
संवाददाता
कानपुर। आईआईटी कानपुर सदैव अपने छात्र समुदाय के समग्र विकास को प्राथमिकता देता रहा है और छात्रों को अपने मानसिक स्वास्थ्य, भावनात्मक आवश्यकताओं एवं व्यक्तिगत कल्याण को महत्व देने के लिए प्रोत्साहित करता है। अकादमिक उत्कृष्टता के साथ-साथ संस्थान एक ऐसी संस्कृति को बढ़ावा देता है जो छात्रों के सर्वांगीण विकास और आत्मविकास का समर्थन करती है।
अपने छात्रों के मानसिक स्वास्थ्य को और अधिक सुदृढ़ करने की दिशा में, संस्थान ने मानसिक स्वास्थ्य एवं कल्याण केंद्र का विस्तार किया है। इसके अंतर्गत गंभीर एवं जटिल मानसिक स्वास्थ्य समस्याओं से निपटने के लिए प्रशिक्षित 10 पूर्णकालिक पेशेवर मनोवैज्ञानिकों की नियुक्ति की गई है। साथ ही, एक क्लिनिकल हेड – मनोचिकित्सक को केंद्र की सभी क्लिनिकल गतिविधियों का नेतृत्व सौंपा गया है। इसके अतिरिक्त, देखभाल की निरंतरता और विशेषज्ञ हस्तक्षेप सुनिश्चित करने के लिए तीन पैनलबद्ध मनोचिकित्सक भी नियुक्त किए गए हैं।
निवारक उपाय के रूप में, सभी नए स्नातक और परास्नातक छात्रों की परिसर में आने के पहले सप्ताह में ही मानसिक स्वास्थ्य स्क्रीनिंग की जाती है। जिन छात्रों में मध्यम या उच्च मानसिक तनाव पाया जाता है, उनसे प्रशिक्षित परामर्शदाता सक्रिय रूप से संपर्क करते हैं। इसके माध्यम से विस्तृत मूल्यांकन, प्रारंभिक हस्तक्षेप और आवश्यकता पड़ने पर मनोचिकित्सकों को संदर्भित किया जाता है, ताकि शुरुआत से ही समयबद्ध और संरचित देखभाल सुनिश्चित हो सके।
परिसर को अधिक संवेदनशील और जागरूक बनाने के उद्देश्य से, संस्थान में नियमित संवेदनशीलता कार्यशालाएँ आयोजित की जा रही हैं। ये कार्यशालाएँ फैकल्टी, छात्रों और कर्मचारियों के साथ-साथ सुरक्षा कर्मियों, एसआईएस गार्ड्स, डॉक्टरों, पैरामेडिक्स, लाइब्रेरी स्टाफ, हॉल मैनेजर्स, मेस टीमों और सफाई कर्मचारियों के लिए भी आयोजित की जाती हैं, ताकि छात्र संपर्क में आने वाला प्रत्येक व्यक्ति मानसिक तनाव के संकेत पहचान सके और उचित प्रतिक्रिया दे सके।
इसके अतिरिक्त, मानसिक स्वास्थ्य आपात स्थितियों के लिए संस्थान ने 24×7 आपातकालीन मानसिक स्वास्थ्य सहायता प्रणाली लागू की है। यह प्रणाली मानसिक स्वास्थ्य एवं कल्याण केंद्र और स्वास्थ्य केंद्र के बीच घनिष्ठ समन्वय से संचालित होती है, जिससे किसी भी संकट की स्थिति में तुरंत प्रतिक्रिया और समय पर चिकित्सकीय एवं मनोवैज्ञानिक सहायता उपलब्ध हो सके।
क्लिनिकल सहायता के साथ-साथ, मानसिक स्वास्थ्य को लेकर संवाद को सामान्य बनाने पर भी विशेष ध्यान दिया जा रहा है। शैक्षणिक वर्ष के दौरान नियमित रूप से जागरूकता कार्यक्रम और कार्यशालाएँ आयोजित की जाती हैं। इसके अतिरिक्त, विश्व मानसिक स्वास्थ्य दिवस, त्योहारों के आयोजन और रन फेस्ट जैसे कार्यक्रम छात्रों के बीच आपसी जुड़ाव, सहभागिता और समुदाय की भावना को सशक्त करते हैं।
छात्रों के लिए पीयर मेंटरिंग प्रणाली को औपचारिक रूप दिया गया है, जिसमें वरिष्ठ छात्र नए स्नातक और परास्नातक छात्रों को परिसर जीवन में सहज रूप से ढलने में सहयोग करते हैं। यह व्यवस्था अकेलेपन की भावना को कम करती है और छात्र समुदाय के भीतर ही सहयोग का एक सुलभ और प्रभावी प्रारंभिक स्तर प्रदान करती है।






