March 4, 2026

संवाददाता
कानपुर।
चंद्रशेखर आजाद कृषि एवं प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय के हार्टिकल्चर विभाग ने जैविक विधि से ड्रैगन फ्रूट की खेती करके उल्लेखनीय सफलता हासिल की है। विभाग द्वारा प्रायोगिक तौर पर लगाए गए पौधों में केवल बायो इनहैंसर और बायो फर्टिलाइजर के उपयोग से उत्पादित फलों का वजन, आकार और मिठास राष्ट्रीय औसत से काफी बेहतर पाई गई है।
हार्टिकल्चर विभाग के डीन प्रो. विवेक कुमार त्रिपाठी ने बताया कि परीक्षण के तहत लगाए गए ड्रैगन फ्रूट के पौधों में बेहतर गुणवत्ता वाले फल प्राप्त हुए हैं। यह सफलता पूरी तरह जैविक पद्धति पर आधारित है। सामान्यतः ड्रैगन फ्रूट का औसत वजन करीब 200 ग्राम होता है, लेकिन सीएसए के जैविक प्रयोग में फलों का वजन बढ़कर 300 ग्राम तक पहुंच गया है। इसी तरह फल का आकार भी बढ़ा है। जहां आमतौर पर इसका व्यास 4-5 सेंटीमीटर होता है, वहीं यहां 6-7 सेंटीमीटर आकार के फल प्राप्त हुए हैं। सबसे महत्वपूर्ण उपलब्धि फल की मिठास में दर्ज की गई है। मिठास मापने की इकाई ‘ब्रिक्स’ में सीएसए के ड्रैगन फ्रूट की मिठास 15 ब्रिक्स पाई गई, जबकि इसकी औसत मिठास लगभग 11.5 ब्रिक्स ही होती है। यह वृद्धि न केवल फल के स्वाद को बेहतर बनाती है, बल्कि इसकी बाजार कीमत और उपभोक्ता की पसंद को भी प्रभावित करेगी।
प्रो. त्रिपाठी के मुताबिक, विश्वविद्यालय में साल 2023 में  ड्रैगन फ्रूट का रोपण किया गया था और तब से लगातार जैविक तरीकों के परीक्षण किए जा रहे थे। वर्षों के शोध और परिश्रम के बाद अब स्पष्ट और श्रेष्ठ परिणाम सामने आए हैं। यह प्रयोग दर्शाता है कि रासायनिक उर्वरकों और कीटनाशकों के बिना, पूर्णतः प्राकृतिक तरीकों से न केवल उत्पादन लिया जा सकता है, बल्कि फलों की गुणवत्ता को बाजार के मानकों से भी ऊपर उठाया जा सकता है।
यह सफलता उत्तर प्रदेश और आसपास के क्षेत्रों के किसानों के लिए एक नई राह खोलती है। ड्रैगन फ्रूट की खेती पारंपरिक फसलों के मुकाबले अधिक लाभकारी हो सकती है, और यदि इसे जैविक तरीके से किया जाए तो निर्यात सहित प्रीमियम बाजार में भी अच्छी कीमत पाई जा सकती है। सीएसए का यह मॉडल अब किसानों को प्रशिक्षण और तकनीकी मार्गदर्शन देने का आधार बनेगा। इससे किसानों की आय बढ़ाने, पर्यावरण संरक्षण और उपभोक्ताओं को स्वास्थ्यवर्धक उत्पाद उपलब्ध कराने जैसे कई लक्ष्यों की पूर्ति हो सकती है। विश्वविद्यालय प्रशासन इस सफलता से उत्साहित है और जल्द ही इस तकनीक को अधिक से अधिक किसानों तक पहुंचाने की योजना बना रहा है।