक बनाकर रखा गया। वहां से किसी तरह भागकर भारतीय दूतावास पहुंचा। तब अपने घर आ सका हूं।
यह कहना है कानपुर के आरिफ अंसारी का। जिसे मोटी कमाई का झांसा देकर सऊदी अरब भेजा गया था। वहां आरिफ एक शेख के चंगुल में फंस गया। शेख ने मोबाइल और पासपोर्ट छीनकर उसे तपती रेत में छोड़ दिया। 19 दिनों तक आरिफ को भूखा-प्यासा बंधक बनाकर रखा गया। जबरन काम करवाया गया।
सऊदी भेजने वाले एजेंटों ने भी दो लाख रुपए हड़प लिए। आरिफ किसी तरह भागकर दूतावास पहुंचा जहां से उसको भारत भेजा गया। आरोपितों के चंगुल से छूटकर किसी तरह वतन लौटा और पुलिस आयुक्त से न्याय की गुहार लगाई। 
नौबस्ता आवास विकास निवासी आरिफ अंसारी ने बताया कि उसके परिवार में मां शबाना बेगम, पिता आलमगीर अंसारी, और दो भाई आसिफ आलम अंसारी, महफूज आलम हैं।
आरिफ ने बताया कि उसके पिता आलमगीर का स्वास्थ्य ठीक नहीं रहता। घर का खर्च चलाने के लिए वह मजदूरी करता था। उसकी परेशानी देखकर दोस्त दिलशाद के जरिए रनियां निवासी शाहरुख से उसकी मित्रता हुई। शाहरुख ने उससे सऊदी अरब में मोटी कमाई का झांसा दिया।
उसके जाल में फंस मैंने बाइक बेचकर पैसों का इंतजाम किया। शाहरुख ने डेढ़ लाख रुपए लेने के बाद फतेहपुर के छुरी में रहने वाले एक अयाज नाम के युवक का नंबर दिया।
फोन पर बात करने पर अयाज ने पासपोर्ट बनवाने के लिए उससे फोटो मांगी और 15-20 दिन में 50 हजार के साथ मुंबई आने की बात कही। मुंबई पहुंचने पर अयाज ने रुपए लेकर एक कागज पर हस्ताक्षर करवाए।
इसके बाद उसे सऊदी भेज दिया। वह 9 अप्रैल को सऊदी पहुंचा जहां एक एजेंट उसे एक शेख के यहां काम करने के लिए छोड़कर चला गया।
आरिफ के अनुसार शाहरुख ने उसे मोटी कमाई का लालच दिया था। उसे बताया गया कि सऊदी अरब शहर में घर में साफ सफाई का काम करना है। 1200 रियाल मिलेंगे। लेकिन जब सऊदी से रियाद पहुंचा तो वहां एक एजेंट ने रातभर रखा।
दूसरे दिन रोमा लेकर पहुंचा और वहां एक शेख के यहां नौकरी दिलाने के बहाने छोड़कर चला गया। शेख ने मेरा मोबाइल तोड़ दिया और पासपोर्ट छीन लिया। यहां से मुझे गरा नाम के एक स्थान पर ले जाया गया। यह रेगिस्तानी इलाका था। वहां अबू जादा नाम के आदमी ने हमें बताया कि आपको ऊंट की देखभाल करनी है।
यहां पूरा रेगिस्तान था जिसकी भीषण गर्मी ने 18 दिन में मेरी हालत बद से बदतर कर दी। वहां एक टैंकर में बने कमरे में रखा जाता था जहां न तो पंखा था न लाइट। 19वें दिन 29 अप्रैल को मैंने पानी की बोतल ली और भाग निकला। एक दिन एक रात चलने के बाद वह पहाड़ पर चढ़ा जहां से उसे बस्ती दिखाई दी।
वहां पहुंचा तो लोगों ने पानी पिलाया। उन लोगों ने एक महीने तक छिपाकर मुझे रखा। इसके बाद एक दिन मैं स्थानीय लोगों की मदद से सऊदी पुलिस से मिला। जिसके बाद पुलिस मुझे दूतावास लेकर पहुंची जहां वेरिफिकेशन के बाद उस पर कोई आरोप नहीं मिले। वहां से उसे दग्मान सफर जेल भेजा गया। यहां वह एक माह 10 दिन तक बंद रहा।
आरिफ ने बताया कि उसने भारतीय दूतावास पहुंचकर आपबीती बताई। तब भारतीय दूतावास में मौजूद केरल के एक अधिकारी ने उसके लिए व्हाइट पासपोर्ट का आवेदन किया। पासपोर्ट बनकर आने के बाद उसे रियाद ले जाया गया जहां फ्लाइट से वह मुंबई पहुंचा।
आरिफ ने बताया कि वह उन खौफनाक दिनों को आज भी नहीं भूल पा रहा है। उसे तो लगा था कि जान ही नहीं बचेगी लेकिन रेगिस्तान से भागकर उसने अच्छा किया। उसने बताया कि जो लोग सऊदी में फंस जाते हैं उन्हें व्हाइट पासपोर्ट बनाकर वतन वापस भेजा जाता है।
आरिफ के मुताबिक सऊदी में फंसने के दौरान उसने किसी तरह दूसरे के मोबाइल से परिजनों को घटना बताई। इसके बाद हमारी मां ने एजेंट अयाज से बात की तो उसने गालीगलौज कर कहा कि शाहरुख के साथ मिलकर आरिफ को बेच दिया है। मां ने पुलिस को जानकारी दी, लेकिन पुलिस ने कोई कार्रवाई नहीं की।
नौबस्ता थाना प्रभारी शरद तिलारा ने बताया कि शाहरूख व अयाज पर रिपोर्ट दर्ज कर मामले की जांच की जा रही है।